जब भी बात मुगल साम्राज्य की होती है, तो अक्सर मुगल बादशाहों का ही जिक्र होता है, लेकिन मुगल इतिहास में कई ऐसी महिलाएं भी थीं, जिनकी शान और ताकत की कहानियां आज भी सुनाई जाती हैं। मुगल सल्तनत में नूरजहां और मुमताज समेत कई महिलाओं का जिक्र होता है, लेकिन क्या आपको पता है कि मुगलों की सबसे अमीर और ताकतवर शहजादी जहांनारा बेगम को माना जाता है। मुगल बादशाह शाहजहां और मुमताज महल की सबसे बड़ी बेटी शहजादी जहांनारा बेगम को मुगलों की 'फर्स्ट लेडी' कहा जाता था। इतिहासकार ऐसा बताते हैं कि शाही दरबार में उनके रुतबे, ज्ञान, ताकत और सियासी समझ के आगे सभी घुटने टेक देते थे। हमारी खास सीरीज 'महिलाएं जिनके हौसले ने बदल दिया इतिहास' में चलिए आज उनकी अनसुनी कहानी जानते हैं।

मुगल साम्राज्य की सबसे अमीर शहजादी थीं जहांनारा

जहांआरा बेगम का जन्म 4 अप्रैल 1614 को हुआ था। हालांकि, कई जगहों पर उनकी जन्म तारीख 23 मार्च भी बताई जाती है। जहांनारा मुगल बादशाह शाहजहां और मुमताज महल की बेटी थीं। कहा जाता है कि जब मुमताज की मौत हुई, उस वक्त वह 17 साल की थीं। मुमताज की मौत के बाद शाहजहां का ध्यान राजसी कामों से हटने लगा और उस वक्त शाही हरम और मुगल साम्राज्य से जुड़ी सारी जिम्मेदारी जहांनारा के हाथों में आ गई और आगे चलकर उनकी गिनती मुगल दरबार की सबसे ताकतवर महिलाओं में होने लगी।

विदुषी महिला थीं जहांनारा

जहांनारा की पहचान सिर्फ ताकत और रुतबे से नहीं, बल्कि उनके ज्ञान से भी होती थी। बताया जाता है कि वह सिर्फ शहजादी नहीं, बल्कि विदुषी महिला थीं और सूफी विचारों का उन पर गहरा प्रभाव था। उन्हें साहित्य और सूफी विचारों में काफी दिलचस्पी थी। उन्होंने फारसी में लेखन किया और कई साहित्यिक रचनाएं भी कीं। लेखिका और मशहूर इतिहासकार एरा मखोती का कहना है कि उनकी अमीरी और बुद्धिमत्ता का जिक्र इतिहास के अलग-अलग पन्नों में अलग-अलग तरीके से किया गया है।

आजीवन कुंवारी रही थीं जहांनारा

आपको जानकर हैरानी होगी कि इतनी ताकत और पैसे के बाद भी जहांनारा जिंदगी भर कुंवारी रही थीं। उन्होंने उस वक्त अपने भाई दारा शिकोह और नादिरा बेगम की शादी में लाखों रुपये खर्च किए थे और इसे मुगलों की सबसे अमीर शादी कहा गया था, लेकिन जहांनारा की शादी नहीं हो पाई। इतिहासकार निकोलाओ मनूची के कई किताबों में जिक्र किया है कि जहांनारा को इश्क हुआ ता, लेकिन शादी नहीं हो पाई थी। कई जगह ऐसा भी कहा गया है कि शाहजहां नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी की शादी हो। इसके पीछे यह कारण भी बताया जाता है कि शाहजहां का मानना था कि जहांनारा की शादी के बाद मुगल सल्तनत में उनके पति की भी हिस्सेदारी हो जाएगी और वो ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते थे। कई जगह शाहजहां और जहांनारा के रिश्ते पर भी सवाल उठे। हालांकि, इसे लेकर कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं।

कई रियासतों की थीं मालकिन

जहांनारा को मुगल साम्राज्य में पादशाह बेगम का दर्जा दिया था और इसके बाद उनकी संपत्ति और रियासतों में काफी इजाफा हुआ था। बाछोल, सफापुर, अछल, फरजहरा, दोहारा और पानीपत का परगना समेत कई जगहों को उनकी रियासत में जोड़ दिया गया।

शाहजहानाबाद और चांदनी चौक से भी जुड़ा नाम

जहांनारा का नाम शाहजहानाबाद और चांदनी चौक से भी जुड़ा। उनका मुगल साम्राज्य की वास्तुकला और शहर के विकास में भी काफी योगदान दिया। शाहजहां ने जब अपनी नई राजधानी शाहजहानाबाद बसाई, तब दिल्ली के चांदनी चौक के निर्माण में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। 16 सितंबर 1681 को दिल्ली में उनकी मौत हुई।

 

'महिलाएं जिनके हौसले ने बदल दिया इतिहास' सीरीज में हम रोजाना ऐसी ही साहसी और दुनिया को बदलने का हौसला रखने वाली महिलाओं की कहानी आप तक पहुंचाते रहेंगे। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। साथ ही ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।