भारत के इतिहास और पत्रकारिता के पन्नों में जब भी शुरुआती दौर की फोटोग्राफी का जिक्र होता है, तो होमाई व्यारावाला का नाम सबसे ऊपर आता है। वह देश की पहली महिला फोटोपत्रकार थीं, जिन्होंने अपने कैमरे के लेंस से स्वतंत्र भारत के बनते-बिगड़ते इतिहास और सबसे महत्वपूर्ण पलों को दुनिया के सामने रखा। एक ऐसे दौर में जब पत्रकारिता और फोटोग्राफी पूरी तरह पुरुषों के वर्चस्व वाला क्षेत्र माना जाता था, तब उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल कायम की। हमने 'Her Story: महिलाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया' नाम की एक सीरीज शुरू की है। इसी कड़ी में हम रोजाना ऐसी महिलाओं के बारे में बताएंगे। ऐसे में इस प्रसिद्ध पत्रकार के बारे में बताने जा रहे।  जानते हैं आगे...

शुरुआती जीवन और फोटोग्राफी से जुड़ाव

होमाई व्यारावाला का जन्म 9 दिसंबर 1913 को गुजरात के एक पारंपरिक परिवार में हुआ था। उनके पिता एक घुमंतू नाटक मंडली में कलाकार थे, जिसकी वजह से उनका बचपन अलग-अलग शहरों में बीता। बाद में उनका परिवार मुंबई (तब बॉम्बे) जाकर बस गया, जहां होमाई ने प्रसिद्ध जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से अपनी पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में ही उनकी मुलाकात फ्रीलांस फोटोग्राफर मानेकशा व्यारावाला से हुई, जो आगे चलकर उनके जीवनसाथी बने। मानेकशा के संपर्क में आने के बाद ही होमाई के मन में फोटोग्राफी को लेकर दिलचस्पी जगी, जो आगे चलकर उनका करियर बन गई।

लेंस के जरिए एक अनोखा सफर

मुंबई के आम जीवन, वहां की हलचल को अपने कैमरे में कैद करने के साथ ही होमाई के काम को पहचान मिलने लगी। जब उनकी खींची गई तस्वीरें प्रसिद्ध पत्रिका 'द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया' में छपीं, तो पाठकों ने उनके काम को काफी सराहा। उस जमाने में मुख्यधारा की मीडिया में किसी महिला का इस तरह योगदान देना अपने आप में एक बड़ी क्रांति थी।

(photo credit: daily art magzine)

'डाल्डा 13' नाम से बनाई पहचान

शुरुआती दिनों में होमाई की फोटोग्राफी उनके पति के नाम से प्रकाशित होती थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना उपनाम 'डाल्डा 13' रख लिया। उस समय महिलाओं को पत्रकारिता के क्षेत्र में गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन होमाई ने इस चुनौती को अपने हक में इस्तेमाल किया। उनका मानना था कि लोग अक्सर महिला पत्रकारों को नजरअंदाज कर देते थे, जिससे उन्हें अपनी लोकेशन पर बिना किसी दखल के कैंडिड तस्वीरें खींचने की पूरी आजादी मिल जाती थी।

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साइकिल पर सवार एक निडर महिला

साल 1942 में होमाई अपने पति के साथ दिल्ली आ गईं, जहां दोनों ने ब्रिटिश इंफॉर्मेशन्स सर्विस के लिए काम करना शुरू किया। उस समय दिल्ली में महिला फोटोपत्रकारों की संख्या न के बराबर थी। पीठ पर भारी-भरकम कैमरा बांधकर पूरी राजधानी में साइकिल से घूमती होमाई जल्द ही शहर की एक जानी-मानी शख्सियत बन गईं।

ऐतिहासिक पलों और दिग्गजों को कैमरे में किया कैद

भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम को दर्ज करने में होमाई की भूमिका ऐतिहासिक रही। उन्होंने देश के इतिहास को दिशा देने वाले कई बड़े राजनेताओं को अपने कैमरे में कैद किया।

  • पंडित जवाहरलाल नेहरू: होमाई के सबसे पसंदीदा सब्जेक्ट देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। उन्होंने नेहरू के कई अनछुए और सहज पलों की तस्वीरें लीं।
  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी: आजादी के आंदोलन के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के कई भावुक और महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में उतारा।
  • इंदिरा गांधी: देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शुरुआती राजनीतिक जीवन की झलकियां भी उनके काम में देखने को मिलती हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय हस्तियां: आजादी के बाद भारत के दौरे पर आए विदेशी नेताओं की तस्वीरें भी उन्होंने खींचीं, जिनमें ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी, चीन के प्रधानमंत्री चाउ एन-लाइ और वियतनाम के नेता हो ची मिन्ह शामिल थे।

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सम्मान और ऐतिहासिक विरासत

होमाई व्यारावाला के काम और उनकी तस्वीरों का संग्रह आज दिल्ली स्थित 'द अल्काजी फाउंडेशन फॉर द आर्ट्स' में सुरक्षित रखा गया है। साल 2010 में नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA), मुंबई और अल्काजी फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से उनके जीवन और काम पर प्रदर्शनी का आयोजन किया था। देश के प्रति उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2011 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया।

निष्कर्ष

होमाई व्यारावाला केवल एक फोटोपत्रकार नहीं थीं, बल्कि वे आजादी के दौर की उस सामाजिक और राजनीतिक क्रांति की गवाह थीं, जिसने आधुनिक भारत की नींव रखी।

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