'Teen-Ternity' ट्रेंड क्या है, जानें क्यों इसे अपना रहे हैं कुछ पेरेंट्स?

आज के समय में बच्चों की परवरिश करना पेरेंट्स के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। यही कारण है कि पेरेंटिंग की दुनिया में कई नए टर्म्स ट्रेंड करते रहते हैं। इन्हीं में से एक है टीन-टर्निटी ट्रेंड। यह टर्म इन दिनों काफी चर्चा में है। यह नया ट्रेंड बताता है कि किशोरावस्था में बच्चों को पेरेंट्स के मेंटल और इमोशनल सपोर्ट की कहीं ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में इस ट्रेंड से जुड़ी खास बातों के बारे में पता होना जरूरी है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से टीन टर्निटी के बारे में जानेंगे। इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...
क्या है 'Teen-Ternity' शब्द का मतलब?
'टीन-टर्निटी' शब्द टीन और मैटरनिटी को जोड़कर बना है। हालांकि, आपको पता होना चाहिए कि यह किसी कंपनी की ऑफिशियल मैटरनिटी लीव की तरह कोई सरकारी या एचआर पॉलिसी नहीं है। यह पेरेंट्स द्वारा खुद लिया गया एक फैसला है। इसके तहत वर्किंग पेरेंट्स अपने टीनेज बच्चों के लिए काम के घंटे कम कर रहे हैं, फ्लेक्सिबल जॉब चुन रहे हैं या कुछ समय के लिए अपने करियर से ब्रेक ले रहे हैं।

पेरेंट्स क्यों अपना रहे हैं यह 'Teen Ternity' ट्रेंड?
अक्सर माना जाता है कि बड़े होने के बाद बच्चों को पेरेंट्स की कम जरूरत होती है, लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है। टीनेजर्स को कपड़े पहनने या खाना खाने के लिए भले ही किसी की मदद की जरूरत न हो, लेकिन इमोशनली और मेंटली उन्हें पेरेंट्स के साथ की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में इस उम्र में करियर का स्ट्रेस, पहचान की चिंता और अकेलेपन से बचाने के लिए पेरेंट्स उनके साथ समय बिताना जरूरी मान रहे हैं।
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Teen Ternity से जुड़ी रिसर्च क्या कहती हैं?
पीयू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) के एक सर्वे के अनुसार, लगभग आधे टीनेजर्स हर समय ऑनलाइन रहते हैं। ऐसे में आजकल स्कूल खत्म होने के बाद भी सोशल मीडिया के जरिए दोस्तों का प्रेशर और स्ट्रेस बच्चों के घर तक पहुंच जाता है। रिसर्च में शामिल आधे से ज्यादा टीनेज बच्चों ने खुद माना कि सोशल मीडिया का उनके मेंटल हेल्थ और व्यवहार पर बेहद नकारात्मक असर पड़ रहा है।

Teen Ternity पर एक्सपर्ट की राय
एक्सपर्ट् के मुताबिक, टीनेज में बच्चों को सही रास्ता दिखाना बहुत जरूरी है। इस उम्र में यदि पेरेंट्स घर पर उनके साथ मौजूद रहते हैं, तो बच्चे अपनी बातें खुलकर शेयर कर पाते हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'टीन-टर्निटी' के जरिए पेरेंट्स और बच्चों का रिश्ता मजबूत होता है, जिससे बच्चे डिप्रेशन, एंग्जायटी और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं से सेफ रहते हैं।
टीन-टर्निटी पेरेंटिंग ट्रेंड बच्चों और पेरेंट्स के बीच के रिश्ते को और मजबूत कर सकता है और बच्चों को सही रास्ता दिखाने में भी मदद करता है।
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