ध्रुव त्रिपाठी के निर्देशन में बनी इन्वेस्टिगेटिव क्राइम थ्रिलर फिल्म 'रिपोर्टिंग लाइव' शुक्रवार, 9 अक्टूबर को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। इस फिल्म में परिणीति चोपड़ा लीड रोल में हैं। यह फिल्म रेत के अवैध खनन के पीछे छिपे काले कारोबार के इर्द-गिर्द घूमती है। कैसे रेत माफिया का खतरनाक सिंडिकेट बेखौफी से चल रहा है, कैसे बिजनेसमैन, पॉलीटिशियन, ठेकेदार और भ्रष्ट सिस्टम इसे और मजबूत बना रहा है और कैसे एक पत्रकार अपनी जान पर खेलकर इस पूरे जाल का पर्दाफाश करने के लिए अपनी जान पर खेल जाता है, यह इस सीरीज में बखूबी दिखाया गया है। यह फिल्म देखने लायक है या नहीं, कहानी के क्या मजबूत पहलू हैं और कहां यह कमजोर पड़ती है, मुख्य किरदारों की एक्टिंग कैसी है, चलिए आपको पूरी डिटेल्स बताते हैं।
रिपोर्टिंग लाइव रिव्यू
| स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म | नेटफ्लिक्स |
| रनटाइम | 1 घंटे 56 मिनट |
| स्टारकास्ट |
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क्या है रिपोर्टिंग लाइव की कहानी?
इस फिल्म की कहानी की शुरुआत गांव में बने एक पुल के गिरने की घटना से होती है। इस हादसे में कई स्कूली बच्चों की जान चली जाती है। इस घटना की रिपोर्टिंग के लिए निडर रिपोर्टर संध्या यादव (परिणीति चोपड़ा) और उनके कैमरामैन विनोद (देवेन भोजानी) वहां पहुंचते हैं। वहां जाकर रिपोर्टिंग के दौरान उन्हें पता चलता है कि इस पीछे छुपी हुई अवैध रेत खनन की कहानी पता चलती है। इसके जरिए कैसे न केवल नदियों का बहाव बदल रहा है, बल्कि आस-पास की उपजाऊ जमीन भी बंजर हो रही है। संध्या निडर और महत्वाकांक्षी है, ऐसे में उसे बतौर जर्नलिस्ट यह एक बड़ी स्टोरी लगती है। वह इस गोरखधंधे की तह तक जाने और इस अपराध का पर्दाफाश करने में जुट जाती है, इसमें उसे शिवा काका (अमोल पालेकर) और मंगेश (पितोबाश त्रिपाठी) का साथ मिलता है। इसमें न केवल नौकरी जाने का खतरा है बल्कि जान का भी जोखिम है, लेकिन संध्या हर मुश्किल के सामने खड़ी होती है। संध्या और विनोद क्या इस मिशन में कामयाब हो पाएंगे या नहीं, यह जानने के लिए आपको नेटफ्लिक्स पर इस फिल्म को देखना होगा।
दमदार है एक्टिंग
परिणीति चोपड़ा ने संध्या यादव के रोल में खुद को बखूबी ढाला है और बहुत शानदार एक्टिंग की है। देवेन ने भी इस रोल के लिए साथी पूरी तरह न्याय किया है। इनके अलावा शिवा काका के रूप में अमोल पालेकर का काम भी दमदार है। हालांकि, आदिल हुसैन, शेखर सुमन, शाश्वत चटर्जी जैसे गंभीर कलाकारों का और अच्छे से इस्तेमाल किया जा सकता था।
फिल्म का डायरेक्शन कैसा है?
यह ध्रुव त्रिपाठी का डायरेक्टोरियल डेब्यू है। बेशक उनका काम अच्छा है, लेकिन काफी ऐसी चीजें हैं जिन पर और काम किया जा सकता था। फिल्म का टॉपिक काफी अच्छा है, लेकिन स्क्रीनप्ले पर और काम होना चाहिए था।
रिपोर्टिंग लाइव की क्या है खूबी और खामी?
इस फिल्म में एक गंभीर मुद्दे को बेहद संजीदगी और बेबाकी से दिखाया गया है, यह काबिलेतारीफ है। हालांकि, कहानी कई जगह पर आपको प्रिडिक्टेबल लगती है, ऐसे में सस्पेंस वाला हिस्सा जरा कमजोर है। थ्रिलर मूवी में जिस तरह हर अगले सीन केो लेकर बेचैनी और टेंशन रहती है, वो इस फिल्म से गायब है।
अवैध रेत खनन और ऐसे सिंडिकेट की रिपोर्टिंग करते वक्त जर्नलिज्म में आने वाली मुश्किलों को बखूबी दिखाया गया है, लेकिन पॉलिटिकल एंगल गायब है। फिल्म को ज्यादा खींचने की कोशिश नहीं की गई है। यह बात पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरह से ली जा सकती है। अच्छी बात यह है कि बिना ज्यादा खींचे सीधा मुद्दे की बात की गई है, लेकिन इस वजह से कहानी काफी फीकी भी लग रही है।
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देखें या नहीं देखें?
परिणीति चोपड़ा की इस फिल्म में बेशक कुछ खामियां हैं, लेकिन फिल्म में काफी खूबियां भी हैं, ऐसे में इसे एक बार तो देखा जा सकता है।
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Image Credit: Netflix
