सपने वो नहीं होते जो हम नींद में देखते हैं, बल्कि असली सपने तो वही हैं जो हमारी रातों की नींद उड़ा दें। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का यह कथन हमें हमेशा याद आता है। सभी की आंखों में कोई न कोई सपना जरूर बसा होता है, जिसे साकार करने के लिए वह लगातार प्रयासरत रहता है। भले ही राह में रुकावटें आएं या मंजिल के करीब पहुंचकर निराशा हाथ लगे, फिर भी हम उम्मीदों की डोर थामे अपने सपनों का पीछा करना नहीं छोड़ते।
बचपन के मासूम ख्वाब
बाल साहित्यकार मंजरी शुक्ला के अनुसार, बच्चों के सपनों की दुनिया बेहद मासूम होती है। शुरुआत में चॉकलेट, खिलौने या आइसक्रीम पाना ही उनका सपना होता है, लेकिन जैसे-जैसे वे स्कूल और समाज के संपर्क में आते हैं, उनके अनुभवों का दायरा बढ़ता है। धीरे-धीरे उनकी छोटी इच्छाएं महत्वाकांक्षा में बदलने लगती हैं और पढ़ाई, खेल या डांस जैसी गतिविधियों में अव्वल आने की चाहत उनके नए सपने बन जाती है।
असफलता से न डरने का जज्बा
"काश ऐसा होता" कहकर कई लोग यह मान लेते हैं कि सपने और हकीकत में बहुत फर्क है। इस सोच के साथ ही सुंदर विचारों का अंत हो जाता है। इसके विपरीत, जो लोग तमाम रुकावटों के बावजूद जी-जान से जुटे रहते हैं, उनका यही जज़्बा उन्हें जीत दिलाता है। अगर कुछ कोशिशें नाकाम भी हो जाएं, तो भी उस दौरान मिले कीमती अनुभव कभी व्यर्थ नहीं जाते।
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सपनों से निखरती है क्रिएटिविटी
बड़े सपने देखने वालों को अक्सर लोग 'डे ड्रीमर' कहकर उनका उपहास उड़ाते हैं। मनोवैज्ञानिक सलाहकार आयुषी शर्मा मानती हैं कि सपने देखना सांस लेने जितना सहज और स्वस्थ मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है।
यही सपने हमें कठिन समय में जीने का हौसला देते हैं। अनुसंधानों से भी साबित हुआ है कि सपने देखने वाले और कल्पनाशील लोग दूसरों की तुलना में ज्यादा क्रिएटिव होते हैं।
हर आविष्कार का आधार हैं सपने
संसार के हर बड़े आविष्कार के पीछे कोई न कोई सपना छुपा होता है। 19वीं सदी में अमेरिकी वैज्ञानिक इलियास होव ने अपनी मां को देर रात तक हाथ से कपड़े सिलते देखा। उन्होंने मां की मेहनत कम करने के लिए कपड़े सीने की मशीन बनाने का सपना देखा। अपार लगन के साथ मेहनत कर उन्होंने 1846 में सिलाई मशीन का आविष्कार कर अपने सपने को हकीकत में बदल दिया।
अटूट इरादों से मिलती है सफलता
कामयाबी के लिए केवल सपने देखना नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने का जुनून भी जरूरी है। इसरो साइंटिस्ट अनुराधा टी.के. ने बचपन से अंतरिक्ष में जाने के अपने सपने को अपनी इच्छाशक्ति से सच कर दिखाया। इसी तरह, दुर्घटना में पैर गंवाने के बाद भी पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा ने हिम्मत नहीं हारी।
बछेंद्री पाल से मार्गदर्शन लेकर निरंतर अभ्यास किया और माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर साबित किया कि पक्के इरादों के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है।
उम्मीद और हौसले की डोर
- घूमने जाने या घर सजाने जैसे छोटे-छोटे सपनों के लिए भी अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय जरूर निकालें।
- हमेशा सकारात्मक सोच रखें, क्योंकि अच्छी सोच ही जिंदगी में अच्छे परिणामों का आधार बनती है।
- कोई ख्वाब अधूरा रह जाए तो निराश होने के बजाय नए जोश के साथ दोबारा प्रयास में जुट जाएं।
- बच्चों से हमेशा सकारात्मक चर्चा करें और उन्हें बेहतर भविष्य के बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करें।
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लेखक: विनिता
Images: magnific
