Sat Sep 12, 2026 | Updated 02:38 AM IST

Independence Day 2026: भारतीय महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनीं डॉ. गगनदीप कंग, जानें

डॉ. गगनदीप कंग ने बच्चों के संक्रमणों से बचाव के लिए टीके विकसित कर भारत का मान बढ़ाया है। वे'वैक्सीन गॉडमदर' के रूप में जानी जाती हैं।
Updated:- 2026-08-07, 22:11 IST
gagandeep kang

स्वतंत्रता दिवस केवल आजादी का उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह देश की उन असाधारण कामों को सम्मानित करने का भी दिन है, जिन्होंने भारत का मान बढ़ाया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में डॉ. गगनदीप कंग एक ऐसा ही जगमगाता नाम हैं। भारत में बच्चों में होने वाले संक्रमणों से बचाव के लिए टीकों के विकास में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। अपनी लगन, नजरिया और अटूट मेहनत के बल पर उन्होंने न केवल करोड़ों मासूमों की जान बचाई, बल्कि दुनियाभर की महिलाओं और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय भी लिखा। ऐसे में इनके जर्नी के बारे में जानना तो बनता है। जानते हैं आगे...

रॉयल सोसाइटी में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक

लंदन की प्रतिष्ठित संस्था 'रॉयल सोसाइटी' के करीब चार सौ से अधिक वर्षों के लंबे इतिहास में डॉ. गगनदीप कंग पहली ऐसी भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं जिन्हें फेलो (FRS) चुना गया।

 

2 - 2026-08-07T214850.368

  • मेडिकल शिक्षा और शोध: वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) से एमबीबीएस, एमडी और पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन से पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च किया।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान: वे सीएमसी वेल्लोर के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंसेज विभाग में माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रही हैं। साथ ही जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी और टफ्ट्स यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों से भी जुड़ी रही हैं।

यह भी पढ़ें- कौन थीं कश्मीर की जांबाज रानी दिद्दा? महमूद गजनवी की बादशाहत का किया अंत

भारत की 'वैक्सीन गॉडमदर' और रोबोवैक का निर्माण

पब्लिक हेल्थ सेंटर में अभूतपूर्व योगदान देने के कारण डॉ. गगनदीप कंग को सम्मान से भारत की 'वैक्सीन गॉडमदर' भी कहा जाता है।

  • रोटावायरस टीकों का विकास: बच्चों में डायरिया और आंतों से जुड़े गंभीर संक्रमण से निपटने के लिए उन्होंने भारत बायोटेक के साथ मिलकर 'रोटावैक'स्वदेशी वैक्सीन तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
  • टाइफाइड और पोलिया पर शोध: उन्होंने देश स्तर पर रोटावायरस और टाइफाइड की निगरानी के लिए नेशनल नेटवर्क तैयार किए और पोलिओ वैक्सीन के ट्रायल में अहम भूमिका निभाई।
  • कोविड-19 से लड़ाई में योगदान: वे भारत सरकार के ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI) की कार्यकारी निदेशक रहीं, जहां महामारी के दौर में उनकी रिसर्च बेहद उपयोगी साबित हुई।

1 - 2026-08-07T214853.911

राष्ट्रीय पुरस्कार

डॉ. कंग की उपलब्धियां और उनका वैज्ञानिक स्किल्स पूरी दुनिया में सराहा गया है।

  • इन्फोसिस प्राइज से सम्मानित: लाइफ साइंसेज के क्षेत्र में साल 2016 में उन्हें प्रतिष्ठित इन्फोसिस पुरस्कार से नवाजा गया।
  • युवा महिला जैव-वैज्ञानिक पुरस्कार: साल 2006 में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर यंग वीमेन बायोसाइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन में भूमिका: वे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), वेलकम ट्रस्ट और CEPI बोर्ड जैसी वैश्विक संस्थाओं की सलाहकार समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

डॉ. गगनदीप कंग की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो किसी भी क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें- निडर शिक्षिका थीं फातिमा शेख, जिन्होंने सावित्रीबाई फुले का साथ देकर बदल दी श‍िक्षा की तस्वीर

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Images: social media

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।