आपने देखा होगा कि जब हम ट्रेन के एसी (AC) डिब्बों में सफर करते हैं तो इसके दौरान भारतीय रेलवे की ओर से हर यात्री को एक बेडरोल किट दी जाती है।  इस किट में तकिया, टॉवल, कंबल के साथ दो सफेद चादरें मिलती हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर क्यों दो चादरें मिलती हैं? राज्यसभा में सांसद चंद्रकांत दामोदर हंडोरे द्वारा चादरों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका उत्तर दे दिया है। जानते हैं आगे...

1. ट्रेन में दो चादरें मिलने की असली वजह

रेलवे यात्रियों की सुविधा और सफाई को ध्यान में रखते हुए दो चादरें मुहैया कराता है। ऐसे में इन दोनों के काम और यूज करने के तरीके निम्न प्रकार हैं-

चादर बिछाने का सही तरीका

  • पहली चादर: इसे बर्थ यानी सीट के ऊपर बिछाया जाता है ताकि यात्री का सीधा संपर्क सीट की रेक्सिन या गंदगी से न हो।
  • दूसरी चादर: इसे कंबल के ठीक नीचे लगाया जाता है, जिसे 'सैनिटरी लेयर' कहा जाता है।

हाइजीन और इन्फेक्शन से बचाव

ट्रेन के कंबल हर सफर के बाद नहीं धोए जाते हैं इसलिए रेलवे दूसरी चादर देती है ताकि कंबल आपकी त्वचा या शरीर से सीधे टच न करे और आप पूरी तरह सुरक्षित रहें।

2. रेलवे बेडरोल किट में मिलने वाली चीजें

AC क्लास जब हम टिकट बुक करते हैं तो उसमें ही बेडरोल किट का शुल्क भी पहले से ही शामिल होता है, जिसमें मुख्य रूप से ये चीजें दी जाती हैं:

किट के क्या होता है?

  • दो सफेद चादरें: सफाई और बिछाने/ओढ़ने के लिए।
  • तकिया और पिलो कवर: आरामदायक नींद के लिए।
  • हैंड/फेस टॉवल: यात्रा के दौरान पर्सनल सफाई के लिए।

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3. रेलवे लिनन आइटम्स की तय समय-सीमा क्या है?

रेलवे अपने कपड़ों की क्वालिटी बनाए रखने के लिए हर सामान की एक तय अवधि (Codal Life) तय करता है। ये अवधि निम्न प्रकार हैं-

लिनन आइटम (Linen Item) तय समय-सीमा (Prescribed Life)
पिलो कवर 9 महीने
फेस टॉवल  9 महीने
हैंडलूम बेडशीट 12 महीने (1 साल)
पॉलीवस्त्र बेडशीट 24 महीने
तकिया 24 महीने (2 वर्ष)
ऊनी कंबल 24 महीने (2 वर्ष)

4. सफाई जांचने के लिए AI और स्मार्ट टेक्नोलॉजी

कपड़ों की बेहतर धुलाई और दाग-धब्बों की पहचान के लिए रेलवे अब आधुनिक तकनीकों की मदद भी ले रहा है।

  • AI कैमरा और ऑटोमेटेड सिस्टम: पुणे, जयपुर और जोधपुर डिवीजन की मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में AI कैमरे लगाए गए हैं, जो धुले हुए कपड़ों पर बचे छोटे से छोटे दाग की तुरंत पहचान कर लेते हैं।
  • चमक के लिए 'व्हिटो-मीटर': चादरों की सफेदी और स्वच्छता का स्तर नापने के लिए Whito-Meters और लॉन्ड्री मॉनिटरिंग के लिए CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है।

5. नई प्रीमियम ट्रेनों में 'ब्लैंकेट कवर'

यात्रियों के एक्सपीरियंस को ज्यादा हाइजीनिक बनाने के लिए रेलवे नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। बता दें कि ये प्रोजेक्ट्स निम्न प्रकार हैं-

  • कंबल कवर : उत्तर पश्चिम रेलवे और हावड़ा-कामाख्या वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में अब कंबल कवर देने की शुरुआत की गई है।
  • सुगम और सुरक्षित सफर: इस कवर से यात्रियों को कंबल के सीधे संपर्क में आने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती, जिससे सफर और अधिक स्वच्छ बनता है।
ऐसे में हम कह सकते हैं कि ट्रेन के एसी कोच में मिलने वाली दोनों चादरें केवल ठंड से बचने का साधन नहीं, बल्कि आपकी सेहत की सुरक्षा कवच हैं। अगली बार जब भी आप ट्रेन से यात्रा करें, तो रेलवे के इन साधारण नियमों का पालन करें और अपने सफर को सुरक्षित एवं आरामदायक बनाएं।

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Images: magnific