इंडियन रेलवे को देश की जीवन रेखा भी कहा जाता है। यह रोजाना लाखों लोगों को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने में मदद करती है। रेलवे स्टेशन पर जब भी हम खड़े होते हैं, तो एक लंबी सी ट्रेन हमारी आंखों के सामने आकर रुकती है। अक्सर लोग ट्रैन के डिब्बे में जाकर बैठ जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कोच के बाहर लिखे इन नंबरों का क्या मतलब होता है?

अगर आपको भी कोच पर लिखे इन खास 5 नंबरों का मतलब नहीं पता है, तो इस लेख को पूरा पढ़ें। आज हम आपको इन 5 अंकों से जुड़ी दिलचस्प और काम की जानकारी बताएंगे। रेलवे के कोच में लिखे इन 5 नंबरों के पीछे एक बड़ा ही दिलचस्प कारण छिपा होता है। दिखने में ये नंबर बहुत साधारण लगते हैं, लेकिन इनके पीछे की वजह आपको हैरान कर देगी। आइए जानते हैं इसका सीक्रेट।  

ट्रेन के कोच पर लिखे 5 अंकों का क्या मतलब होता है?

भारतीय रेलवे ने साल 2003 के बाद से ट्रेनों के कोचों की पहचान के लिए 5-डिजिट नंबर सिस्टम शुरू किया था। इन नंबरों का हर एक अंक ट्रेन के डिब्बे के बारे में पूरी जानकारी देता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कोच का नंबर 12345 है, तो शुरुआती दो अंक डिब्बे के निर्माण का साल बताते हैं। जैसे 12 का मतलब साल 2012 है। वहीं आखिरी के तीन अंक डिब्बे का प्रकार यानी कोच टाइप बताते हैं।

आखिरी के तीन अंकों में छिपा होता है कोच टाइप

कोच के आखिरी तीन नंबरों से यह पता चलता है कि वह किस क्लास का डिब्बा है। 001 से 025 की रेंज में अगर आखिरी तीन नंबर हैं, तो वह फर्स्ट एसी या एग्जीक्यूटिव क्लास का डिब्बा होता है। वहीं 026 से 050 की रेंज एसी-2 टियर यानी 2nd AC का कोच होता है। 051 से 100 तक की रेंज एसी-3 टियर यानी 3rd AC कोच का होता है। अगर 200 से 400 नंबर रेंज हैं, तो यह सामान्य स्लीपर क्लास का पता चलता है।

जनरल डिब्बों, सेकंड सीटिंग, एसी चेयर कार, पार्सल वैन और गार्ड रूम वाले डिब्बों के लिए भी अलग-अलग नंबर कोड तय किए जाते हैं, जिससे रेलवे कर्मचारियों को कोच पहचानने में आसानी हो।

रेलवे के लिए यह नंबरिंग सिस्टम क्यों जरूरी है?

ट्रेन के डिब्बों पर ये नंबर लिखे होने के कई बड़े फायदे हैं। जैसे -

  • ट्रेन के डिब्बों की उम्र और उनकी मेंटेनेंस का रिकॉर्ड रखने के लिए इंडियन रेलवे हर कोच पर यह नंबर लिखता है।
  • पुराने हो चुके डिब्बों को समय पर पहचानने के लिए भी ये नंबर बहुत काम आते हैं।
  • किसी भी इमरजेंसी या दुर्घटना के समय डिब्बे की पहचान तुरंत करने के लिए उनके इन्हीं यूनिक नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है। 

निष्कर्ष: भारतीय रेलवे की व्यवस्था और हर कोच पर लिखे ये 5 अंक सिर्फ एक साधारण नंबर नहीं हैं, बल्कि यह डिब्बों की पूरी पहचान बताने में मदद करते हैं। ऐसे में जब भी आप अगली बार रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े हों, तो एक बार ट्रेन के इन डिब्बों के नंबरों पर नजर जरूर डालें। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

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