इंश्योरेंस इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रहे हैं जॉब के मौके, जानें कैसे बनाएं फ्यूचर?

कोरोना की पहली और दूसरी लहर के हालात देखने के बाद अब ज्यादा से ज्यादा लोग इंश्योरेंस लेना चाहते हैं। यह स्थिति सभी तरह के इंश्योरेंस में देखी जा रही है। ऐसे में जैसे-जैसे इंश्योरेंस की मांग बढ़ रही है और इंडस्ट्री आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें रुचि रखने वाले युवाओं के लिए करियर के मौके भी बढ़ रहे हैं। इस लेख में हमने इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, मुंबई के चीफ पीपल ऑफिसर प्रवीन मेनन से भी बात की है। जानते हैं आगे...
इस इंडस्ट्री में है बहुत संभावनाएं
रोजगार की संभावनाओं की बात करें तो आज इस सेक्टर में भी बैंकों की तरह ही बड़े स्तर पर कार्यबल की जरूरत देखी जा रही है। युवा यहां मार्केटिंग, अकाउंटिंग, एचआर, ऑपरेशन्स, एक्चुरियल, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और रिसर्च जैसे विभागों में अपनी योग्यता और क्षमता के आधार पर नौकरी पा सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म्स और स्टार्टअप्स के रूप में भी दिनोंदिन संभावनाएं बढ़ रही हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आने वाले पांच वर्षों तक इस इंडस्ट्री में बहुत संभावनाएं बनी रहेंगी।

जॉब के मौके
इंश्योरेंस सेक्टर में करियर का सवाल इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस फील्ड में जाना चाहते हैं:
- सेल्स: यदि आप सेल्स में करियर बनाना चाहते हैं तो ग्रेजुएशन से लेकर एमबीए तक के युवाओं की भर्ती होती है। यहाँ फ्रंट लाइन सेल्स, सुपरवाइजरी, मिडल मैनेजमेंट और लीडरशिप जैसे अलग-अलग स्तरों पर योग्यता और अनुभव के आधार पर करियर बना सकते हैं।
- एक्चुरियल सेक्शन: इस विभाग से जुड़ने के लिए इससे संबंधित विशेष कोर्स करना जरूरी है।
- फाइनेंस सेक्शन: इसके लिए अकाउंटिंग, सीए या एमबीए फाइनेंस होना चाहिए।
- इन्वेस्टमेंट सेक्शन: इंश्योरेंस के रूप में जो पैसा आता है, उसे सही जगह निवेश करने का काम यह विभाग देखता है। यहाँ करियर बनाने के लिए मार्केट का अच्छा अनुभव होना जरूरी है।
- ऑपरेशन्स सेक्शन: चूंकि इंश्योरेंस सेक्टर नियमन के अंतर्गत आता है, इसलिए ऑपरेशन्स के तहत इंटरनल ऑडिट, कंप्लायंस, रिस्क, क्लेम और लीगल जैसे उप-विभाग भी होते हैं। यहाँ भी योग्यता के अनुसार करियर बनाया जा सकता है।
इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए क्या है जरूरी?
इंश्योरेंस इंडस्ट्री में दूरदर्शी यानी आगे की सोच पर बहुत ध्यान दिया जाता है। यहां अगले पांच-दस वर्षों में आने वाले बदलावों और बाजार की जरूरतों को देखते हुए प्रोडक्ट और पॉलिसी बनाई जाती हैं। इसके लिए रिसर्च के साथ-साथ इनोवेशन पर भी इंश्योरेंस कंपनियों का विशेष जोर रहता है।
इसलिए जब भी ये कंपनियां प्रोफेशनल्स हायर करती हैं, तो यह देखती हैं कि उम्मीदवारों में काम करने की क्षमता कितनी है। उन्होंने क्या-क्या सीख रखा है और वे कंपनी के लिए क्या नया कर सकते हैं। यही वजह है कि इस फील्ड में आने वाले युवाओं को ग्रेजुएशन के अलावा अपने संबंधित क्षेत्र में जरूरी कौशल हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए।
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सैलरी पैकेज
- शुरुआती में: यदि कोई उम्मीदवार केवल ग्रेजुएट है तो शुरुआती सैलरी पैकेज 3 लाख रुपये सालाना से शुरू हो सकता है। इसके साथ 100 प्रतिशत तक परफॉर्मेंस इंसेंटिव और बोनस भी मिलता है।
- अनुभव के बाद: यदि शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ काम का अनुभव भी है तो सैलरी 8 से 10 लाख रुपये सालाना तक हो सकती है।
- ऑपरेशन्स और एक्चुरियल: इस क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स का पैकेज 6 से 15 लाख रुपये सालाना तक हो सकता है।
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लेखक: धीरेन्द्र पाठक
Images: magnific
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