महिला के साथ छेड़छाड़, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न या पीछा करने जैसी घटना हो जाए, तो पुलिस से शिकायत करना न्याय पाने में पहला कदम हो सकता है। मगर परेशानी तब बढ़ जाती है, जब थाने पहुंचने पर शिकायत लिखने से मना कर दिया जाए या महिला से ही बार-बार सवाल पूछे जाएं। ऐसी स्थिति में कई बार महिलाएं घबराकर पीछे हट जाती हैं, लेकिन आपको बता दें कि इस स्थिति में अपने कानूनी अधिकारों के बारे में पता होना बहुत जरूरी होता है।
भारतीय कानून में कई ऐसे तरीके हैं, जिनकी मदद से पुलिस के इनकार के बावजूद अपनी शिकायत आगे बढ़ा सकती है और कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती है। नीचे लेख में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता नीतेश पटेल से जानें-
पुलिस अगर शिकायत न लिखें, तो इस पर क्या है कानून?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत संज्ञेय अपराध की जानकारी पुलिस को दी जा सकती है। ऐसे अपराध में पुलिस कानून के अनुसार जांच शुरू कर सकती है। अगर शिकायत से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, तो केवल यह कहकर एफआईआर दर्ज करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि घटना दूसरे थाना क्षेत्र की है। ऐसी स्थिति में जीरो एफआईआर का विकल्प हो सकता है।
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कुछ मामलों में कानून के अनुसार प्रारंभिक जांच की अनुमति है, इसलिए हर शिकायत में प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती। नीचे जानें अगर पुलिस शिकायत न लिखें, तो आप आगे की मदद कहां जाकर ले सकती हैं?
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थाने में सुनवाई न हो तो SP को भेजें शिकायत
अगर थाना प्रभारी शिकायत दर्ज करने से मना कर दे, तो महिला लिखित शिकायत जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को डाक से भेज सकती है। शिकायत में घटना की तारीख, समय, स्थान, आरोपी का विवरण और पुलिस थाने में हुई कार्रवाई का जिक्र करें। उपलब्ध सबूतों की प्रतियां भी लगाएं। डाक की रसीद और शिकायत की एक प्रति अपने पास सुरक्षित रखें। BNSS की धारा 173(4) के तहत SP शिकायत से संज्ञेय अपराध सामने आने पर खुद जांच कर सकते हैं या अधीनस्थ पुलिस अधिकारी से जांच कराने का निर्देश दे सकते हैं।
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महिला आयोग में भी कर सकती हैं शिकायत
पुलिस की ओर से सुनवाई न होने पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। आयोग महिलाओं के उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और पुलिस की लापरवाही जैसे मामलों में शिकायत स्वीकार करता है। इसके लिए राष्ट्रीय महिला आयोग के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है। शिकायत में अपनी समस्या स्पष्ट लिखें और उपलब्ध दस्तावेज लगाएं। आयोग मामले के अनुसार संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने, पुलिस कार्रवाई की निगरानी करने या दूसरी उचित सहायता देने की पहल कर सकता है। हालांकि, आयोग में शिकायत करने से एफआईआर दर्ज होने की गारंटी नहीं होती।
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मजिस्ट्रेट के पास जाने का भी है विकल्प
अगर थाने और SP के स्तर पर भी कार्रवाई नहीं होती, तो महिला वकील की मदद से संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन दे सकती है। BNSS की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट से पुलिस जांच का आदेश देने का अनुरोध किया जा सकता है। इसके लिए शिकायत से जुड़े दस्तावेज, SP को भेजी गई शिकायत का प्रमाण और अन्य मौजूदा सबूत उपयोगी हो सकते हैं। अदालत में आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में स्थानीय वकील से सलाह लेना बेहतर है।
वकील के लिए पैसे नहीं हैं तो यहां लें मदद
कानूनी सहायता के लिए हर महिला को निजी वकील की फीस देने की जरूरत नहीं है। महिलाएं जिला अदालत में मौजूद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) या राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) से मुफ्त कानूनी सहायता मांग सकती हैं। इसके लिए 15100 राष्ट्रीय कानूनी सहायता हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है। यहां से कानूनी सलाह और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी मिल सकती है।
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किसी घटना की शिकायत करते समय इन बातों का रखें ध्यान
जब कभी भी आप किसी घटना की शिकायत के लिए पुलिस, कोर्ट या अन्य मदद वाली जगह पर जाएं, तो घटना से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात के बारे में पता होना जरूरी है। नीचे जानें-
- घटना से जुड़े मैसेज, फोटो, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूत सुरक्षित रखें।
- शिकायत की तारीख, थाने का नाम और संबंधित अधिकारियों की जानकारी लिख लें।
- शिकायत की रिसीविंग, डाक की रसीद या ऑनलाइन शिकायत नंबर संभालकर रखें।
- अगर आरोपी से खतरा है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी दें और तत्काल खतरे में स्थानीय आपातकालीन सहायता या 112 पर संपर्क करें।
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पुलिस का शिकायत दर्ज करने से इनकार करना न्याय पाने का आखिरी पड़ाव नहीं है। सही कानूनी प्रक्रिया अपनाकर महिला अपनी बात वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, महिला आयोग और अदालत तक पहुंचा सकती है। यह सामान्य कानूनी जानकारी है, मामले के तथ्यों के आधार पर कदम अलग हो सकते हैं।
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