हमारे देश में न जाने कितने मंदिर हैं और उनका अलग इतिहास है। यही नहीं कई मंदिर तो विभिन्न रहस्यों से भरे हुए हैं। ऐसा ही एक मंदिर है श्रीनगर का खीर भवानी मंदिर। श्रीनगर में स्थित खीर भवानी मंदिर, जम्मू-कश्मीर के सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय मंदिरों में से एक माना जायता है। यह मंदिर स्थानीय रूप से पूजी जाने वाली देवी खीर भवानी माता को समर्पित है और उसमें माता का पूजन श्रद्धा भाव से किया जाता है। अगर हम इस मंदिर के इतिहास की बात करते हैं तो यह मंदिर एक पवित्र झरने के ऊपर बना है और यह इस मंदिर की मुख्य विशेषता भी है। आमतौर पर कश्मीरी हिंदू देवी खीर भवानी की पूजा करते हैं और वो यहां की सबसे प्रमुख देवी के रूप में मशहूर हैं। इस मंदिर की खसियत है यहां मौजूद कुंड जिसका पानी समय-समय पर रंग बदलता है। यही नहीं मान्यता तह भी है कि इस कुंड का पानी आने वाली किसी बड़ी समस्या का संकेत भी देता है। आइए आपको बताते हैं मंदिर और कुंड से जुड़े रहस्यों के बारे में।

खीर भवानी मंदिर का इतिहास

खीर भवानी मंदिर के इतिहास की बात करें तो ये रामायण काल से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी महारग्या राक्षस रावण की भक्ति से बहुत खुश हुईं और उसके सामने प्रकट हुईं। रावण ने देवी की जो मूर्ति देखी थी, उसे श्रीलंका में स्थापित करवाया, लेकिन रावण के क्रूर और बुरे व्यवहार से देवी नाराज होकर श्रीलंका से बाहर आ गईं। रागनिया देवी दुर्गा के रूपों या अवतारों में से एक हैं और तुल मुल में उनका जो रूप है, वह वैष्णव रूप है।

कश्मीर में, रागनिया को त्रिपुरा के नाम से जाना जाता है। श्रीलंका में, मातृ देवी श्यामा के रूप में लोकप्रिय थीं। ऐसा माना जाता है कि देवी सीता भी देवी रागनिया का ही एक अवतार हैं। रागनिया महात्म्य के अनुसार, जो लोग नवरेह यानी कि कश्मीर के नए साल के दौरान पंचदशी मंत्र का ध्यान करते हैं, मातृ देवी रागनिया उनकी सभी इच्छाएं पूरी करती हैं। इस मंदिर में हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है और यहां दूर-दूर से भक्तों की भीड़ इकठ्ठा होती है।

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खीर भवानी मंदिर के कुंड का रहस्य

मान्यता है कि खीर भवानी मंदिर के कुंड का पानी से इस बात का अंदाजा लगाया जाता है कि आने वाला भविष्य कैसा है? यह पानी अपने आप रंग बदल लेता है और यह मंदिर अपने प्राकृतिक जलस्रोत के लिए पूरे देश में प्रसिद्द है। ऐसे मान्यता है कि इसका पानी चमत्कारिक रूप से अपना रंग बदलता है और जब इसका पानी गहरे रंग का हो जाता है तो कोई बड़ी समस्या आने वाली होती है।

वहीं जब पानी हल्के रंग का होता है तो ये शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पुराने समय की प्रचलित कथाओं को मानें तो खीर भवानी के कुंड के पानी का रंग जब भी बदला है उसके बाद कोई न कोई संकट जरूर आया है। साल 1990 में जब पानी का रंग काला हुआ था तो कश्मीरी पंडितों पर संकट आया और वहीं 1999 में पानी का रंग लाल हुआ जो करगिल युद्ध का संकेत था। ऐसे ही 2019 में कुंड का रंग बदला जो कोरोना महामारी का संकेत था। वहीं साल 2024 और 2025 में पानी का रंग सामान्य था और उस समय पूरा देश किसी बड़े संकट में नहीं पड़ा।

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खीर भवानी मंदिर में कब लगता है मेला

खीर भवानी मंदिर की तरह यहां लगने वाला मेला भी बहुत खास माना जाता है। हर साल ज्येष्ठ अष्टमी के दिन यह मेला मंदिर में लगता है। इस साल यह तिथि 22 जून को पड़ेगी और इस दिन यहां भव्य मेले का आयोजन होगा।

वास्तव में खीर भवानी मंदिर के कुंड का रहस्य अलग है जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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