रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार और अपनापन का त्योहार है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी खुशहाल जिंदगी की कामना करती हैं। भाई भी बहन को गिफ्ट्स देकर हमेशा साथ देने का वादा करता है, लेकिन राखी का त्योहार आते ही एक सवाल लोगों के मन में जरूर आता है कि क्या भद्रा में राखी बांधी जा सकती है?

दरअसल, रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के समस को लेकर भद्रा का नाम अक्सर सुनने को मिलता है। ऐसा माना जाता है कि भद्रा के दौरान कोई शुभ काम नहीं किया जा सकता है। इसलिए राखीं बांधने से भी लोग बचते हैं। ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि आखिर भद्रा क्या है और रक्षाबंधन से इसका क्या लेना-देना है? इसके लिए हमने यूपी के बलरामपुर जिले के ज्योतिषाचार्य निर्मल पंडित से बात की। उन्होंने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आइए जानते हैं-

क्या है भद्रा?

सबसे पहले तो आपको यह जान लेना चाहिए कि भद्रा क्या होता है? आपको बता दें कि पंचांग में भद्रा को विष्टि करण के नाम से जाना जाता है। इसे आमतौर पर शुभ कामों के लिए शुभ कामों के लिए सही समय नहीं माना गया है। मान्यता है कि जब किसी तिथि में विष्टि करण होता है तब भद्रा का समय होता है। भद्रा के प्रभाव के दौरान शादी-ब्याह, गृह प्रवेश और दूसरे शुभ काम लोग नहीं करते हैं। रक्षाबंधन भी भाई के लिए शुभ होता है, इसलिए लोग इस दौरान राखी बांधने से बचते हैं।

भद्रा से जुड़ी है पौराणिक कहानी

भद्रा को लेकर एक पौराणिक कथा भी है। बताया जाता है कि भद्रा भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया की बेटी थीं। शनिदेव उनके भाई हैं। भद्रा का स्वभाव काफी गुस्से वाला था। मान्यता है कि जन्म के बाद से ही वह हवन, पूजा और दूसरे शुभ कामों में रुकावट डालने लगी थीं। इससे लोग परेशान रहने लगे।

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भद्रा के इस स्वभाव को देखकर उनके पिता सूर्यदेव भी चिंता में डूब गए। इसके बाद वह ब्रह्मा जी के पास गए। ब्रह्मा जी ने भद्रा के लिए एक समय निर्धारित किया और उन्हें पंचांग में विष्टि करण के रूप में जगह दे दी। इसी के बाद भद्रा के समय को शुभ कामों के लिए ठीक नहीं माना जाने लगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा का ध्यान क्यों रखा जाता है?

बता दें कि रक्षाबंधन का त्योहार सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। कई बार इसी दिन भद्रा का समय भी पड़ता है। हालांकि, राखी बांधना भाई-बहन से जुड़ा शुभ काम है, इसलिए परंपरा के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधने से बचा जाता है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन लोग राखी बांधने से पहले यह देखते हैं कि भद्रा का समय कबसे कब तक है। अगर भद्रा होता है तो उसके खत्म होने के बाद ही राखी बांधी जाती है।

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भद्रा में राखी बांधने को लेकर क्या मान्यता है?

निर्मल पंडित के मुताबिक, भद्रा के टाइम पर राखी बांधना शुभ नहीं है। इस दौरान अगर कोई शुभ काम होता है तो उसमें रुकावट आ सकती है और नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी वजह से भद्रा खत्म होने के बाद ही राखी बांधी जाती है।

2026 में कब है रक्षाबंधन?

इस साल 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस दिन सावन पूर्णिमा है। पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे तक रहेगी और उदया तिथि के हिसाब से त्योहार 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

क्या 2026 में रक्षाबंधन पर भद्रा है?

पंडित जी का कहना है कि इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं है। 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही भद्रा खत्म हो जाएगा। ऐसे में पूरे दिन राखी बांधी जा सकेगी।

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आसान शब्दों में समझें पूरी बात

अगर आप रक्षाबंधन और भद्रा के बारे में आसान शब्दों में जानना चाहती हैं, तो ऐसे समझें-

  • रक्षाबंधन सावन की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
  • भद्रा को पंचांग में विष्टि करण कहा जाता है।
  • धार्मिक मान्यता में भद्रा के समय शुभ काम करने से बचा जाता है।
  • राखी बांधना भी शुभ काम माना जाता है, इसलिए भद्रा के समय राखी न बांधने की परंपरा है।
  • 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को है।
  • इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं रहेगी।

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