महाराष्ट्र का प्रसिद्ध शहर पुणे अपने ऐतिहासिक महलों, किलों और मराठा साम्राज्य के शौर्य के लिए जाना जाता है। यहां एक ऐसा खास मंदिर है, जो पुणे के 5 सबसे प्रमुख 'मानाचा गणपति' में से पहला माना जाता है। इस मंदिर के गणपति जी को पुणे के ग्राम देवता के रूप में भी जाना जाता है। इसकी स्थापना का इतिहास आज से नहीं, बल्कि सैकड़ों साल पहले मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज और उनकी माता राजमाता जीजाबाई से जुड़ा हुआ है।
जब पुणे शहर पूरी तरह उजड़ गया था
यह उस समय की बात है जब बीजापुर के आदिलशाही सेनापति मुराद खान और शाहजी भोंसले के विरोधियों ने पुणे पर हमला करके उसे पूरी तरह तबाह कर दिया था। तब राजमाता जीजाबाई ने अपने पुत्र शिवाजी महाराज के साथ मिलकर इस उजड़े हुए नगर को फिर से बसाने का संकल्प लिया।\
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स्वयंभू प्रतिमा और कसबा गणपति की स्थापना
जब जीजाबाई ने उजड़े हुए शहर पुणे को फिर से बसाने का काम शुरू किया, तब विनायक भट्ट ठाकुर नामक एक स्थानीय निवासी के घर के पास गणेश जी की स्वयंभू मूर्ति मिली। इस पवित्र स्थान पर राजमाता जीजाबाई ने एक छोटे से मिट्टी के गर्भगृह और मंदिर का निर्माण कराने का आदेश दिया। तभी से इस मंदिर को कसबा गणपति के नाम से जाना जाने लगा।
पुणे की भूमि पर सोने का हल और समृद्धि
जीजाबाई के कहने पर बालक शिवाजी महाराज ने कसबा गणपति को साक्षी मानकर पुणे की भूमि पर सोने का हल चलाया था। इससे स्थानीय लोगों के मन में विश्वास जागा कि अब विघ्नहर्ता गणेश जी स्वयं उनके शहर की रक्षा करेंगे। इसके बाद से ही पुणे धीरे-धीरे एक शक्तिशाली और समृद्ध शहर बनता चला गया।
लाल महल और पेशवा काल में मंदिर का विस्तार
जीजाबाई ने कसबा गणपति मंदिर के बिल्कुल पास ही लाल महल का निर्माण कराया था, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का बचपन बीता था। कहा जाता है कि शिवाजी महाराज जब भी किसी युद्ध अभियान पर जाते थे, तो सबसे पहले कसबा बाप्पा का आशीर्वाद जरूर लेते थे। शिवाजी महाराज के बाद पेशवा काल में श्रीमंत पेशवाओं ने भी इस ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार और विस्तार कराया।
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कसबा गणपति मंदिर कैसे पहुंचे?
अगर आप भी कसबा गणपति मंदिर के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं, तो पुणे पहुंचना बेहद आसान है -
यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुणे जंक्शन है, जो मंदिर से मात्र 3 से 4 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन से आप आसानी से टैक्सी, कैब, ऑटो या लोकल सिटी बस (PMPML) लेकर मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
निष्कर्ष: पुणे का कसबा गणेश मंदिर केवल एक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि यह मराठा साम्राज्य के स्वाभिमान और पुनरुत्थान का अमर प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर इस बात का गवाह है कि जब पुणे शहर पूरी तरह तबाह हो गया था, तब राजमाता जीजाबाई और छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे फिर से खड़ा किया था। अगर आप भी पुणे जाने का प्लान बना रहे हैं, तो बाप्पा के दर्शन करने कसबा गणपति मंदिर जरूर जाएं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
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