भारतीय टेक्सटाइल की दुनिया में जब भी ब्लॉक प्रिंटिंग की बात होती है, तो उसमें एक अलग ही गर्माहट और सादगी नजर आती है। ऐसी ही एक बेहद खूबसूरत कहानी है 'नीलम इंडिया' (Nilam India) की, जिसकी नींव साल 1973 में रखी गई थी। संघमित्रा घोष की दादी स्व. श्रीमती जमीला अय्यर ने घूमते-फिरते रंगों और पैटर्न्स के प्रति अपने लगाव के चलते ब्लॉक प्रिंटिंग को एक शौक के रूप में शुरू किया था। देहरादून में एक छोटे से प्रिंटिंग स्टूडियो से शुरू हुआ यह सफर आज एक मॉडर्न, डिजिटल-फर्स्ट और स्लो-फैशन वूमेंसवेयर ब्रांड में बदल चुका है। पढ़ते हैं इनकी सफलता की कहानी
दादी के सपने से डिजिटल वर्ल्ड तक का सफर
श्रीमती जमीला अय्यर ने दुनिया भर की यात्राओं के दौरान विभिन्न रंगों, डिजाइनों और पैटर्न्स को करीब से देखा था। इसी प्रेरणा से उन्होंने देहरादून में कारीगरों के साथ मिलकर कपड़े और होम डेकोर के आइटम्स तैयार करना शुरू किया। अपनी बेटी के नाम पर उन्होंने इस प्यारे से शौक का नाम रखा 'नीलम'।
परिवार की विरासत को बढ़ाया आगे
समय के साथ सेहत संबंधी परेशानियों की वजह से श्रीमती अय्यर को काम रोकना पड़ा और प्रिंटिंग स्टूडियो कुछ समय के लिए शांत हो गया, लेकिन उनकी पोती संघमित्रा घोष ने इस हुनर को खोने नहीं दिया। संघमित्रा ने अपने पारिवारिक ज्ञान, पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक सोच को मिलाकर 'नीलम इंडिया' को दोबारा नए अवतार में लॉन्च किया। आज यह ब्रांड भारतीय क्राफ्ट को रोजाना पहने जाने वाले आरामदायक कपड़ों के रूप में पेश कर रहा है।
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कुदरत की खूबसूरती से प्रेरित अनोखे कलेक्शंस
नीलम इंडिया के डिजाइनों की सबसे खास बात यह है कि इनके पीछे कोई न कोई खूबसूरत भावना या यात्रा जुड़ी होती है।
1. शाम – द सनसेट कलेक्शन
डूबते सूरज की रोशनी इंसान को ठहरने और सुकून महसूस कराने का एहसास देती है। इसी भावना को कपड़ों पर उतारने के लिए संतरी, पीले और लाल जैसे गर्म रंगों का इस्तेमाल किया गया है। इसके खास ब्लॉक डिजाइन लकड़ी पर तराशकर तैयार किए गए हैं।
2. स्काई फुल ऑफ स्टार्स
बचपन में चांद और तारों को देखने की पुरानी यादों को 100% सूती (Cotton) फैब्रिक पर हैंड-ब्लॉक प्रिंट्स के जरिए चांद, तारे, बादल और आकाशगंगा के रूप में उकेरा गया है।
परंपरा और आधुनिकता का सही संतुलन
नीलम इंडिया की खासियत यह है कि यह बांधनी, हैंड-स्क्रीन प्रिंट और हैंडलूम जैसे शिल्पों को कैजुअल और कटिंग्स में बदलता है। इसका उद्देश्य यह है कि भारतीय हस्तशिल्प को किसी खास मौके का इंतजार न करना पड़े, बल्कि इसे रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से पहना जा सके।
निष्कर्ष
'नीलम इंडिया' की यह कहानी साबित करती है कि जब विरासत को सही सोच और आधुनिक नजरिए के साथ आगे बढ़ाया जाता है, तो वह केवल एक ब्रांड नहीं बनता बल्कि कारीगरों और संस्कृति को जोड़ने वाला एक मजबूत माध्यम बन जाता है।
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Main Images: Nilam India official website
