PF और EPS के बीच का कन्फ्यूजन करें दूर, जानें आपकी सैलरी का कितना हिस्सा फंड में और कितना पेंशन में जाता है?

PF Vs EPS: जो लोग नौकरी करते हैं उन लोगों की पूरी जमा पूंजी उनकी पीएफ होती है यानी भविष्य का सहारा प्रोविडेंट फंड। वहीं, एक होती है इपीएस पेंशन स्कीम, लेकिन अक्सर लोगों को इस बारे में पता ही नहीं होता कि पीएफ और ईपीएस दोनों में क्या अंतर है। कुछ लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं तो कुछ लोगों को लगता है कि उनका सिर्फ पीएफ कट रहा है। ईपीएस कोई लेना देना नहीं है, पर ऐसा नहीं है। ऐसे में बता दें कि इन दोनों के बीच में काफी बड़ा अंतर है और दोनों ही अलग-अलग स्तंभ हैं। एक आपकी बचत है और एक गारंटीड इनकम, जो बुढ़ापे में आपके काम आती है। ऐसे में दोनों के बारे में विस्तार में जाना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि पीएफ और पेंशन फंड यानी ईपीएस में क्या अंतर है और दोनों एक दूसरे से कैसे अलग हैं, पढ़ते हैं आगे...
PF और EPS में अंतर?
बता दें कि कर्मचारियों की सैलरी से कुछ हिस्सा ईपीएफ खाते में जमा होता है। जी हां, 12% सीधे ईपीएफ खाते में जाता है, लेकिन लोगों को पता ही नहीं है कि यह सारा पैसा पीएफ नहीं होता। 12% का 3.67% ऐप में ट्रांसफर किया जाता है जबकि कर्मचारी पेंशन योजना में 8.33% जमा होता है।
| Total EPF | 12% |
| PF | 3.67% |
| EPS | 8.33% |
सरकार ने तय की है सैलरी सीमा?
सरकार ने पेंशन के लिए वेतन सीमा तय की हुई है जो 15000 है। ऐसे में ईपीएफ की रकम पर आपको हर साल ब्याज भी मिलता है और उसे आप रिटायरमेंट के वक्त या नौकरी छोड़ने पर निकाल भी सकते हैं।

हालांकि, पेंशन के नियम थोड़े से डिफरेंट होते हैं। ऐसे में निर्भर करता है कि जिस वक्त आप पीएफ का पैसा निकाल रहे हैं उस वक्त कौन से नियम चल रहे हैं।
कैसे बनती है मंथली पेंशन?
मंथली पेंशन का पैसा आपकी जमा पूंजी पर एक फार्मूले के आधार पर तय होता है। ईपीएफओ यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अनुसार, पेंशन योग्य सेवा और पेंशन योग्य वेतन के आधार पर ही आपकी पेंशन तय की जाती है। इसका फॉर्मूला पेंशन योग्य वेतन x पेंशन योग्य सेवा/70 है।
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अगर सदस्य की हो जाए मृत्यु तो किसे मिलेगी पेंशन?
ईपीएस का सबसे अच्छा फीचर यह है कि जब व्यक्ति की डेथ हो जाती है तो उसके परिवार को पेंशन मिल सकती है। ईपीएफओ के नियमानुसार, सदस्य की पत्नी या पति को 50% हिस्सा आजीवन मिलता है। उदाहरण- अगर किसी व्यक्ति की पेंशन 7,500 बन रही है तो जब उसकी मृत्यु हो जाएगी तो पत्नी को 7500 का 50% 3750 हर महीने मिलेगा।
क्या बच्चों को भी मिलती है पेंशन?
जी हां, यदि परिवार में दो बच्चे हैं तो उन्हें भी 25-25% बाल पेंशन दी जाती है। यह तब तक मिलती है जब तक बच्चे की उम्र 25 साल नहीं हो जाती। वहीं, अगर बच्चे अनाथ हैं तो रकम 75% तक बढ़ा दी जाती है। ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित करता है कि कम से कम पेंशन ₹1000 से कम नहीं होनी चाहिए। उदहारण अगर पेंशन 600 है तो उसे सरकार बढ़ाकर 1000 से ज्यादा ले आएगी।
पेंशन कब घटती बढ़ती है?
जब व्यक्ति की उम्र 58 साल हो जाती है और उसके बाद वह सदस्य रिटायर होता है। तब कर्मचारी को एक पेंशन दी जाती है, लेकिन यदि कर्मचारी 50 साल की उम्र के बाद पेंशन का लाभ उठाना चाहता है तो वह अर्ली पेंशन प्राप्त कर सकता है। हालांकि, इस दौरान व्यक्ति को नुकसान भी हो सकता है।

जी हां, इसके तहत हर साल चार परसेंट पेंशन से कटौती हो जाती है। अगर आप 58 साल के बाद काम करते हैं और पेंशन टाल देते हैं तो वही पेंशन में 4% की बढ़ोतरी भी हो जाती है।
EPS का फायदा कौन नहीं उठा सकते?
ध्यान दें, अगर आप 10 साल की नौकरी पूरी होने से पहले ईपीएफ (EPF) से सारा पैसा निकाल लेते हैं, तो आपकी पेंशन की पात्रता खत्म हो जाती है। हालांकि, 10 साल से कम सेवा पर आप ईपीएफओ से 'विड्रॉल बेनिफिट' ले सकते हैं, लेकिन महीनेवार पेंशन नहीं। इससे अलग 50 वर्ष से कम आयु के लोग पेंशन नहीं ले सकते। साथ ही यदि आपकी कंपनी ईपीएफओ के दायरे में नहीं आती या आपका ईपीएफ योगदान नहीं कटता है, तो आप इस योजना का हिस्सा नहीं बन सकते। आपको पता होना चाहिए कि यदि आपने 10 साल की सेवा से पहले ही ईपीएस का पूरा पैसा (Full Settlement) निकाल लिया है, तो आपकी पेंशन की सर्विस हिस्ट्री खत्म हो जाती है। अगले रोजगार में आपको नए सिरे से शुरुआत करनी होगी।
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Images: Freepik/pinterest
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