पहले फिल्में इतनी लंबी क्यों बनती थीं? ये है असली वजह

पुराने समय की फिल्में 3 से 4 घंटे की हुआ करती थी। एक तरफ जहां आज के समय में लोगों को 2:30 घंटे की फिल्म में भी इंटरवल देखने को मिलता है। वहीं पहले के समय में दर्शक पूरे धैर्य के साथ बैठकर कहानी का आनंद लेते थे। उस दौर में सिनेमा देखने का अनुभव भी अलग हुआ करता था। लोग परिवार के साथ फिल्म देखने जाते थे और इसे एक खास अवसर की तरह देखते थे। हालांकि, आज के समय ऐसी-ऐसी फिल्में आने लगी हैं, जिसे पूरे परिवार के साथ बैठकर नहीं देखा जा सकता। आज के इस आर्टिकल में हम आपको पहले फिल्में इतनी लंबी क्यों बनती थीं, इसके बारे में विस्तार से जानकारी देने वाले हैं। इससे आप समझ पाएंगी कि ऐसा क्यों होता था?
कहानी के हर किरदार को समय देते थे
पहले के समय में निर्देशक और लेखक कहानी के हर किरदार को अच्छे से दिखाते थे। उस समय फिल्में केवल मनोरंजन का साधन नहीं होती थी, बल्कि उससे परिवार, समाज, रिश्ते, और भावनाएं भी जुड़ी थीं। यही कारण है कि लेखक किसी भी किरदार को दिखाते समय इस तरह पेष करता था, जिससे दर्शक उनसे जुड़ाव महसूस करे। उनका मकसद फिल्म खत्म करने पर नहीं होता था, बल्कि वह चाहते थे कि समाज को किसी भी फिल्म को देखकर अच्छा अनुभव हो। वह हर एक किरदार के रोल को याद रखें। यही कारण है कि वह किरदार को बहुत डिटेल के साथ दिखाते थे, जिसे दिखाने में समय ज्यादा लगता था। किरदारों के बचपन से लेकर बड़े होने तक की यात्रा, रिश्तों में बदलाव और हर घटना को विस्तार से दिखाते थे।
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एडिटिंग टूल की कमी
उस समय एडिटिंग भी इतनी खास नहीं होती थी, क्योंकि अच्छे टूल नहीं थे। ऐसे में वीडियो के साथ बहुत ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की जा सकती थी और बहुत ज्यादा कट लगाना भी मुश्किल था। फिल्म बनाने में समय और मेहनत ज्यादा लगती थी, इसलिए शूट किए गए कई सभी सीन को वह फिल्म में दिखाने की कोशिश करते थे। पहले फिल्मों की एडिटिंग रीलों के माध्यम से की जाती थी। फिल्म की रील को काटकर और जोड़कर सीन तैयार करना इतना आसान नहीं हता था।

लोगों को लंबी फिल्में पसंद थी
एक सबसे बड़ा कारण यह भी था कि उस समय लोगों को बहुत फास्ट चलने वाली कहानियां नहीं पसंद थी। वह लंबी-लंबी वीडियो और कहानी देखना पसंद करते थे, क्योंकि फिल्म देखना उनके लिए एक पर्व की तरह होता था। पहले के जमाने में टच फोन नहीं थे, जिसमें वह कभी भी कुछ भी देख सकें। ऐसे में वह फिल्म देखने के खास समय को जल्दी खत्म होते नहीं देखना चाहते थे। इसलिए, फिल्मों के लंबा होने का एक कारण यह भी था।
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मूक फिल्में बनती थी
फिल्में लंबी होने का एक कारण, संवाद की कमी होना भी था। पहले की फिल्में मूक (शांत) होती थीं। उस समय ऐसा टूल नहीं आया था, जिसमें वीडियो के साथ आवाज भी सुनाई जा सके। इसलिए, ऐसे सीन दिखाए जाते थे, जिसमें लोगों को फिल्म देखकर कहानी को समझना होता था। ऐसे में बिना बोले हर बात को समझाने के लिए निर्देशक को डिटेल में काम करना पड़ता था, जिसके चलते फिल्म लंबी बनती थी। दर्शकों को समझ आए, इसलिए हर बात को डिटेल्स के साथ समझाया जाता था।
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Image Credit : magnific
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