जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई, 2026 से आरंभ चुक है। यह यात्रा कुल 9 दिनों तक चलती है। इसका समापन 24 जुलाई को होगा। जगन्नाथ मंदिर अपनी अनूठी और सदियों पुरानी परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इतना ही नहीं बल्कि जगन्नाथ मंदिर की रसोई का भी खास महत्व है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी दिव्य रसोई माना जाता है, जहां महाप्रसाद तैयार होता है। मगर क्या आपको पता है कि पूरे साल में एक बार ऐसा समय आता है जब यहां के चूल्हे कुल 12 दिनों विश्राम लेते हैं और यहां कोई पकवान या महाप्रसाद नहीं बनता है। नीचे लेख में जानें क्या है यह परंपरा?

जगन्नाथ मंदिर की रसोई बंद रहने के पीछे की वजह

जगन्नाथ मंदिर की रसोई के चूल्हे कुल 12 दिन तक नहीं जलाएं जाते हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि जब भगवान मुख्य मंदिर से निकलकर रथ पर बैठते हैं, तब रसोई बंद कर दी जाती है। इस यात्रा के दौरान प्रभु को केवल शुष्क और शीतल नैवेद्य का अर्पित किया जाता है। इसके बाद जब श्रीविग्रह (भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा) अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा पहुंचते हैं, तो वहां मौजूद अस्थायी रसोई में प्रसाद यानी अभड़ा तैयार किया जाता है।

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अभड़ा महाप्रसाद और इसका मतलब क्या है?

अभड़ा थाली में भगवान जगन्नाथ को 56 भोग लगाए जाते हैं, जिसमें अभड़ा अन्ना (मिट्टी के बर्तनों में उबले हुए चावल), दाल, डालमा, कनिका और अन्य व्यंजन शामिल होते हैं। अब मन में प्रश्न आता है कि इसका मतलब क्या है? बता दें कि ओड़िया भाषा में अभड़ा शब्द का मतलब अगल-बगल या साथ मिलकर खाना भी होता है।

ऐसा माना जाता है कि भगवान को अर्पण करने के बाद जब यह प्रसाद आनंद बाजार में बिकता है, तो सभी भक्त बिना किसी भेद-भाव के एक साथ जमीन पर बैठकर इसे खाते हैं।

रसोई से जुड़ी विशेष मान्यताएं

भगवान जगन्नाथ जी की रसोई में खाना उल्टे क्रम में पकता है। इस बात से हम सभी वाकिफ हैं। मगर क्या आपको पता है कि यहां न केवल इसे पकाने बल्कि सामग्रियों को लेकर भी खास नियम है? रसोई में केवल देसी गाय का घी, कुएं का पवित्र जल और लकड़ी की आग का इस्तेमाल किया जाता है।

इसके अलावा इस मंदिर में तैयार किया प्रसाद कभी भी कम नहीं पड़ता है। फिर चाहे मंदिर में 10,000 हजार लोग हो या फिर 2 लाख। इतना ही नहीं बल्कि प्रसाद कभी बर्बाद भी नहीं होता है। मंदिर के कपाट बंद होने के समय तक सारा प्रसाद समाप्त हो जाता है।

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अब आपको भी पता चल गया होगा कि भगवान जगन्नाथ की रसोई विश्राम अवस्था में कब और क्यों रहती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।

Image Credit- Jagannath Temple Official Website, Pinterest