राजस्थान अपनी रंग-बिरंगी संस्कृति और अनूठी लोक कलाओं के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। हालांकि, जब बात यहां के पारंपरिक नृत्य की बात होती है, तो अधिकतर लोगों के दिमाग में घूमर का नाम आता है। मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि इस शहर के पारंपरिक नृत्यों में एक ऐसा नृत्य है, जिससे अंग्रेजी हुकूमत खौफ खाती थी। इस कारण से उन्होंने इस नृत्य को बैन कर दिया था। यकीनन आपके मन में यह प्रश्न आ रहा होगा कि इस नृत्य में ऐसा क्या था? नीचे लेख में जानें कालबेलिया नृत्य के रोचक इतिहास के बारे में।
कालबेलिया नृत्य क्या है?
कालबेलिया नृत्य राजस्थान का लोकप्रिय और पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसे मुख्य रूप से कालबेलिया सपेरा समुदाय की महिलाओं द्वारा किया जाता है। काले रंग के कढ़ाईदार कपड़ों में सजी नृत्यांगनाएं जब बीन और खंजरी की मधुर धुन पर नाचती हैं, तो वे बिल्कुल सांप के चाल जैसी लगती हैं।
इसलिए इसे अक्सर सांप के खेल जैसा नृत्य भी कहा जाता है। साल 2010 में यूनेस्को ने इसे अपनी 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' की सूची में शामिल कर वैश्विक पहचान दिलाई।
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कालबेलिया नृत्य से अंग्रेज खाते थे खौफ?
ब्रिटिश शासन के दौरान कालबेलिया समुदाय से जुड़े इतिहास का एक ऐसा पहलू भी है, जो अंग्रेजों के मन में उनके प्रति खौफ और संदेह पैदा करता था। घुमंतू जीवनशैली जीने वाले ये लोग रेगिस्तान के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे और अपनी कला व यात्राओं के चलते दूर-दूर तक पैठ रखते थे।
स्वतंत्रता आंदोलन के समय इस समुदाय ने कई क्रांतिकारियों को अंग्रेजों की नजरों से बचाकर रेगिस्तान के गुप्त रास्तों से सुरक्षित एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने में मदद की थी। इसके अलावा, वे अंग्रेजों की खुफिया गतिविधियों और संदेशों को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने का काम भी करते थे।
यह समुदाय किसी एक निश्चित प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं बंधा था और अंग्रेजों की पकड़ से बाहर था। इसलिए ब्रिटिश हुकूमत हमेशा इनसे आशंकित रहती थी। क्रांतिकारियों को इनकी मदद मिलने की खबरों के कारण अंग्रेजों के मन में इनके प्रति एक प्रकार का खौफ था।
खौफ के कारण अंग्रेजों ने इस नृत्य को कर दिया था बैन
ब्रिटिश सरकार ने इस समुदाय को आपराधिक जनजाति अधिनियम के तहत डाल दिया था। इस दमनकारी कानून की वजह से इस समुदाय को प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। आजादी के बाद वर्ष 1952 में यह अधिनियम रद्द किया गया। आज यही नृत्य भारत की शान बनकर दुनिया भर में चमक रहा है।
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आज गुलाबो सपेरा जैसी प्रसिद्ध नृत्यांगनाओं के प्रयासों से यह नृत्य राजस्थान के रेगिस्तानी रेतों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चमक बिखेर रहा है और भारत का मान बढ़ा रहा है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
Image Credit- Rajasthan Folk Dance Oficial Website
