घर सबका है, तो काम सिर्फ मेरा क्यों...? जानें सूझ-बूझ से कैसे बदली अपने ससुराल वालों की पुरानी सोच
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आज भी अपने पैरों पर खड़े होने के बावजूद महिलाएं घर और ऑफिस के कामों के बीच फंसे जाल से नहीं निकल पाई हैं, लेकिन एक ऐसी भी महिला है, जिसने अपनी सूझ-बूझ से अपने ससुराल पक्ष की सोच को बदला और यह बताया कि लड़के भी किचन का काम कर सकते हैं। यह कहानी गाजियाबाद की रहने वाली यशी गोयल की है, जो आज कई कामकाजी महिलाओं के लिए एक मिसाल बन सकती है। यशी की शादी से पहले सब कुछ एक सपने जैसा था। उनके मंगेतर ने वादा किया था कि वे दोनों मिलकर घर की जिम्मेदारियां निभाएंगे। यशी को लगा कि उनका शादी-शुदा जीवन बहुत अच्छा जाएगा।
लेकिन शादी के बाद हकीकत कुछ और ही निकली। यशी को जल्द ही अहसास होने लग गया था कि उन पर सुपरवुमन बनने का भारी दबाव है। उन्हें सुबह जल्दी उठकर रसोई संभालनी पड़ती, फिर ऑफिस जाना पड़ता और शाम को लौटकर दोबारा घर के कामों में लग जाना पड़ता था। वह खुद के लिए टाइम ही नहीं निकाल पा रही थीं।
जब पिछड़ी सोच से हुआ सामना
एक दिन जब यशी बहुत थक गई थीं, तो उन्होंने अने पति से मदद मांगी। तभी उनके ससुराल वालों ने वह बात कही जिसने यशी को अंदर तक हिलाकर रख दिया।
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उन्होंने कहा, हमारे घर में लड़के रसोई का काम नहीं करते, वे बस बाहर का काम संभालते हैं। औरतें तो दोनों काम करने के लिए ही बनी हैं। यशी यह सुनकर दंग रह गईं। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि उनके पति और ससुराल वाले आज के दौर में भी ऐसी सोच रखते हैं, लेकिन यशी ने हार मानने या झगड़ा करने के बजाय इस पिछड़ी सोच को प्यार और सूझ-बूझ से बदलने का फैसला ले लिया।
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कैसे बदली ससुराल वालों की सोच?
- यशी ने गुस्से में बात नहीं कि बल्कि एक दिन शांति से सबको बैठाया। उन्होंने अपनी थकान और ऑफिस के काम के दबाव के बारे में अपनी सास, ससूर और पति से खुलकर बात की। उन्होंने समझाया कि ऑफिस में उन्हें भी उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है जितनी उनका पति करता है।
- यशी की छुट्टी रविवार को होती है ऐसे वे पहले रविवार का दिन घर के पुराने कामों को निपटाने में निकालती थी, वहीं उन्होंने इस पैटर्न को तोड़ने के लिए रविवार को छुट्टी के दिन नियम बनाया कि आज सब मिलकर खाना बनाएंगे। इससे उनके ससुर और पति को भी एहसास हुआ कि रसोई का काम कितना थका देने वाला होता है। धीरे-धीरे उनके ससुर ने भी चाय बनाने जैसे छोटे कामों में हाथ बंटाना शुरू कर दिया।
- यशी ने कभी-कभी ऑफिस से देर होने पर बाहर से खाना मंगाने या सिंपल डाइट का ऑप्शन चुनना शुरू किया।

- ऐसे में यशी ने अपने पति को छोटे-छोटे कामों में शामिल करना शुरू किया। जैसे - अचानक से सब्जी काटते-काटते किसी और काम में बिजी होने का नाटक करना और अपने पति से बोलना कि प्लीज आप जल्दी से इस सब्जी को काट दो। अपने पति से डाइनिंग टेबल लगवाना। जब पति ने ये काम किए, तो यशी ने सबके सामने उनकी तारीफ की, जिससे परिवार का विरोध धीरे-धीरे कम होने लगा।
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