भारतीय शादियों में दुल्हन के श्रृंगार में सफेद आइवरी चूड़ा जरूर शामिल किया जाता है। पंजाब, राजस्थान, गुजरात और उत्तर भारत के कई इलाकों में दुल्हन शादी के मंडप में यह चूड़ा पहनकर अपना श्रृंगार पूरा करती है। शादी के दौरान इस चूड़े को पहनना एक पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। आइवरी चूड़ा सेट पहनना सिर्फ हाथों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए ही नहीं होता और न ही यह केवल दुल्हन के श्रृंगार की एक चीज है, बल्कि इसके पीछे अखंड सुहाग की कामना और गहरा सांस्कृतिक महत्व जुड़ा हुआ है।
क्यों खास मानी जाती हैं हाथीदांत की चूड़ियां?
आजकल महिलाएं फैशन के लिहाज से आइवरी चूड़ी यानी हाथी दांत के लुक वाली चूड़ियां पहनना काफी पसंद कर रही हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि सफेद आइवरी चूड़ियों का असल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है? आइए विस्तार से जानते हैं।
आइवरी चूड़े का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के वृहद् शोध संग्रह के मुताबिक पारंपरिक रूप से शादियों में मायके की तरफ से दुल्हन को जो श्रृंगार चढ़ता है, उसमें आइवरी चूड़ा भी जोड़ा जाता है। इसे पवित्रता, सादगी और नए रिश्तों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही इसमें लगाई जाने वाली लाल चूड़ियां आपसी प्रेम का प्रतीक मानी जाती हैं। ऐसा भी माना जाता है कि यह चूड़ा नवविवाहिता को बुरी नजर से बचाता है और उसके वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
राजशाही और विरासत से जुड़ा इतिहास
राजस्थान के राजपूती घरानों से लेकर पंजाब के शाही परिवारों तक, आइवरी चूड़ा हमेशा से दुल्हनों के हाथों में देखने को मिलता रहा है। पहले के समय में दुल्हनें कलाई से लेकर कोहनी तक सफेद चूड़ियां पहनती थीं, जिन्हें असली हाथी दांत से बनाया जाता था। इसे परिवार की प्रतिष्ठा, समृद्धि और राजसी ठाट-बाट की पहचान माना जाता था। आज भी ऐसे कई मारवाड़ी और पंजाबी परिवार हैं, जिनकी बहू-बेटियां शादी-ब्याह के मौकों पर इस तरह के चूड़े पहनती हैं।
आधुनिक दौर में इको-फ्रेंडली और ट्रेंडी आइवरी चूड़ा
आज के आधुनिक युग में असली हाथी दांत मिलना नामुमकिन है। भारत सरकार के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और पर्यावरण मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हाथी दांत के व्यापार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में आज के समय में महिलाएं हाई-क्वालिटी एक्रिलिक, शाइन फिनिश और रेजिन से बने आइवरी चूड़े पहन रही हैं। ये दिखने में बिल्कुल असली हाथी दांत के चूड़े जैसे ही लगते हैं, लेकिन वजन में थोड़े हल्के और इस्तेमाल में आसान होते हैं।
निष्कर्ष:फैशन के इस बदलते दौर में चाहे कितने भी ट्रेंड्स बदल जाएं, लेकिन लाल और सफेद रंग का यह कॉम्बिनेशन आज भी ज्यादातर महिलाओं की पहली पसंद बना हुआ है। यह सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं का एक अहम रिवाज माना जाता है। अगर आप भी हाथी दांत वाले चूड़े के इस खास महत्व से अनजान थीं, तो उम्मीद है कि इस लेख से आपको इसकी पूरी जानकारी मिल गई होगी। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हरजिंदगी से।
(image credit: magnific/pinterest)
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