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LPG Cylinder: दिल्ली सरकार की 'सर्जिकल स्ट्राइक', अब खत्म होगी सिलेंडर की किल्लत; जानें क्या है नई पॉलिसी?

दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत के बीच, दिल्ली सरकार ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों के लिए नई वितरण नीति लागू की है। इसका उद्देश्य अस्पतालों, स्कूलों और अन्य आवश्यक सेवाओं को निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
Updated:- 2026-03-16, 16:05 IST
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देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत हो गई है। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में गैस के लिए लंबी कतारें लगी हैं, जिससे आम जनता के साथ-साथ होटल कारोबार भी भारी मात्रा में प्रभावित हो रहा है। ऐसे में दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बता दें कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों के लिए एक नई वितरण नीति लागू की गई है। इस नई नीति का मेन काम अस्पतालों के साथ-साथ जरूरी सेवाओं को बिना रुकावट गैस पहुंचाना है, ताकि गैस की कमी से आम जनती की लाइफ पूरी तरह ठप न हो। ऐसे में इस नई नीति के बारे  में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि एलपीजी सिलेंडर से संबंधित नई नीति क्या है। पढ़ते हैं आगे...

इस नीति का फायदा

इस नीति के तहत, अब शहर में कमर्शियल सिलेंडरों की कुल बिक्री का एक बड़ा हिस्सा सीधे सरकारी निगरानी में होगा। सरकार ने तय किया है कि रोजाना की कुल सप्लाई में से 20% हिस्सा यानि 1,800 सिलेंडर को आरक्षित रखा जाएगा। इन सिलेंडरों को सरकार अपनी देखरेख में उन संस्थाओं और लोगों तक पहुंचाएगी, जिन्हें इनकी तुरंत और सबसे ज्यादा जरूरत है। इस कदम से कालाबाजारी पर न रोक लगेगी बल्कि अस्पतालों जैसी जरूरी सेवाओं को पहले ये मिलेगी।

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दिल्ली सरकार ने अपनी नई वितरण नीति के तहत यह साफ कर दिया है कि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में सबसे पहले जनहित से जुड़ी सेवाओं को आगे रखा जाएगा। जानें इनमें कौन-कौन शामिल है-

  • मरीजों के खाना और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पताल की कैंटीन को सबसे पहले सिलेंडर दिए जाएंगे।
  • स्कूल और कॉलेजों के हॉस्टल या मेस को प्राथमिकता मिलेगी ताकि छात्रों को परेशानी न हो।

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  •  वे बड़े संस्थान जो सबी के लिए भोजन तैयार कर बड़ी आबादी तक पहुंचाते हैं।
  • ऐसी जगहें जहां गैस की किल्लत से आम लोग का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

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क्या कहते हैं आंकड़ें?

आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 60% एलपीजी, 50% प्राकृतिक गैस और 88% कच्चे तेल की आवश्यकता आयात के जरिए पूरी होती है। पहले भारत अपनी 85-90% एलपीजी का आयात सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से करता था, लेकिन युद्ध की स्थितियों ने अब घरेलू बाजार में चुनौती बढ़ा दी है।

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Images: Freepik/shutterstock

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