सोलो ट्रिप अब महिलाओं के बीच काफी पॉपुलर हो गया है। आजकल की महिलाएं बैग उठाती है और कहीं भी सोलो ट्रिप पर निकल जाती है, लेकिन क्या आप जानती हैं, सोलो ट्रिप करने वाली सबसे पहली औरत कौन थी? अगर नहीं, तो आज हम आपको इस खबर में उनके बारे में बताएंगे और कैसे उनके इस एक फैसले ने ट्रैवल कि सोच को बदला इसके बारे में भी जानेंगे।
कौन थी दुनिया की पहली महिला सोलो ट्रैवलर?
आज के समय में महिलाओं को पूरी आजादी दी गई है। महिलाएं इंडिपेंडेंट हैं। वीकेंड पर मन करता है, तो बैग उठाती हैं और अकेले ही ट्रिप पर निकल जाती हैं। लेकिन 250 साल पहले एक महिला ने बिना गूगल मैप, फोन ओर पासपोर्ट के अकेले सोलो ट्रिप कर इतिहास रच दिया। हम जिसकी बात कर रहे हैं उनका नाम जीन बैरेट है। वह फ्रांस के छोटे से गांव की रहने वाली थी। वे हर्बलिस्ट और नर्स थी।
हर्ब वुमन के नाम से बुलाते थे लोग
उस दौर में जब महिलाओं को घर से बाहर निकलने की भी आजादी नहीं थी, तब जीन ने एक पुरुष का भेष बनाया और समंदर के रास्ते पूरी दुनिया नाप डाली। आपको बता दें कि जीन बैरेट का जन्म 1740 में फ्रांस के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनका परिवार बहुत गरीब था और उनके पिता एक मजदूर थे। जीन ने कोई पढ़ाई नहीं की थी, लेकिन नेचर के बीच रहने के कारण उन्हें पेड़-पौधों और जड़ी-बूटियों से काफी लगाव भी था। गांव के लोग उन्हें हर्ब वुमन कहा करते थे।
जीन बैरेट की हुई फिलीबर्ट कॉमर्सन से दोस्ती
धीरे-धीरे समय बीतता गया और उनकी मुलाकात फ्रांस के फेमस साइंटिस्ट और बोटैनिस्ट फिलीबर्ट कॉमर्सन से हुई। दोनों अच्छे दोस्त बन गए। जीन कॉमर्सन की दोस्त होने के साथ-साथ उनके बाकी कामों में भी मदद करने लगीं। साल 1765 में फ्रांस की सरकार ने दुनिया की नई जगहों को खोजने के लिए एक बड़ा समुद्री अभियान शुरू किया था। इस मिशन के लीडर एडमिरल बोगनविले ने वैज्ञानिक कॉमर्सन को भी साथ चलने का न्योता दिया।
जीन बैरेट ने लिया लड़के की तरह दिखने का फैसला
कॉमर्सन चाहते थे कि उनकी असिस्टेंट जीन बैरेट भी इस सफर पर उनके साथ चलें, लेकिन उस समय फ्रांसीसी नौसेना का एक कड़ा नियम था, कि जहाज पर महिलाओं का आना सख्त मना था। इस नियम को तोड़ने और कॉमर्सन की मदद करने के लिए जीन ने एक बहादुरी वाला फैसला लिया। उन्होंने अपने बाल छोटे कटवाए, लड़कों जैसे कपड़े पहने और अपना नाम बदलकर जीन बैरेट रख लिया। इस तरह वो एक नौकर और असिस्टेंट के नाम से चुपके से एतवाल नाम के जहाज पर चढ़ गईं।
जब पार्टनर बीमार हुआ, तो जीन ने संभाली कमान
उनका ये सफर बहुत ही मुश्किलों वाला था। रास्ते में जब जहाज उरुग्वे रुका, तो साइंटिस्ट कॉमर्सन बहुत बीमार हो गए। ऐसे में हार मानने के बजाय जीन ने मोर्चा संभाला और अकेले ही जंगलों में जाकर पौधों के सैंपल इकट्ठे किए। इसके बाद जब जहाज ब्राजील के रियो डी जनेरियो पहुंचा, तो वहां जीन ने एक बेल खोजी, जिसमें बहुत ही खूबसूरत गुलाबी और बैंगनी रंग के फूल थे।
जीन की सच्चाई आई सामने
जीन ने इस नए पौधे का नाम अपने मिशन के लीडर के सम्मान में बोगनविलिया रखा। वही बोगनविलिया का फूल जो आज हमारे घरों और रास्तों पर आम दिखाई देता है। जीन ने काफी समय तक जहाज के क्रू से अपनी पहचान छुपाकर रखी, लेकिन साल 1767 में जब उनका जहाज ताहिती आइलैंड पर पहुंचा, तो वहां के लोगों ने उन्हें तुरंत पहचान लिया कि जीन एक महिला हैं। सच्चाई सामने आने के बाद जहाज पर उनके लिए दिन बहुत ही खतरनाक हो गए। एक बार तो कुछ क्रू मेंबर्स ने सच जानने के लिए उन पर हमला तक कर दिया था। इसके बाद जीन ने सुरक्षा के लिहाज से किनारे पर जाना कम कर दिया।
ऐसे पूरा हुआ दुनिया का चक्कर
साल 1768 में सुरक्षा कारणों और सप्लाई के लिए उनका जहाज मॉरीशस आइलैंड पर रुका। जीन और कॉमर्सन वहीं रुक गए और वापस फ्रांस नहीं गए। साल 1773 में कॉमर्सन की मौत हो गई। इसके बाद जीन ने एक फ्रांसीसी सैनिक से शादी की और करीब 1774-1775 के आसपास वो वापस फ्रांस लौट आईं। फ्रांस लौटते ही उनका पूरी दुनिया का चक्कर पूरा हो गया।
SOURCE: https://exploration.marinersmuseum.org/subject/jeanne-baret/
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Image Credit : pinterest/magnific
