ऑफिस में बॉस की कुर्सी पर किसी महिला को देखते ही कुछ पुरुषों की त्योरियां चढ़ जाती हैं, तो कुछ पुरुषों को असहज महसूस होता है। हम यह बिल्कुल नहीं कह रहे हैं कि ऐसा सभी पुरुषों के साथ होता है, पर कुछ पुरुषों को महिला बॉस के नीचे काम करने में परेशानी महसूस होती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में ईगो तो कभी दिमाग में बचपन से बैठी जेंडर स्टीरियोटाइप सोच भी जिम्मेदार हो सकती है। चलिए एक्सपर्ट की मदद से समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्यों कुछ पुरुषों को महिला बॉस के साथ काम करने में परेशानी होती है। इस बारे में हमने Dr Samant Darshi, Consultant- Psychiatrist, Yatharth Hospitals, Noida से बात की।
महिला बॉस के साथ काम करने में क्यों कुछ पुरुषों को होती है परेशानी?
डॉक्टर दर्शी का कहना है कि इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हो सकते हैं। जहां कई पुरुषों के लिए यह नॉर्मल बात है, वहीं कुछ पुरुषों के लिए यह परेशानी का सबब बन सकता है। चलिए इसके पीछे की वजहों को समझते हैं।
1. जेंडर स्टीरियोटाइप सोच है वजह
इसके पीछे जेंडर-रोल कंडीशनिंग एक अहम कारण हो सकता है। आज भी हमारे समाज में कई घरों में बचपन को लड़कों को सिखाया जाता है कि लीडरशिप, अधिकार और फैसले लेना पुरुषों का काम है। ऐसे में जब कोई महिला बॉस बनती है, तो यह इन धारणाओं पर सीधी चोट होती है और कुछ पुरुष इसे पचा नहीं पाते हैं।
2. ईगो को पहुंचती है ठेस
पुरुषों की इस असहजता का एक और कारण उनके सामाजिक दर्जे को खतरा महसूस होना है। कुछ मामलों में, पुरुष किसी महिला के अधिकार को अपने लिए चुनौती मानते हैं। इससे उनकी ईगो को ठेस पहुंचती है और उन्हें महिला बॉस को स्वीकार करने में मुश्किल आती है।
3. प्रतिष्ठा के खिलाफ
कई पुरुषों को यह उनकी प्रतिष्ठा के खिलाफ लगता है कि वे किसी फीमेल बॉस के नीचे काम कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि इससे ऑफिस या समाज में उनकी इमेज धूमिल हो सकती है और लोग उन्हें कम आंक सकते हैं। पर्सनल लेवल पर भी उन्हें किसी महिला के ऑर्डर को मानने में मुश्किल होती है।
महिलाओं को करना पड़ता है मुश्किलों का सामना
जब कोई महिला बॉस बनती है, तो उन्हें डबल बाइंड यानी दोहरी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
- अगर वे सख्ती से पेश आती हैं, तो उन्हें आक्रामक समझा जा सकता है, जबकि बहुत ज्यादा नरमी बरतने पर उन्हें कमजोर माना जा सकता है।
- उनके हर फैसले पर टिप्पणी करने की कोशिश की जाती है। कई मामलों में लोगों के मन में यह धारण होती है कि महिलाएं इमोशनल होती हैं, इसलिए वे सख्त फैसले नहीं ले पाती हैं।
- वहीं जब महिला बॉस पेशेवर और सख्त फैसले लेती है, तो वे उसे गलत या बॉसी कहा जाता है, जबकि पुरुष बॉस के ऐसा करने पर उसे सामान्य समझा जाता है।
जेंडर से नहीं होनी चाहिए एक अच्छे लीडर की पहचान
वक्त बदलने के साथ महिलाओं के लिए काफी कुछ बदला है, फिर चाहे बात घर की हो या वर्कप्लेस की। सच यह भी है कि अभी काफी कुछ बदलना बाकी है। असल में वर्कप्लेस पर एक अच्छे लीडर की पहचान उसके जेंडर से नहीं, बल्कि उसके फैसलों, टैलेंट और टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता से होनी चाहिए।
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