भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार सनातन धर्म में विशेष स्थान रखता है। इस पावन दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हुए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। हालांकि, कई बार अनजाने में लोग इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। शास्त्रों और वास्तु नियमों के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व मनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। इस लेख में दिए गए इनपुट वृंदावन के अनंतदास जी महाराज द्वारा दिए गए हैं। ऐसे में जानते हैं, क्या कहते हैं महाराज जी...
राखी बांधते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
शास्त्रों में रक्षाबंधन के दिन कुछ कार्यों को करना पूरी तरह वर्जित माना गया है। यदि इन बातों की अनदेखी की जाए तो जीवन में नकारात्मकता आ सकती है।
- भगवान को पहली राखी न चढ़ाना: रक्षाबंधन की शुरुआत बिना ईश्वर के आशीर्वाद के करना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है।
- भद्रा काल की अनदेखी: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा काल में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है। भद्रा के समय बांधी गई राखी से भाई-बहन के जीवन में कष्ट आ सकते हैं, इसलिए शुभ मुहूर्त देखकर ही राखी बांधनी चाहिए।
- सिर को कवर किए बिना राखी बंधवाना: धार्मिक कार्य के दौरान सिर खुला रखना मर्यादा के विपरीत माना गया है। राखी बंधवाते समय भाई और बहन दोनों को अपना सिर रुमाल, दुपट्टे या चुनरी से ढककर रखना चाहिए।
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करना: दिशाओं का प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इस दिशा में मुख करके राखी बंधवाना भाई की सेहत के लिए अनुकूल नहीं होता।
- खंडित सामग्री का इस्तेमाल: पूजा की थाली में टूटा हुआ दीपक, चटका हुआ नारियल या टूटे हुए चावल नहीं रखने चाहिए। इसके अलावा, राखी बांधने के बाद बहन को खाली हाथ छोड़ना या दक्षिणा-उपहार न देना भी अनुचित माना गया है।
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रक्षाबंधन पर अपनाएं ये सही नियम
राखी पर शुभ फल प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए-
- सबसे पहले पूजा की थाली सजाकर भगवान गणेश या अपने कुलदेवता के सामने दीया जलाएं और उन्हें रक्षासूत्र अर्पित करें।
- पंचांग के अनुसार भद्रा रहित शुभ काल में ही राखी बांधें। कलाई पर रक्षासूत्र बांधते समय इस पौराणिक मंत्र का पाठ अवश्य करें:
"येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि, रक्षे माचल माचल:॥"
अर्थात्: जिस रक्षासूत्र से अत्यंत बलशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी पवित्र धागे से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र! तुम अपने संकल्प से कभी विचलित न होना।
- राखी बांधते समय भाई का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- पूजा की थाली में कुमकुम, साबुत अक्षत, नया दीया, मिष्ठान और सुंदर राखी रखें।
- राखी की पूरी रस्म संपन्न होने के बाद छोटे भाई को अपनी बड़ी बहन के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए।
निष्कर्ष
रक्षाबंधन केवल एक धागा बांधने की रस्म नहीं, बल्कि शास्त्रों में बताए गए नियमों, मर्यादाओं और पवित्रता को निभाने का पर्व है। जब सही मुहूर्त, उचित दिशा और श्रद्धा भाव के साथ यह त्यौहार मनाया जाता है, तो भाई-बहन के रिश्ते में मिठास बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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