'घर आने के लिए थैंक-यू मां...' जब रोली ने शादी से बचने के लिए अपने पिता की सूनी जिंदगी में घोल दी मिठास

पहले पार्ट में आपने पढ़ा था कि कैसे रोली बिना किसी झिझक के डॉ. शोभा के पास अपने पिता की शादी की बात करने पहुंच गई थी। वह चाहती थी कि डॉ. शोभा उसके पिता रमन से शादी कर लें और उसकी मां बन जाएं। रोली की बातों ने शोभा को 20 साल पुरानी गलियों में लाकर खड़ा कर दिया था। 45 साल की उम्र हो गई थी, लेकिन उन दिनों की यादें धुंधली नहीं हुई थीं। रोली की बातें सुनने के बाद डॉ. शोभा आज अपने अतीत के सारे पन्ने पलट लेना चाहती थीं। अक्सर जब जिंदगी में कुछ अच्छा होने वाला होता है, तो हम मन ही मन अपने बीते दिनों को याद करने लगते हैं और धीरे-धीरे उससे जुड़ी सारी बातें याद आने लगती हैं।
रमन का नाम सुनते ही उससे जुड़ी सारी बातें शोभा को याद आने लगी थीं। मेडिकल की पढ़ाई के समय रमन उससे एक साल सीनियर थे। हॉस्पिटल में अक्सर दोनों की ड्यूटी एक साथ लग जाती थी। पहचान से शुरू हुआ रिश्ता धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गया और कुछ ही दिनों में दोनों के दिल में प्यार की शुरुआत हो गई थी। फाइनल ईयर खत्म होते ही रमन ने शोभा को प्रपोज कर दिया। रमन की बात सुनकर शोभा शरमा गई और उसने अपनी नजरें झुका ली थीं। उसके गाल खुशी से लाल हो गए थे। उस दिन खुशी से भरी शोभा घर पहुंची और शाम को डाइनिंग टेबल पर पापा को सब कुछ बताया। लेकिन पुरानी सोच के उसके पिता ने एक मिनट में ही अपना फैसला सुना दिया था, 'दामाद वह भी दूसरी जाति का, मेरे जीते जी ऐसा नहीं हो सकता।'
साहस जुटाकर शोभा ने कहा था, 'शादी करूंगी तो सिर्फ रमन से...'। लेकिन रमन से शादी करने की इच्छा दिल में लिए ही उसके मां-पापा दुनिया से चले गए। हालांकि शोभा ने क्लीनिक खोल लिया था और मरीजों की देखभाल में खुद को व्यस्त कर लिया, फिर भी कभी-कभी अकेलापन उसे परेशान करता था। फिर एक दिन डॉ. रेखा ने उसे रमन की शादी के बारे में बताया। जब उसे पता चला कि रमन शादी करने जा रहा है, तो उसके दिल में कुछ टूट-सा गया था। आज इतने साल बाद रोली की बात सुनकर शोभा का दिल तेजी से धड़कने लगा था।
अपना कहने के लिए अब सिर्फ एक मौसी ही बची थीं। क्लीनिक से घर आने के बाद उसने मौसी को फोन किया और रोली ने जो कुछ कहा था, वह सब उन्हें बता दिया। बात सुनकर मौसी खुशी से झूम उठीं, 'शोभा, जिंदगी हर किसी को दूसरा मौका नहीं देती और फिर घर आई खुशियों को ठुकराना भी नहीं चाहिए। तुझे यह मौका मिला है, बिना देर किए इसे स्वीकार कर ले। फिर यहां तो सब कुछ तेरे लिए जाना-पहचाना ही है।' शोभा को अपनी जिंदगी में अचानक आई इन खुशियों पर यकीन नहीं हो रहा था। जिंदगी भी बड़ी अजीब होती है, जो पल सबसे खूबसूरत होते हैं, उन्हीं पर भरोसा करना सबसे मुश्किल लगता है।
दूसरे दिन इतवार था। शोभा सोने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रात बढ़ती ही जा रही थी। आज रात नींद भी किसी जिद्दी बच्चे की तरह उससे रूठी हुई थी। शोभा को सुबह होने का बेसब्री से इंतजार था। उसके मन में रमन की पसंद के रंग बार-बार आ रहे थे। जब भी वह आसमानी नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनकर हॉस्पिटल पहुंचती थी, रमन उसे देखकर कहता था, 'अच्छी लग रही हो।' शोभा शर्माकर बिना कोई जवाब दिए वहां से चली जाती थी, लेकिन पूरे दिन उसके मन में खुशी बनी रहती थी। उसने रात में ही तय कर लिया था कि सुबह कौन-सी साड़ी पहननी है। रमन का पसंदीदा आसमानी रंग।
सुबह नहाने के बाद शोभा ने आसमानी साड़ी पहनी और गले में मोतियों की वही माला डाली, जो कई साल पहले रमन ने उसे जन्मदिन पर गिफ्ट की थी। आज शोभा अपने मन में सालों से दबी सजने-संवरने की इच्छा पूरी करना चाहती थी। माथे पर चमकती बिंदी लगाने के बाद जब उसने खुद को आईने में देखा, तो खुद ही शरमा गई। ठीक दस बजे शोभा कार से रमन के घर के लिए निकल गई। कार में बैठते ही उसने रोली को फोन किया, 'रोली बेटा, तुम्हारी मां आ रही है।'
रास्ते में शोभा ने कार रोकी और गुलाब के फूलों का बुके बनवाया। कार्ड पर रमन का नाम लिखते समय वह सोचने लगी कि इस उम्र में उसे किस नाम से बुलाए। आखिर उसने 'डियर रमन' लिखकर कार्ड फूलों के बीच रख दिया। उसे मेडिकल कॉलेज के दिन याद आ गए, जब रमन बाइक रोककर उसके लिए गुलाब खरीदा करते थे और कॉलेज पहुंचने से पहले उसके बालों में लगा देते थे।
रोली ने डॉ. शोभा का फोन सुना तो बहुत खुश हुई। उसने तुरंत घर की सजावट का इंतजाम किया और साथ ही पापा के जानने वाले लोगों को भी बुला लिया। शादी कराने के लिए पंडित जी को भी बुला लिया।
रमन के घर के सामने जब शोभा की कार रुकी, तो उसके मन में अजीब-सी हलचल होने लगी। थोड़ी झिझक के साथ उसने डोरबेल बजाई। दरवाजा रोली ने खोला और गले मिलते हुए बोली, 'घर आने के लिए थैंक यू मां।' शोभा धीरे से मुस्कुरा दी। तभी पीछे से आवाज आई, 'बहारों फूल बरसाओ, मेरी मां आई है।'
कुछ ही पलों में सिल्क का कुर्ता-पजामा पहने रमन उसके सामने था। दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे। पंडित जी ने पूजा कराई और रमन ने शोभा की मांग सिंदूर से भर दी। पूरा घर खुशी से भर गया। शोभा को आज उसकी खुशियां ब्याज समेत वापस मिल गई थीं। रमन जैसा प्यार करने वाला जीवनसाथी और रोली जैसी आत्मविश्वास से भरी बेटी मिल गई थी।
यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।
लेखक- स्मिता
image credit- बबीता, gemini
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