जब सेंसर बोर्ड की मुखिया Asha Parekh से उलझ पड़े थे Mahesh Bhatt, धमकी तक पहुंच गया था मामला

महेश भट्ट की एक फिल्म लगभग तीन महीने तक सेंसर बोर्ड के पास थी और इसे लेकर उनके और सेंसर बोर्ड की मुखिया आशा पारेश के बीच काफी तनातनी भी हो गई थी। चलिए आपको सुनाते हैं यह दिलचस्प किस्सा।
Updated:- 2026-09-01, 22:10 IST
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आशा पारेख की गिनती 60 और 70 के दशक की लीडिंग लेडीज में होती थी। उन्होंने अपने दमदार अभिनय, डांस और खूबसूरती से सभी का दिल जीता। यूं तो उस दौर में बॉलीवुड में कई एक्ट्रेसेस परदे पर राज कर रही थीं, लेकिन आशा पारेख लगातार हिट फिल्में देकर अपनी अलग पहचान बना रही थीं। 1960 और 70 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर उनकी फिल्में लगातार हिट हो रही थीं और इसलिए उन्हें जुबली गर्ल कहा जाने लगा था। एक्टिंग के अलावा उन्होंने कई टीवी सीरियल्स को डायरेक्ट भी किया था। उन्हें कई बड़े पुरुस्कारों से भी नवाजा गया। उनके नाम कई उपब्लियां हैं। साल 1998 से 2001 तक आशा पारेख सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की पहली महिला चेयरपर्सन बनीं और यहीं से उनके नाम कुछ विवाद भी जुड़े। इसी दौरान फिल्म 'जख्म' को लेकर मुकेश भट्ट और महेश भट्ट संग उनका विवाद भी हुआ, जो काफी चर्चा में रहा था। चलिए आज हमारी खास सीरीज 'फिल्मी गलियारों से' में आपको सुनाते हैं यह दिलचस्प किस्सा।

फिल्म 'जख्म' को लेकर हुआ था विवाद

फिल्म 'जख्म' को लेकर आशा पारेख और महेश भट्ट का विवाद उस दौर में काफी चर्चा में रहा था। इस बारे में आशा पारेख ने खुद अपनी किताब में लिखा है कि इस फिल्म की रिलीज को लेकर सेंसर बोर्ड का मानना था कुछ सीन्स के चलते इसे पुलिस विभाग के सीनियर अफसरों को दिखाया जाए, क्योंकि इसमें कई ऐसे सीन थे, जिन पर विवाद हो सकता था। आशा पारेख की तरफ से ऐसा कहा गया कि महेश भट्ट और मुकेश बट्ट इस फिल्म की एक प्री-स्क्रीनिंग रखें ताकि सीनियर पुलिस अधिकारी इसे देख सकें। हालांकि, महेश भट्ट और मुकेश भट्ट इस फैसले से खुश नहीं थे और उन्होंने आशा पारेख को धमकी दी थी कि अगर वह इस फिल्म को क्लियर नहीं करेंगी, तो वह दिल्ली जाकर इसे पास करवा लेंगे। बाद में कुछ कट्स और कुछ सीन्स को ब्लर करके इस फिल्म को रिलीज कर दिया गया था। कई जगह ऐसा भी कहा गया कि इस फिल्म की रिलीज को लेकर महेश भट्ट ने आशा पारेख के साथ गाली-गलौच भी की थी।

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'हिटलर' का मिला था टैग

जब आशा पारेख सेंसर बोर्ड की चेयरपर्सन बनी थीं, उस दौर में और भी कई फिल्मों को लेकर विवाद हुआ था। इसमें शेखर कपूर की फिल्म 'एलिजाबेथ' भी शामिल थी। शेखर कपूर इस फिल्म को 'यू' सर्टिफिकेट दिलवाना चाहते थे, लेकिन इसे 'ए' सर्टिफिकेट दिया गया था। इसके बाद आशा पारेख के खिलाफ कई आर्टिकल्स लिखे गए और कई जगहों पर उन्हें 'हिटलर' तक कहा गया।

 

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