दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' पिछले कुछ दिनों से विवादों में है। पहले बिना किसी शोर के फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया। फिल्म को कुछ ही घंटों के अंदर लाखों लोगों ने देखा और सोशल मीडिया पर इसे एक मस्ट वॉच फिल्म बताया। मूवी क्रिटिक्स ने भी इसे काफी अच्छे रिव्यूज दिए, लेकिन 3 जुलाई को रिलीज हुई इस फिल्म को 5 जुलाई को ZEE5 से हटा लिया गया। इसे लेकर कई सितारों और फैंस ने आवाज उठाई और इसे गलत बताया। इसी बीच IMDb पर फिल्म की रेटिंग भी अचानक से गायब हो गई है। बताया जा रहा है कि परसों यानी मंगलवार (7 जुलाई) तक IMDb पर फिल्म की रेटिंग 9.5 दिखाई दे रही थी, लेकिन अब वो नजर नहीं आ रही है। इसे लेकर भी पब्लिक में गुस्सा नजर आ रहा है। चलिए आपको बताते हैं कि क्या है पूरा मामला?
IMDb पर 'सतलुज' की रेटिंग हुई गायब
हनी त्रेहान की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी से हटाने पर विवाद अभी थम नहीं पाया था कि IMDb ने भी फिल्म की यूजर रेटिंग अपने प्लेटफॉर्म से हटा दी है और इसे लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
इस फिल्म की रेटिंग कुछ दिन पहले तक 9.5 दिखाई जा रही थी यानी इसे बेहतरीन फिल्म बताया जा रहा था, लेकिन अचानक से इसकी रेटिंग हटाना यूजर्स को रास नहीं आ रहा है। इसे लेकर इंटरनेट पर कई यूजर्स ने नारजगी जाहिर की है और फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने भी एक्स पर IMDb की रेटिंग प्रणाली सवाल खड़े किए हैं और कहा कि इस तरह रेटिंग हटाने से साबित होता है कि इसकी रेटिंग पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।
दिलजीत दोसांझ ने कही थी यह बात
फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी से हटाए जाने पर दिलजीत दोसांझ ने कहा था कि उन्हें पता था ऐसा जरूर होगा और इसलिए फिल्म को चुपचाप रिलीज किया गया था क्योंकि अगर प्रमोशन किया जाता, तो फिल्म रिलीज ही नहीं होने दी जाती। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें खुशी है कि फिल्म लोगों तक पहुंच गई है और वो इसे देख रहे हैं।
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फिल्म का सेंसर बोर्ड से चल रहा था विवाद
इस फिल्म का नाम पहले 'पंजाब 95' था और कई सालों से यह सेंसर बोर्ड संग विवाद के चलते रिलीज नहीं हो पा रही थी। सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने की बात की थी। यहां तक कि फिल्म के मेन किरदार का नाम बदलने के लिए कह दिया गया था। इसी के चलते फिल्म को बदले हुए नाम सतलुज के साथ ओटीटी पर रिलीज किया गया था। बता दें कि यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है। उन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में कई हजार लोगों के लापता होने और अज्ञात लोगों के अंतिम संस्कार पर सवाल उठाए थे। बताया जाता है कि सितंबर 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया था और फिर वो कभी वापस नहीं लौटे थे।
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