Fri Sep 11, 2026 | Updated 07:35 PM IST

सपना चौधरी की जिंदगी का वो सबसे काला दौर, जब अपनों की बेरुखी ने तोड़ दी थी हिम्मत

जब जीवनसाथी साथ होकर भी भावनात्मक रूप से दूर हो जाए, तो एक महिला के मन में अकेलापन और खालीपन की भावना पैदा होने लगती है। ऐसी स्थिति उसे केवल परिवार से नहीं बल्कि समाज से भी अलग कर देती है। सपना के साथ भी ऐसा ही हुआ था।
By Sakhi Digital | Edited By Priya Singh
Updated:- 2026-07-23, 00:27 IST
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Sakhi

रात काफी हो चुकी थी। घर में चारों ओर खामोशी छाई हुई थी। मैंने घर का दरवाजा और खिड़कियां बंद कीं और अपने कमरे में आकर बैठ गई। अकेलापन अब मुझे अंदर से परेशान करने लगा था। मेरे पति समर देर रात तक क्लब में रहते हैं। आज भी वह क्लब गए थे और देर रात तक वहीं रुकने वाले थे। यह उनकी पुरानी आदत है, जिसे मैं कई सालों से देखती आ रही हूं। बेटे सिद्धांत को भी विदेश गए एक साल हो गए हैं। उसके बिना समय बिताना मुश्किल हो रहा है और उसके बिना बाकी जिंदगी कैसे बीतेगी, यह सोच नहीं पा रही हूं। मन को बहलाने के लिए मैंने रिमोट उठाया और टीवी के लगभग सभी चैनल बदल डाले, लेकिन कहीं भी मन नहीं लगा। हर चैनल पर नए साल के रंग-बिरंगे कार्यक्रम चल रहे थे। शोर-शराबे से मुझे चिढ़ होने लगी थी। मैं टीवी बंद करके बिस्तर पर जाने ही वाली थी कि फोन की घंटी बजी, मैंने फोन उठा और कहा- "हैलो... सामने से आवाज आई , हां जी, क्या यह समर चौधरी का नंबर है?

"जी हां, आप कौन?"
"जी क्या आप सपना चौधरी हैं?"
"जी बोल रही हूं, लेकिन आप कौन?"
"थैंक गॉड, सपना मैं प्रभा बोल रही हूं, प्रभा सान्याल, पहचाना?"
"ओह! हां-हां, कहां से और मेरा नंबर कैसे मिला?"

Loneliness in marriage

प्रभा से फोन पर बात करने के बाद पुरानी और भूली-बिसरी यादें धीरे-धीरे मेरे मन में लौटने लगीं। मेरठ कॉलेज में हम तीनों ने साथ एडमिशन लिया था, केतकी, प्रभा और मैं। उस समय हम एक-दूसरे के लिए बिल्कुल अनजान थे। वेटिंग लिस्ट में नाम होने की वजह से हमें हॉस्टल में जगह नहीं मिल पाई थी। हालांकि हम तीनों अलग-अलग पढ़ाई कर रहे थे। केतकी ने साइंस लिया था, जबकि मैं और प्रभा आर्ट्स से ग्रेजुएशन कर रहे थे। हमारे सामने रहने की समस्या थी, समझ नहीं आ रहा था कि उस समय कहां रहें और यही परेशानी ने हमें एक-दूसरे के करीब ला दिया था। दो साल कब बीत गए, पता ही नहीं चला। परीक्षाएं खत्म हुईं और ग्रेजुएशन के बाद हम अपने-अपने घर लौट गए। अलग-अलग शहरों में रहने के बावजूद कुछ समय तक हमारी दोस्ती फोन और चिट्ठियों के जरिए बनी रही। लेकिन फिर शादी, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच धीरे-धीरे हमारा संपर्क कम होता गया और एक समय ऐसा आया जब बातचीत पूरी तरह बंद हो गई।

प्रभा से बात करने के बाद मेरा मन बार-बार उन्हीं पुराने दिनों में लौट जा रहा था। उस रात नींद मेरी आंखों से जैसे दूर हो गई थी। फोन पर प्रभा ने बताया था कि वह अब एक आश्रम में रहती है और जब हम मिलेंगे, तब विस्तार से बात करेंगे। लेकिन मेरे मन में एक सवाल बार-बार उठ रहा था-प्रभा ने अपना घर क्यों छोड़ दिया? जब मेरी शादी हुई, तब यह घर और परिवार मेरे हिसाब से ही था। किस्मत इंसान को कहां से कहां पहुंचा देती है, इसका अंदाजा मुझे समर से शादी के बाद हुआ। मेरे पति समर उन्हीं लोगों में से थे, जिनकी जिंदगी में सफलता लगातार कदम चूमती गई। वह एक के बाद एक ऊंचाइयां हासिल करते चले गए और आज अपने करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर हैं।

Husband neglect wife

हालांकि, अब ऐसा लगता है जैसे पैसे ने उन्हें मुझसे दूर कर दिया है। एक समय था जब वह मुझसे दिल से प्यार करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं लगता। अब ऐसा लगता है जैसे वह धीरे-धीरे पद के अभिमान में, वे मुझसे दूर होते गए। मेरी हर बात उन्हें बेवकूफी लगती। हाई-सोसायटी की महिलाओं से मेरी तुलना करके मुझे खराब नजरों से देखते हैं। मैं भी पढ़ी-लिखी थी, मुझमे कोई कमी नहीं है, फिर भी कभी वह मुझे किसी फैमिली फंक्शन या क्लब लेकर नहीं जाते।

सबसे हैरानी वाली बात यह है कि जब समर क्लब से लौटते, तो मैं भी अपनी उपेक्षा का जवाब देने के लिए किसी न किसी बहाने उनसे दूर रहने की कोशिश करती। इतने सालों का साथ होने के बाद भी मैं कभी उनकी निजी अलमारी तक खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। उनके पैसे कहां और कैसे खर्च होते हैं, इसकी भी मुझे कोई जानकारी नहीं थी।

घर में सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्यार, सम्मान और अपनापन अगर किसी भी रिश्ते में नहीं मिलता, तो वह इंसान जीना भूल जाता है। अक्सर वह कभी खुद को दोष देता है, तो कभी अपने साथी को, लेकिन सपना की जिंदगी में आगे क्या हुआ? क्या उसकी खामोशी कभी खत्म हुई या उसकी कहानी ने कोई नया मोड़ लिया? जानने के लिए कहानी के अगले पार्ट का इंतजार करें।

यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

लेखक- सुशीला द्विवेदी

सभी पेंटिंग्स : आशीष कच्छवाह

Main image credit- Gemini

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