पिछले कई सालों में कई शहरों के नाम बदले गए हैं, जिसमें प्रयागराज काफी चर्चित नाम रहा। मगर क्या आपने एक बात पर गौर किया है कि शहर का नाम भले ही इलाहाबाद से प्रयागराज हो गया है, लेकिन यहां मौजूद यूनिवर्सिटी (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) और हाईकोर्ट (इलाहाबाद हाइकोर्ट) आज भी अपने पुराने नाम से जाने जाते हैं। ऐसे में क्या आपने कभी सोचा कि आखिर ऐसा क्यों है? अगर नहीं, तो नीचे लेख में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता नीतेश पटेल से जानें इसके पीछे की वजह।

शहर का नाम बदलने के साथ यूनिवर्सिटी और हाईकोर्ट का नाम क्यों नहीं बदलता है?

जब भी किसी शहर का नाम बदलना होता है तो राज्य सरकार गजट नोटिफिकेशन के जरिए यह बदलाव करती है। इससे शहर का प्रशासनिक और भौगोलिक नाम तो बदल जाता है, लेकिन वहां मौजूद संस्थानों जैसे कॉलेज और हाईकोर्ट का नाम नहीं बदलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन जगहों का नाम अलग कानून के तहत स्थापित किए जाते हैं।

हाईकोर्ट और यूनिवर्सिटी के नाम बदलने की प्रक्रिया

भारत में किसी हाईकोर्ट और यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी तरह से अलग और वैधानिक प्रावधानों पर आधारित होती है। किसी शहर का नाम बदलने मात्र से इन संस्थानों के नाम स्वयं नहीं बदलते, इसके लिए एक निश्चित विधायी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

1. हाईकोर्ट का नाम बदलने की प्रक्रिया

भारत में उच्च न्यायालयों की स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत होती है, इसलिए इनके नाम में बदलाव करना लंबी और केंद्रीय स्तर की प्रक्रिया है।

  • सबसे पहले संबंधित राज्य की विधानसभा में हाईकोर्ट का नाम बदलने के लिए एक प्रस्ताव या संकल्प लाया जाता है।
  • राज्य सरकार के प्रस्ताव के बाद संबंधित उच्च न्यायालय के प्रशासन से उसकी सहमति या संस्तुति लेनी अनिवार्य होती है। बिना न्यायपालिका की मंजूरी के नाम नहीं बदला जा सकता।
  • राज्य सरकार और हाईकोर्ट दोनों की सहमति मिलने के बाद इस प्रस्ताव को केंद्रीय कानून मंत्रालय के पास भेजा जाता है।
  • केंद्र सरकार इस पर विचार करने के बाद संसद में एक नया संशोधन विधेयक पेश करती है।
  • जब यह विधेयक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पास हो जाता है और राष्ट्रपति इस पर अपनी मुहर लगा देते हैं, तब आधिकारिक रूप से हाईकोर्ट का नाम बदलता है।

2. यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की प्रक्रिया

विश्वविद्यालयों का नाम बदलना मुख्य रूप से राज्य सरकारों या केंद्र सरकार (संबंधित यूनिवर्सिटी के अधिनियम के आधार पर) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

  • जिस विश्वविद्यालय का नाम बदलना हो, उसकी कार्यकारी परिषद में नाम बदलने का प्रस्ताव लाया और पास किया जाता है।
  • अगर वह राज्य विश्वविद्यालय है, तो प्रस्ताव राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जाता है। यदि वह केंद्रीय विश्वविद्यालय है, तो मामला केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन आता है।
  • राज्य विश्वविद्यालयों के मामले में, राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद राज्य विधानसभा में उस यूनिवर्सिटी के मूल अधिनियम में संशोधन के लिए एक विधेयक लाया जाता है।
  • विधानसभा या संसद से संशोधन विधेयक पास होने और राज्यपाल या राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद, सरकार द्वारा आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाता है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी का नया नाम कानूनी रूप से प्रभावी हो जाता है।

इन शहरों के कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम में नहीं बदलाव

नीचे दी गई सारणी में उन हाईकोर्ट और यूनिवर्सिटी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके शहर का नाम बदला लेकिन विश्वविद्यालय और कोर्ट का नाम पुराना ही है।

शहर का पुराना नाम शहर का नया नाम यूनिवर्सिटी का वर्तमान नाम और स्थिति हाईकोर्ट का वर्तमान नाम और स्थिति
बॉम्बे (Bombay) मुंबई (Mumbai) यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई (बदला हुआ) बॉम्बे हाईकोर्ट (पुराना नाम)
मद्रास (Madras) चेन्नई (Chennai) यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास (बदला हुआ) मद्रास हाईकोर्ट (पुराना नाम)
इलाहाबाद (Allahabad) प्रयागराज (Prayagraj) इलाहाबाद यूनिवर्सिटी (केंद्रीय विश्वविद्यालय)- पुराना नाम  इलाहाबाद हाईकोर्ट (पुराना नाम)
 कलकत्ता (Calcutta)  कोलकाता (Kolkata)  कलकत्ता यूनिवर्सिटी (पुराना नाम)  कलकत्ता हाईकोर्ट (पुराना नाम)

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