दिवाली का त्योहार पूरे भारत में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों में इस पर्व को मनाने की अनूठी परंपराएं और अलग-अलग रीति-रिवाज हैं। अगर बात करें दक्षिण भारत की, तो तमिलनाडु में दिवाली पर एक बहुत ही खास परंपरा निभाई जाती है। यहां नई दुल्हन और दूल्हा शादी के बाद अपनी पहली दिवाली बेहद खास और यादगार तरीके से मनाते हैं। तमिल भाषा में शादी के बाद पड़ने वाली इस पहली दिवाली को थलाई दिवाली के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं आखिर इस परंपरा में ऐसा क्या खास है।

दक्षिण भारत की थलाई दिवाली

थलाई दिवाली केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि दूल्हे का अपने ससुराल में शाही तरीके से स्वागत करने का एक बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दौरान दुल्हन के घर वाले अपने दामाद का बहुत ही आदर-सम्मान के साथ स्वागत करते हैं। 

क्या है थलाई दिवाली और इसकी खासियत?

तमिलनाडु सरकार के अंतर्गत संचालित तमिल वर्चुअल अकादमी के आधिकारिक डिजिटल और सांस्कृतिक मंच के अनुसार शादी के बाद दूल्हा अपनी पहली दिवाली अपनी पत्नी के मायके में मनाता है। यह परंपरा मायके वालों की तरफ से दामाद के प्रति सम्मान और प्यार जताने का एक जरिया है। थलाई दिवाली की यह परंपरा नए शादीशुदा जोड़े के आपसी रिश्ते को मजबूत बनाती है और दोनों परिवारों को एक-दूसरे के करीब लेकर आती है। इस दिन दूल्हे को राजा की तरह सम्मानित किया जाता है और उसके स्वागत के लिए घर में तरह-तरह के पारंपरिक दक्षिण भारतीय पकवान बनाए जाते हैं।

थलाई दिवाली के मुख्य रीति-रिवाज और परंपराएं

थलाई दिवाली के दिन कई खास और पवित्र रस्में निभाई जाती हैं -

  • इस दिन तड़के सूर्योदय से पहले घर के बड़े-बुजुर्ग नए जोड़े को तिल के तेल में जड़ी-बूटियां मिलाकर मालिश करते हैं।
  • इसके बाद उन्हें गुनगुने पानी से नहलाया जाता है।
  • इस पारंपरिक स्नान को गंगा नदी में स्नान करने जितना ही पवित्र माना जाता है, जिससे शरीर और मन दोनों में ताजगी आती है।
  • स्नान के बाद दूल्हा-दुल्हन नए कपड़े पहनते हैं, जो आमतौर पर दुल्हन के माता-पिता द्वारा उपहार के रूप में दिए जाते हैं।
  • दुल्हन इस दिन पारंपरिक कांजीवरम सिल्क साड़ी और गहने पहनती है, वहीं दूल्हा रेशमी धोती और कुर्ता पहनता है। 

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दीपावली लेह्यम क्या है?

नए कपड़े पहनने के बाद नए जोड़े को एक विशेष आयुर्वेदिक औषधि खिलाई जाती है, जिसे 'दीपावली लेह्यम' कहा जाता है। इसमें अदरक, गुड़, काली मिर्च और अलग-अलग तरह की जड़ी-बूटियां शामिल होती हैं। यह औषधि दिवाली के दिन खाए जाने वाले भारी और मीठे पकवानों को पचाने और सेहत को तंदुरुस्त रखने का काम करती है।

दामाद के लिए विशेष दक्षिण भारतीय व्यंजन

थलाई दिवाली पर दामाद के लिए विशेष रूप से कई तरह के पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन बनाए जाते हैं। इस दिन घर में खास तौर पर मुरुक्कु, अधिरसम और सुगियम जैसी पारंपरिक मिठाइयां बनाई जाती हैं। थलाई दिवाली वाले दिन नया जोड़ा घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है। बदले में बड़े-बुजुर्ग नए जोड़े को उपहार के तौर पर सोने-चांदी के सिक्के, गहने या नकद राशि देते हैं।

निष्कर्ष: भारत में वैसे तो अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग दिवाली परंपराएं हैं, लेकिन तमिलनाडु की यह 'थलाई दिवाली' बेहद खास मानी जाती है। यह न सिर्फ दो परिवारों को जोड़ती है, बल्कि नए बने रिश्तों में मिठास और अपनापन भी लेकर आती है। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

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