आज के समय में हम सभी प्‍लेन से ट्रैवल करना पसंद करते हैं। ये ए‍क कंफर्टेबल ऑप्‍शन है। इससे हम हजारों कि‍लोमीटर की दूरी कुछ ही समय में पूरा कर लेते हैं। हालांक‍ि, अगर हम क‍िसी प्‍लेन को आसमान में उड़ते हुए देखते हैं तो उसके पीछे लंबी सफेद लाइनें जरूर दि‍खाई देती है। कई बार ये लाइन तो कुछ सेकंड में ही गायब हो जाती है, जबक‍ि कई बार ये कई म‍िनट तक बनी रहती है।

कुछ लोग इसे धुआं समझते हैं जबक‍ि कई लोग अलग-अलग तरह की बातें बताते हैं, लेक‍िन क्‍या आप जानती हैं क‍ि आखि‍र ये सफेद लाइनें बनती क्‍यों हैं? दरअसल, इसके पीछे वैज्ञानि‍क कारण छ‍िपा हुआ है। आज हम आपको यही लाइनें बनने के पीछे की वजह बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं-

क्या होती है ये सफेद लाइन?

सबसे पहले तो ये जान लेते हैं क‍ि प्लेन के पीछे बनने वाली इस सफेद लाइन को कहते क्‍या हैं? आपको बता दें क‍ि अंग्रेजी में इस लाइन काे कॉन्ट्रेल (Contrail) कहा जाता है। कॉन्ट्रेल का पूरा नाम Condensation Trail है। इसका मतलब ये होता है हवा की नमी से बनने वाली सफेद भाप की लकीर।

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ये बनती कैसे है?

प्‍लेन के इंजन जब चलते हैं, तो उनके साइलेंसर से गर्म गैसों के साथ-साथ भाप भी निकलती है। जब प्लेन बहुत ज्यादा ऊंचाई पर उड़ रहा होता है, तो वहां ऊपर आसमान में बहुत कड़ाके की ठंड होती है (टेंपरेचर माइनस में होता है)। इतनी ठंडी हवा में जब इंजन से निकली वो गर्म भाप अचानक बाहर आती है, तो ठंड के मारे तुरंत जमकर बर्फ के टुकड़ों में बदल जाती है। बस, यही जमे हुए बर्फ के छोटे-छोटे कण मिलकर हमें नीचे से सफेद लाइन जैसी दिखाई देते हैं।

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क्या ये धुआं होता है?

ज्‍यादातर लोग इसे धुआं ही समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। असल में ये वैसा ही है जैसे सर्दियों में आपके मुंह से निकलती सांस सफेद दिखाई देती है। वहां भी गर्म हवा ठंडे वातावरण से मिलती है और छोटे-छोटे पानी के कण बन जाते हैं।

कभी जल्दी गायब क्यों हो जाती है?

आपने देखा होगा कि कुछ प्लेन के पीछे बनी सफेद लाइन कुछ ही देर में गायब हो जाती हैं। दरअसल, ऐसा तब होता है जब आसपास की हवा ड्राई होती है। सूखी हवा में बर्फ के छोटे कण जल्दी खत्म हो जाते हैं और लाइन भी गायब हो जाती है।

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कभी लंबे समय तक क्यों बनी रहती है?

अगर ऊंचाई पर हवा में नमी ज्यादा हो, तो ये सफेद लाइन लंबे समय तक बनी रह सकती है। कई बार ये फैलकर बादलों जैसी भी दिखाई देने लगती है। इसी वजह से कुछ कॉन्ट्रेल आसमान में काफी देर तक नजर आते हैं।

क्या सभी प्लेन के पीछे ये लाइनें बनती है?

हर बार ऐसा नहीं होता है। ये इस बात पर ड‍िपेंड करता है कि प्‍लेन कितनी ऊंचाई पर उड़ रहा है और उस समय वहां का टेंपरेचर क‍ितना है और हवा में नमी कितनी है।

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क‍ितने ऊंचे उड़ता है प्‍लेन?

कमर्शियल पैसेंजर प्लेन आमतौर पर 30,000 से 40,000 फीट (लगभग 9 से 12 किलोमीटर) की ऊंचाई पर उड़ते हैं। अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि‍ नीचे तो इतनी गर्मी होती है ते फ‍िर ऊपर का टेंपरेचर माइनस में कैसे चला जाता है? दरअसल, इतनी ऊंचाई पर गर्मियों के दिनों में भी टेंपरेचर माइनस 40 से 60 डिग्री तक होता है। इसलिए, नीचे भले ही जून की चुभती गर्मी हो, लेकिन उतनी ऊंचाई पर प्लेन के इंजन से निकलने वाली भाप तुरंत बर्फ बन जाती है और हमें गर्मियों में भी सफेद लाइन (कॉन्ट्रेल) दिखाई देती है।

तो अब जब आप उड़ते प्‍लेन के पीछे सफेद लाइनें देखें तो समझ जाएं क‍ि ये धुआं नहीं बल्‍क‍ि Condensation Trail है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Source-

https://www.weather.gov/bgm/WeatherInActionContrails
https://www.nasa.gov/wp-content/uploads/2023/06/contrails-k-12.pdf

Image Credit- Freepik