"विहान से तलाक ले लो..." आखिर क्यों अवनी की मां अपनी ही बेटी का बसा-बसाया घर उजाड़ना चाहती है?

पहले पार्ट में आपने पढ़ा कि अवनी कैसे शादी के बाद सब कुछ संभालने के लिए सबके साथ अच्छे से बर्ताव कर रही थी, लेकिन इसके बाद भी ऐसा लगता था कि विहान उससे खुश नहीं है। अवनी अब तक एक ऐसी जिंदगी जीती आई थी, जिसमें उसने कभी अपने पापा-मम्मी को साथ बैठकर खाना खाते या आराम से बैठकर बातें करते नहीं देखा था। यहां तो साथ में डिनर करना घर का नियम था और बिना किसी वजह के हंसते रहना सबकी आदत थी। वह ऑफिस से आने के बाद अपने कमरे में जाकर आराम करना चाहती थी और खाना भी वहीं खाना चाहती थी, लेकिन विहान को यह बिल्कुल पसंद नहीं था। दोनों के बीच इस बात को लेकर हुई बहस सुनकर कमला देवी अक्सर अपनी बेटी सुकन्या के हाथों उनके कमरे में ही खाना भिजवा देतीं। कमला देवी को लगने लगा था कि विहान, बहु अवनी को घर के तौर-तरीके समझाने के चक्कर में कुछ ज्यादा ही रोकने-टोकने लगा है। वह पूरी कोशिश करतीं कि अवनी को कभी ऐसा महसूस न हो कि वह उसके साथ नहीं हैं। वह चाहती थीं कि अवनी अपनी परेशानी मायके वालों से कहने के बजाय उनसे शेयर करे। वह कहतीं, 'जैसे मैं विहान और सुकन्या की मां हूं, वैसे ही तुम्हारी भी मां हूं। तुम बिना झिझक मुझसे जो चाहे शेयर कर सकती हो।'
तब अवनी उनके हाथों को अपने हाथ में लेकर कहती, 'यू आर वेरी स्वीट मां।' कई बार तो कमला देवी विहान को ही डांट देतीं। धीरे-धीरे अवनी उनके करीब आने लगी थी। उसे लगता था कि उसकी अपनी मां के पास कभी उसके लिए वक्त नहीं होता था, लेकिन इस मां ने उसकी उस कमी को पूरा कर दिया है। उसे तब समझ आया कि छोटी-छोटी बातें शेयर करना, जैसा विहान अपने घरवालों के साथ करता है, कितना सुकून देता है। शायद इसी वजह से वह थोड़ी चुप रहने लगी थी और जब कोई उसकी बातों या जिंदगी के बारे में जानना चाहता था, तो उसे लगता था कि सामने वाला उसकी निजी जिंदगी में दखल दे रहा है। वह चाहती थी कि विहान उसकी भावनाओं को समझे, न कि हर बार उसकी कमियां बताए। वह भी अपनी तरफ से नए माहौल में घुलने-मिलने की पूरी कोशिश कर रही थी।

तभी एक दिन बेटी ने कहा 'मम्मी, भाभी को हम लोग पसंद नहीं हैं या उन्हें अपनी अमीरी का घमंड है? वह हम लोगों के साथ भी नहीं बैठतीं। मुझे तो लगता है कि वह बिल्कुल भी इस घर में एडजस्ट नहीं करना चाहतीं। ठीक भी तो है, हम ठहरे मिडिल क्लास लोग। उनके और हमारे रहन-सहन में बहुत फर्क है। हम उनके बनाए तरीके में कहां फिट बैठते हैं।'
तभी अवनी की सास कमला देवी ने गुस्से में कहा 'खबरदार, जो फिर कभी ऐसी बात कही।' 'नई जगह पर तालमेल बैठाने में हर किसी को समय लगता है। अवनी बिल्कुल अलग माहौल से आई है। उसकी सोच और आदतें भी उसी माहौल में बनी हैं। उसने बचपन से जो देखा, उसी के हिसाब से वह बड़ी हुई है। जिस जिंदगी में उसने छब्बीस साल बिताए हैं, उसे वह एकदम से नहीं बदल सकती। हमें उसे समय देना होगा। कल को तुम्हें भी किसी दूसरे घर में जाना है। खुद सोचो, क्या तुम एकदम से नए घर और नए माहौल में ढल जाओगी? नहीं ढल पाओगी। ऐसा किसी के साथ भी नहीं होता। मैं खुद इस दौर से गुजर चुकी हूं। शादी के बाद हर लड़की अपने मायके की यादों से जुड़ी रहती है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। तुम क्या हमें भूल पाओगी?'
सुकन्या यह सुनकर सहम गई। मम्मी-पापा और भाई से दूर होने का खयाल ही उसे अंदर तक डरा गया। 'बेटा, यह बात अच्छी तरह समझ लो कि जब किसी पौधे को उसकी जड़ से निकालकर किसी नई जगह लगाया जाता है, तो उसे भी वहां अपनी जड़ें जमाने और फिर से बढ़ने में समय लगता है। लड़की जब शादी करके नए घर में आती है, तो वह भी उस पौधे की तरह होती है, जिसे उसकी पुरानी जगह से निकालकर नई जगह लगाया जाता है। नई मिट्टी, खाद, पानी और धूप-छांव के बदलाव को अपनाने में पौधे को भी समय लगता है। जब उसे ठीक से बढ़ने का मौका मिलता है, तभी वह खिलता है, वरना धीरे-धीरे मुरझा जाता है। उसे भी समय देना पड़ता है। हम तो इंसान हैं। हमारे अंदर भावनाओं के साथ-साथ तरह-तरह के विचार भी चलते रहते हैं। शादी के बाद जिंदगी का एक नया दौर शुरू होता है। बीते हुए पल उसे पीछे खींचते हैं और नई खुशियां उसे अपने पास बुलाती हैं। इस नए दौर में मैंने भी न जाने कितनी परेशानियां झेली थीं, लेकिन तुम्हारे पापा ने मेरा साथ दिया।

मैं भी चाहती हूं कि विहान उसका साथ दे और तुम भी भाभी को समझो। आज अगर तुम इन बातों को समझ लोगी तो आगे चलकर परेशानी नहीं होगी। हर समय मैं तुम्हें समझाने के लिए तो नहीं रहूंगी।' नजरिया बदलते ही दूसरे के मन को समझना आसान हो जाता है। कमला देवी के साथ-साथ अब सुकन्या भी अवनी को पूरा सहयोग देने लगी थी। विहान को डर रहता था कि कहीं मां-पापा को अवनी का व्यवहार बुरा न लग जाए, इसलिए वह हर बात में अवनी को ही गलत कह देता था। लेकिन जब उसने मां को अवनी का साथ देते देखा तो उसने भी अवनी को हर बात पर टोकना बंद कर दिया। अपने ससुरालवालों का इतना प्यार, भरोसा और उसकी कमियों को छिपाकर उसे अपनाने की कोशिश देखकर अवनी को धीरे-धीरे लगने लगा कि यही उसका परिवार है। अब वह कमला देवी के काम में भी मदद करने लगी थी। उनके साथ बैठकर समय बिताना या यूं ही बातें करना उसे अच्छा लगने लगा था।
पौधे को जैसे प्यार और भरोसे की सही खाद और पानी मिलने लगा था। अवनी खुद अपने अंदर आए बदलाव को देखकर हैरान थी। पिछले कुछ दिनों से उसके अंदर कितनी चिड़चिड़ाहट भर गई थी। जब भी उसने अपनी मम्मी से कुछ कहने की कोशिश की थी, तो उसे यही सुनने को मिला था, 'हम तो पहले से ही जानते थे कि उस मिडिल क्लास घर में तुम ज्यादा दिन नहीं रह पाओगी। विहान से तलाक ले लो और अपनी जान छुड़ाओ। अगर उसने कुछ कहा तो तुम्हारे पापा पूरे परिवार को बर्बाद कर देंगे।' यह सुनकर उसकी चिड़चिड़ाहट और बढ़ जाती थी।
विहान से भी उसके मतभेद होने लगे थे, लेकिन वह विहान के बिना नहीं रह सकती थी। वह उससे बहुत प्यार करती थी। सच देखा जाए तो कमी न उसमें थी, न विहान में और न ही उसके परिवार में। बस उसे नए घर और नए माहौल के साथ तालमेल बैठाने में थोड़ा समय लग रहा था। कमला देवी के धैर्य, सुकन्या के साथ और विहान के पापा के बिना कुछ कहे, प्यार और भरोसे से धीरे-धीरे अवनी घर में सबके साथ अपनी बातें शेयर करने लगी। 'मम्मी, अब डिनर आप कमरे में नहीं भेजेंगी। अब से हम सब साथ बैठकर खाना खाएंगे।' टेबल पर खाना लगाते हुए अवनी ने कहा, ये सुनते ही विहान के चेहरे पर खुशी आ गई। उसके मन में जो भी डर और शक था, वह सब दूर होने लगा। अब घर नहीं टूटेगा, उसने प्यार से अवनी की ओर देखा।
तभी सुकन्या मां के कान में धीरे से बोली, 'मम्मी, जड़ें मजबूत हो गई हैं, देखो न, पौधों में कितने प्यारे-प्यारे फूल खिल आए हैं।' यह सुनते ही सास हंस पड़ी। 'तुम क्या कह रही हो?' अवनी ने हैरानी से पूछा। 'कुछ नहीं भाभी, बस कह रही थी कि आप कितनी स्वीट हो। आपके आने से हमारे घर में बहार आ गई है।' वहीं कमला देवी की आंखों को देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे अवनी ने 'एक और नया पड़ाव पार कर लिया है।'
यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।
लेखक- सुमन बाजपेयी
Image credit- gemini, pradeep sen gupta
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