भारत की स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में 75 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर लौटने पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें 50 लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित किया। लोक सेवा भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि लवलीना की यह सफलता पूरे देश के लिए गर्व की बात है और इससे आने वाले नए खिलाड़ियों को बड़ी प्रेरणा मिलेगी।
इससे पहले एयरपोर्ट पर खेल मंत्री बिस्वजीत दैमारी और समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। मैरी कॉम के बाद लवलीना भारत की ऐसी दूसरी महिला मुक्केबाज बन चुकी हैं, जिन्होंने ओलंपिक मेडल के साथ-साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है।
असम के छोटे से गांव से लवलीना की शुरुआत
लवलीना का जन्म 2 अक्टूबर 1997 को असम के गोलाघाट जिले के एक छोटे से गांव बारोमुखिया में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन काफी कठिनाइयों और गरीबी से भरा रहा। अपनी बड़ी बहनों लीचा और लीमा को देखकर उन्होंने शुरुआत में किकबॉक्सिंग सीखनी शुरू की थी।
सफर में आया बड़ा मोड़
साल 2012 में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ट्रायल्स के दौरान भारतीय बॉक्सिंग कोच पदुम बोरो की नजर उन पर पड़ी। कोच ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बॉक्सिंग से जोड़ा। 14 साल की उम्र में गुवाहाटी से उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई और उसी साल उन्होंने जूनियर नेशनल चैंपियनशिप जीतकर अपनी काबिलियत साबित की।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता
लवलीना ने साल 2017 में एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा-
- 2018 और 2019 में लगातार दो बार वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
- 2020 में एशियन ओलंपिक क्वालिफायर के सेमीफाइनल में पहुंचकर टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल किया।
- कठिन मेहनत के दम पर उन्होंने खुद को सबसे बड़े मंच के लिए तैयार किया।
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टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल
टोक्यो ओलंपिक में भारत की तरफ से 9 मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया था, लेकिन केवल लवलीना ही मेडल जीतने में सफल रहीं। 69 किलोग्राम वर्ग के क्वार्टर फाइनल में उन्होंने चीनी ताइपे की फेवरिट बॉक्सर चेन निएन-चिन को हराकर इतिहास रचा और भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल पक्का किया। विजेंदर सिंह और मैरी कॉम के बाद वे ओलंपिक मेडल जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज बनीं।
वेट कैटेगरी और वर्ल्ड चैंपियन का खिताब
टोक्यो ओलंपिक के बाद 69 किलोग्राम वर्ग को ओलंपिक से हटा दिया गया। इस वजह से लवलीना को 75 किलोग्राम वर्ग (मिडिलवेट) में शिफ्ट होना पड़ा। वजन बढ़ाना आसान नहीं था, लेकिन यह बदलाव उनके करियर के लिए वरदान साबित हुआ।
- एशियन चैंपियनशिप 2022: 75 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता।
- वर्ल्ड चैंपियनशिप 2023: नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की केटलिन पार्कर को हराकर वे पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनीं।
- एशियन गेम्स 2023: हांगझाऊ में हुए एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
लवलीना बोरगोहेन की उपलब्धियां
| प्रतियोगिता | मेडल | वर्ष |
| टोक्यो ओलंपिक | ब्रॉन्ज | 2021 |
| वर्ल्ड चैंपियनशिप | गोल्ड | 2023 |
| वर्ल्ड चैंपियनशिप | ब्रॉन्ज | 2018, 2019 |
| एशियन गेम्स | गोल्ड | 2026 |
| एशियन गेम्स | सिल्वर | 2023 |
| एशियन चैंपियनशिप | गोल्ड | 2022 |
| राष्ट्रमंडल खेल | सिल्वर | 2026 |
निष्कर्ष
गरीबी और अभावों से लड़कर असम के एक छोटे से गांव से निकली लवलीना बोरगोहेन आज भारतीय खेल जगत की सबसे सफल एथलीट्स में से एक हैं। अपनी मेहनत, लगन और कभी न हार मानने वाले जज्बे से उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।
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