16 अक्टूबर से दुर्गा पूजा की शुरुआत होने वाली है। दुर्गा पूजा का त्योहार पूरे भारत में बड़ी ही धूमधाम और पवित्रता के साथ मनाया जाता है, जो मां दुर्गा को समर्पित पर्व है। इस उत्सव के दौरान बंगाल समेत पूरे देश में मां दुर्गा के सुंदर पंडाल लगाए जाते हैं, जिसमें शक्ति की देवी दुर्गा की कथाओं का नए तरीकों से प्रदर्शन किया जाता है। इसके अलावा, मां दुर्गा की पूजा का महत्वपूर्ण भाग है शंखनाद। खास बात यह है कि इस पूजा में महिलाओं द्वारा ही शंखनाद किया जाता है, जो इस पर्व की ऊर्जा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। आइए पंडित अरुणेश कुमार शर्मा जी से दुर्गा पूजा में होने वाले शंखनाद का लाभ जानते हैं.
मां दुर्गा की पूजा में क्यों होता है शंखनाद?
पंडित अरुणेश कुमार शर्मा के मुताबिक, दुर्गा पूजा के दिनों में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला शंखनाद बहुत ही विशेष कहलाता है। शंखनाद से उत्पन्न होने वाली विशेष ध्वनि न केवल आसपास के वातावरण को शुद्ध करती हैं, बल्कि मन को शांत भी करती है। ऐसा माना जाता है कि यह खास परंपरा नारी की शक्ति और प्रकृति के बीच के तालमेल को दर्शाती है। खास बात यह है कि ये शंखनाद पूजा की समाप्ति के बाद भी किया जाता है।
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1. नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों का नाश
शंख को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला माना जाता है। माना जाता है कि शंख की ध्वनि से उत्पन्न होने वाला कंपन आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जा, बुरी ऊर्जा और बाधाओं को समाप्त कर देता है। दुर्गा पूजा के दौरान जैसे ही माता का आगमन होता है, हर तरफ का वातावरण शुद्ध और पवित्र हो जाता है।
2. मां दुर्गा का आह्वान और स्वागत
कहते हैं कि शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा पृथ्वी लोक पर पधारती हैं। देवी के इस भव्य स्वागत और उनकी विदाई के समय शंखनाद किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि शंख की यह पावन ध्वनि सीधे देवी तक पहुंचती है, जिससे वह प्रसन्न हो जाती हैं।
3. नारी शक्ति का प्रतीक
दुर्गा पूजा मूल रूप से नारी शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। शंख बजाना केवल एक पूजा नहीं, बल्कि यह महिलाओं की अंदरूनी शक्ति और साहस का प्रदर्शन भी करती है। जब महिलाएं शंखनाद करती हैं, तब यह उस शक्ति को दर्शाती है जो संसार की संहारक है।
4. स्वास्थ्य और वैज्ञानिक लाभ
पंडित जी के अनुसार, दुर्गा पूजा मन की शांति के लिए ही नहीं बल्कि शरीर के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। कहते हैं कि शंख बजाने से फेफड़ों और पेट की मांसपेशियों पर ज्यादा जोर लगता है, जिससे रेस्पिरेटरी सिस्टम मजबूत हो जाता है। इसके अलावा, शंखनाद से निकलने वाली ऊं की ध्वनि दिमाग को शांत करती है।
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शुरुआती लोगों के लिए शंखनाद के जरूरी टिप्स
दुर्गा पूजा में शंखनाद करना हर किसी का सपना होता है। ऐसा जरूरी नहीं, हर कोई शंखनाद कर सके। इसलिए, अगर आप भी दुर्गा पूजा में शंखनाद करना चाहती हैं, तो ये शुरुआती टिप्स जरूर जान लें।
1. अभ्यास के लिए हमेशा छोटे साइज का शंख लें, क्योंकि बड़े शंख को बजाने के लिए ज्यादा लंग कैपेसिटी की जरूरत होती है।
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2. पहली बार में शंख से आवाज निकलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन रोजाना 2 या 3 बार अभ्यास करने से होंठों की मांसपेशियां सेट हो जाती हैं और आवाज साफ निकलने लगती है।
3. शंख का उपयोग करने के बाद इसे अंदर और बाहर से साफ करके रखें, ताकि उसमें गंदगी न जमे।
दुर्गा पूजा में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला शंखनाद केवल एक धार्मिक रस्म या परंपरा नहीं है, बल्कि यह आस्था और संस्कृति का एक सुंदर दृश्य है। यह ध्वनि हमें यह याद दिलाती है कि हमारे अंदर भी ऊर्जा और शक्ति छिपी हुई है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
