दोस्त के बिना एक दिन भी रह पाना मुश्किल है। खुलकर हंसना हो या फिर रोना हो, तो हम ऐसे इंसान को ढूंढते हैं, जो हमें समझ सके। ऐसे में दोस्त से बेहतर और कौन हो सकता है। दोस्ती के इस बंधन को सेलिब्रेट करने के लिए हर साल अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस मौके पर दोस्त अपने दोस्त की कलाई पर रंग- बिरंगा धागा या फिर बैंड बांधते हैं। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि बैंड बांधने की शुरुआत कहां से हुई? अगर आपको भी इसके पीछे की वजह नहीं पता है, तो नीचे लेख में जानें-
फ्रेंडशिप बैंड की शुरूआत कब से हुई?
फ्रेंडशिप बैंड्स का कॉन्सेप्ट बहुत पुरना है। लैटिन अमेरिकी देशों और कई प्राचीन संस्कृतियों में हाथ से बुने हुए धागे या ब्रेसलेट एक-दूसरे को पहनाने की परंपरा रही है। ये धागे आपसी प्रेम, सम्मान और कभी न टूटने वाले बंधन को दर्शाते थे।
मॉडर्न फ्रेंडशिप बैंड्स इसी पुरानी परंपरा का एक नया और आधुनिक रूप हैं। 1970 और 1980 के दशक के दौरान अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में युवाओं के बीच इन बैंड्स ने एक पॉपुलर फैशन और दोस्ती के रूप में बदला।
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फ्रेंडशिप बैंड के बदलने का सफर
20वीं सदी के मध्य में जब दुनियाभर में फ्रेंडशिप डे को बढ़ावा मिलने लगा, तो ग्रीटिंग कार्ड कंपनियों ने इसमें कुछ नया जोड़ने का सोचा। इसके बाद शुरुआती दौर में मार्केट में दोस्ती के मैसेज वाले रिबन और सादे धागे आएं। इसे लोगों ने एक-दूसरे को यह गिफ्ट करना शुरू किया, जिससे वे अपने रिश्तों की अहमियत को खास तरीके से बयां कर सकें।
मगर समय के साथ जैसे-जैसे ट्रेंड बदला, बाजार में रंग-बिरंगे फैंसी बैंड्स, मोतियों वाले ब्रेसलेट और मेटल प्लेट्स आने लगे। आज के समय में यह केवल एक धागा नहीं बल्कि दोस्ती के जश्न का स्टाइलिश प्रतीक बन चुका है।
फ्रेंडशिप बैंड के रंगों का मतलब
दोस्त की कलाई पर बांधने के लिए हम सभी किसी भी रंग का फ्रेंडशिप बैंड खरीद लेते हैं। मगर आपको बता दें कि हर एक रंग का अलग-अलग मतलब होता है। नीचे टेबल में जानें-
| बैंड का रंग | रंग का मतलब |
| पीला | यह रंग सकारात्मकता का प्रतीक है। ऐसे दोस्त जिन्हें देखकर या जिनसे बात करके हमेशा पॉजिटिव एनर्जी मिलती है। |
| लाल | यह रंग गुड लक और बोल्ड दोस्ती का प्रतीक है। अपने सबसे खास या दिल के करीब दोस्त को। |
| हरा | यह कलर अटूट विश्वास और सच्चाई का प्रतीक है। जिस दोस्त पर आप आंख मूंदकर भरोसा कर सकें। |
| नीला | यह रंग साहस और ताकत का प्रतीक है, जो दोस्त हर मुश्किल परिस्थिति में आपका संबल बनता है। |
| काला | यह रंग मजबूत रिश्ते और बोल्ड एनर्जी को दर्शाता है, जिसके साथ आपका रिश्ता बेहद गहरा और पक्का हो। |
| गुलाबी | यह कलर प्यार, अपनापन और परवाह को दर्शाता है, जो दोस्त हमेशा आपके लिए खड़ा रहा हो और आपको समझे। |
| सफेद | यह रंग शांति, पवित्रता और मासूमियत का प्रतीक माना जाता है। |
| बैंगनी | यह रंग बहुत ही कोमल मन और दयालु स्वभाव वाले दोस्त को दिया जाता है। |
फ्रेंडशिप डे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है?
साल 1930 में अमेरिका के एक ग्रीटिंग कार्ड बिजनेसमैन जॉयस हॉल ने दोस्तों के लिए एक खास दिन मनाने का विचार रखा था। उन्होंने इसके लिए 2 अगस्त की तारीख चुनी थी।
खास बात यह है कि 2 अगस्त 1930 को रविवार ही था। चूंकि रविवार के दिन छुट्टी होती है और सभी लोग फ्री रहते हैं, इसलिए इस दिन को मनाना आसान था और यहीं से रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाने की शुरुआत हुई। आगे चलकर 1958 में पराग्वे के डॉक्टर रामोन आर्टेमियो ब्राचो ने भी दोस्ती का यह दिन मनाने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि दोस्ती राजनीति से ऊपर उठकर देशों और लोगों के बीच आपसी प्रेम और शांति बढ़ा सकती है।
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अब आप समझ गए होंगे कि फ्रेंडशिप बैंड बांधने की परंपरा कब और कैसे शुरू हुई। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।
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