हममें से ज्यादातर लोग जब भी किसी पवित्र नदी या पुल के ऊपर से गुजरते हैं, तो श्रद्धावश उसमें एक सिक्का जरूर डालते हैं। बड़े-बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं कि ऐसा करने से पुण्य मिलता है, मन्नतें पूरी होती हैं। यह परंपरा आज भी हम बिना सोचे करते चले आ रहे हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप जो काम पुण्य समझकर रही हैं, उससे नुकसान हो रहा है। अगर आप भी सिक्का नदी में फेंकती हैं, तो रुक जाएं। आज के इस लेख में हम इसके पीछे के कारण के बारे में बताने जा रहे हैं?
नदी में सिक्का डालने के पीछे की वजह?
अगर कोई हमें किस काम को करने से मना करता है, तो पहला सवाल आता है कि क्यों नहीं करें? अगर कोई कहे कि नदी में सिक्का नहीं डालना है, तो प्रश्न आता है कि फिर पहले के लोगों ने यह करने के लिए क्यों कहा? पुराने जमाने में सिक्के तांबे के हुआ करते थे। तांबा पानी को साफ करने और उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारने का काम करता है। हमारे पूर्वजों ने नदियों में तांबे के सिक्के डालने की परंपरा इसलिए शुरू की थी, जिससे पानी शुद्ध रहे। ऐसे में जब लोग उस नदी का पानी पिएं, तो उनकी सेहत अच्छी रहे।
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अब नदी में सिक्का क्यों नहीं डालना चाहिए?
आज के समय में सिक्के तांबे के नहीं, बल्कि स्टेनलेस स्टील, एल्युमिनियम और निकल जैसी धातुओं से बनते हैं। ये धातुएं पानी को साफ नहीं करते हैं बल्कि पानी में घुलकर उसे जहरीला बना देती हैं।
जब लाखों लोग रोज नदियों में ये सिक्के फेंकते हैं, तो पानी में केमिकल का स्तर बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ नदी का पानी पीने लायक नहीं रहता, बल्कि पानी में रहने वाले मछलियों और अन्य जीवों के जीवन पर भी संकट आ जाता है।
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आगे से अब जब भी कोई नदी में सिक्का डालें, तो उसे मना करें और इसके पीछे का कारण बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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