Fri Sep 11, 2026 | Updated 09:33 PM IST

देश की आजादी की आवाज बनी थीं मैडम भीकाजी कामा, विदेशी धरती पर पहली बार फहराया था भारत का झंडा

भीकाजी कामा की गिनती भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की महान क्रांतिकारियों में होती है। वह ऐसी महिला थीं, जिन्होंने विदेशी धरती पर भारत का झंडा फहराकर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी।
Updated:- 2026-08-14, 19:45 IST
bhikaji cama the woman who raised india first flag abroad her inspiring story

आज अगर हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं...हमारा झंडा गर्व से आसमान में लहरा रहा है, तो इसके पीछे न जाने कितने स्वतंत्रता सैनानियों का बलिदान और उनका जोश रहा है। आजादी की लड़ाई में पुरुषों के साथ महिला क्रांतिकारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिए थे। किसी ने देश के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी, तो किसी ने पूरी हिम्मत के साथ ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। ऐसी ही एक महिला थीं भीकाजी रुस्तम कामा, जिन्हें मैडम कामा भी कहा जाता था। यूं तो वह विदेश में रहती थीं, लेकिन वहां रहकर भी उन्होंने भारत की आजादी की अलख जगाई। उन्हें 'भारतीय क्रांति की माता' भी कहा जाता है। चलिए उनके बारे में जानते हैं।

कौन थीं भीकाजी कामा ?

भीकाजी कामा का जन्म 24 सितंबर 1861 में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता उस वक्त के एक बड़े वकील और नामी बिजनेसमैन थे। भीकाजी को भी बचपन से समाज से जुड़े कामों में काफी दिलचस्पी थी। वह आगे चलकर वकील बनीं। साल 1885 में उनकी शादी रुस्तम के.आर. से हुई थी। उनके पति भी वकील थे। हालांकि, कहा जाता है कि दोनों कि सोच काफी अलग थी।

bhikaji cama the woman who raised india first flag abroad

विदेश में जगाई आजादी की अलख

भीकाजी ने विदेश में रहकर देश की आजादी के लिए बहुत काम किए। उन्होंने पेरिस इंडियन सोसाइटी की शुरुआत की थी। साल 1906 से उन्होंने लंदन में रहना शुरू कर दिया था। वहां उनकी मुलाकात भारतीय क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा, हरदयाल और वीर सावरकर से हुई। उन्होंने देशभक्ति पर आधारित किताबों के लिए लंदन में एक पब्लिकेशन हाउस शुरू किया था। वह क्रांतिकारियों की आर्थिक सहायत भी करती थीं और 'वंदेमातरम' नाम से एक क्रांतिकारी पत्रिका भी निकाली थी।

यह भी पढ़ें- Independence Day 2026: जब एक महिला वैज्ञानिक ने दी नोबेल विजेता सी.वी. रमन को चुनौती, पढ़ें कमला सोहोनी की कहानी

विदेश में फहराया भारत का पहला झंडा

भीकाजी कामा ने 22 अगस्त, 1907 को जर्मनी के एक शहर स्टटगार्ट में भारत का झंडा फहराकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी थी। ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला थीं। उस वक्त की रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने झंडा फहराने के बाद एक शानदार भाषण देते हुए कहा था, "देखो संसार के कॉमरेड्स ये भारत का झंडा है, इसे सलाम करो।"

who isbhikaji cama the woman who raised india first flag abroad her inspiring story

भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है उनका नाम

भीकाजी कामा का नाम भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया गया था। भारत में कई जगहों का नाम उनके नाम पर रखा गया है। साल 1936 में उनकी मृत्यु हो गई थी। बताया जाता है कि उनके आखिरी शब्द थे, "वंदेमातरम।"

 

यह भी पढ़ें- कौन थीं डॉ. जानकी अम्माल? जिन्होंने देश के गन्ने को बनाया मीठा और 'साइलेंट वैली' को दिया नया जीवन

 


अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

FAQ
क्या दिल्ली मेट्रो का भीकाजी कामा प्लेस मैडम भीकाजी कामा के नाम पर है?
हां दिल्ली मेट्रो के भीकाजी कामा प्लेस स्टेशन का नाम मैडम भीकाजी कामा के नाम पर है।
मैडम भीकाजी कामा को "भारतीय क्रांति की जननी" क्यों कहा जाता है?
मैडम भीकाजी कामा को "भारतीय क्रांति की जननी" की उपाधि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने के लिए दी गई थी।
मैडम भीकाजी कामा द्वारा फहराया गया पहला भारतीय झंडा कैसा दिखता था?
मैडम भीकाजी कामा ने जो झंडा फहराया था, उसमें लाल, हरे और पीले रंग की तीन पट्टियां थीं और इसमें 'वंदे मातरम' लिखा था।
Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।