भारत के इतिहास में कई ऐसे गुप्त और साहसिक सैन्य ऑपरेशन्स हुए हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इन खुफिया अभियानों की सफलता के पीछे हमारे वीर सैनिकों के साथ-साथ देश की उन जांबाज महिला जासूसों और अधिकारियों का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है। इनके अदम्य साहस ने दुश्मन देशों की नींव हिला दी थी। देश पर जब भी कोई संकट आया या खुफिया जानकारी जुटाने की चुनौती मिली, तो हमारी महिला गुप्तचरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी चतुराई और देशप्रेम का परिचय दिया। आज के इस लेख में हम आपको 5 ऐसी महिलाओं के बारे में बताने जा रहे हैं।
भारत की 5 महिला गुप्तचर
भारत में कई ऐसे गुप्त ऑपरेशन्स हुए हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा और अखंडता को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है। इन साहसिक अभियानों की सफलता के पीछे देश की उन जांबाज महिलाओं का भी बड़ा हाथ रहा है, जिन्होंने अपने साहस से दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे।
उषा मेहता
मिशन का नाम- सीक्रेट कांग्रेस रेडियो
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उषा मेहता ने मुंबई में भूमिगत रहकर कांग्रेस रेडियो का संचालन किया। अंग्रेजों की कड़ी नजर से बचते हुए उन्होंने इस रेडियो स्टेशन के जरिए देशवासियों तक स्वतंत्रता संग्राम की सटीक खबरें, क्रांतिकारियों के संदेश और महात्मा गांधी के विचार पहुंचाए। उनकी इस साहसिक तकनीक और बहादुरी ने ब्रिटिश प्रशासन की चूलें हिला दी थीं।
इसे भी पढ़ें- Independence Day 2026: भारतीय महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनीं डॉ. गगनदीप कंग, जानें
दुर्गावती देवी
मिशन का नाम- सांडर्स वध और भगत सिंह का एस्केप मिशन
दुर्गा भाभी के नाम से प्रसिद्ध दुर्गावती देवी ने क्रांतिकारी आंदोलन में गुप्त रूप से अहम भूमिका निभाई। सांडर्स वध के बाद जब भगत सिंह और सुखदेव को लाहौर से सुरक्षित बाहर निकालना था, तब दुर्गा भाभी ने अपनी जान जोखिम में डालकर भगत सिंह की पत्नी का रूप धरकर अंग्रेजों को चकमा दिया था। इसके अलावा, उन्होंने क्रांतिकारियों के लिए हथियारों की तस्करी और छिपने के गुप्त ठिकानों की व्यवस्था की थी।
सुहासिनी गांगुली
मिशन का नाम- भूमिगत क्रांतिकारी सहायता एवं गुप्त ठिकाना मिशन
सुहासिनी गांगुली एक महान स्वतंत्रता सेनानी थीं, जो प्रसिद्ध क्रांतिकारी अरविंद घोष और अन्य क्रांतिकारियों के संपर्क में रहीं। उन्होंने बंगाल में गुप्त रूप से हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और भूमिगत क्रांतिकारियों के लिए सुरक्षित छिपने के ठिकाने तैयार करने में बहुत बड़ा जोखिम उठाया। पुलिस की आंखों में धूल झोंककर उन्होंने कई गुप्त अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
प्रीतिलता वाद्देदार
मिशन का नाम-पहरथाली यूरोपियन क्लब अटैक
सूर्य सेन के नेतृत्व में प्रीतिलता वाद्देदा ने चटगांव के उस यूरोपियन क्लब पर सशस्त्र हमला करने के मिशन का नेतृत्व किया, जिसके बाहर बोर्ड लगा था "कुत्तों और भारतीयों का प्रवेश वर्जित है।" प्रीतिलता ने एक पुरुष क्रांतिकारी के वेश में इस खतरनाक और गुप्त ऑपरेशन को सफलतापूर्वक लीड किया। अंग्रेजों के हाथ आने से बचने के लिए उन्होंने मौके पर ही पोटेशियम साइनाइड खाकर अपने प्राण देश के लिए न्यौछावर कर दिए।
कल्पना दत्त
मिशन का नाम-चटगांव शस्त्रागार रेड और आर्मरी मास्टरमाइंड सपोर्ट
कल्पना दत्त ने 1930 के ऐतिहासिक चटगांव शस्त्रागार पर हमले में अहम भूमिका निभाई थी। मास्टर दा सूर्य सेन के साथ मिलकर उन्होंने ब्रिटिश शस्त्रागारों को लूटने और टेलीफोन-टेलीग्राफ लाइनों को काटने की गुप्त योजना तैयार की थी। इस घटना के बाद वे भूमिगत हो गईं और अंग्रेजों के खिलाफ हथियारबंद संघर्ष जारी रखा। बाद में वे पकड़ी गईं और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
इसे भी पढ़ें- 500 साल पहले जब एक रानी से थर-थर कांपे थे पुर्तगाली, पढ़ें अब्बक्का की कहानी
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
