शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। मोक्ष की नगरी काशी में स्कंदमाता का यह मंदिर मां बागेश्वरी देवी (स्कंदमाता) मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवरात्र के दौरान यहां देश-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अगर आप इस शुभ मौके पर मां स्कंदमाता के दर्शन करना चाहती हैं, तो आज के इस लेख में हम मंदिर की सही स्थिति, दर्शन का समय, ठहरने और खान-पान से जुड़ी जानकारी के बारे में बताने जा रहे हैं।

वाराणसी में स्कंदमाता का मंदिर कहां है?

वाराणसी में मां स्कंदमाता का मुख्य मंदिर शहर के घने और प्राचीन क्षेत्र जैतपुरा (कच्ची बाग, डिगिया रोड) इलाके में स्थित है, जिसे 'मां बागेश्वरी देवी (स्कंदमाता) मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थान काशी खंड के अंतर्गत आता है और यहां स्थानीय संस्कृति तथा प्राचीन वास्तुकला की एक अलग ही झलक देखने को मिलती है।

वाराणसी के स्कंदमाता मंदिर जाने का सही समय क्या है?

मंदिर में दर्शन के लिए सुबह प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम को 4:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक के द्वार खुले रहते हैं। हालांकि, नवरात्र के पांचवें दिन विशेष पूजन और भीड़ के कारण सुबह जल्दी (सूर्योदय के समय) पहुंचना सबसे उत्तम माना जाता है।

मंदिर के आसपास कहां रुक सकती हैं?

जैतपुरा क्षेत्र के आसपास बजट होटल्स और पारंपरिक धर्मशालाएं आसानी से मिल जाती हैं। यदि आप अधिक आरामदायक और आधुनिक सुविधाओं के साथ रुकना चाहती हैं, तो गोदौलिया, रथयात्रा या कैंट रेलवे स्टेशन के पास ठहरना सबसे बेहतरीन विकल्प रहेगा। वहां से टैक्सी या ऑटो द्वारा आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है।

वाराणसी के स्कंदमाता मंदिर कैसे पहुंचें?

वाराणसी जंक्शन कैंट रेलवे स्टेशन या बनारस रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 5 से 7 किलोमीटर है। स्टेशन के बाहर से आपको आसानी से ऑटो, ई-रिक्शा या कैब मिल जाएगी जो आपको सीधे जैतपुरा पुलिस स्टेशन या मंदिर के पास तक छोड़ देगी। अगर आप दशाश्वमेध घाट या गोदौलिया की तरफ हैं, तो वहां से भी लोकल वाहन सुविधा उपलब्ध है।

वाराणसी में क्‍या खाएं?

बनारस अपने लाजवाब खान-पान के लिए दुनियाभर में मशहूर है। सुबह की शुरुआत यहां की प्रसिद्ध गरमा-गरम कचौड़ी-सब्जी और जलेबी खाकर कर सकती हैं। इसके अलावा दोपहर या शाम के समय यहां की मलइयो, बनारसी पान, विश्व प्रसिद्ध लस्सी और चाट का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें।

स्कंदमाता मंदिर के दर्शन के लिए कितने समय का प्लान बनाएं?

स्कंदमाता मंदिर के दर्शन और पूजा-अर्चना में आमतौर पर 1 से 2 घंटे का समय लगता है। अगर आप दूसरे शहर से वाराणसी दर्शन के लिए जा रही हैं, तो 2 दिन का समय लेकर चलें। इसके अलावा आप यहां मौजूद अन्य जगहें भी घूम सकती हैं।

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  • विश्वनाथ मंदिर (काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग)
  • श्री काल भैरव मंदिर
  • दशाश्वमेध घाट
  • सारनाथ
  • अस्सी घाट 
  • बनारस विश्वविद्यालय

नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता के दर्शन करने का मन है, तो जैतपुरा, वाराणसी जा सकती हैं। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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