अगर हम पिछले एक दशक पर गौर करें तो लोगों की लाइफस्टाइल में सब कुछ काफी तेजी से बदल रहा है। उसी बीच कोरोना-काल में लगभग ढाई वर्षों के लिए लोगों की जिंदगी थम सी गई थी, लेकिन उसके अनुभवों ने भी हमें बहुत कुछ सिखाया। उसके बाद कामकाज के प्रति लोगों का पूरा नजरिया बदल गया। चाहे स्त्री हो या पुरुष, सब अपने हाथों से घर के कामकाज करने लगे। इतना ही नहीं, लोग एक साथ और एक ही समय में कई कार्यों को पूरा करने की अहमियत को भी बखूबी समझने लगे।
अब तो हर व्यक्ति एक साथ कई कार्य कर रहा होता है। मल्टीटास्किंग स्किल को विशेष योग्यता की तरह देखा जाने लगा है। एक ही व्यक्ति से कई कार्यों में कुशल होने की उम्मीद की जाती है। लोगों के पास समय कम और काम ज्यादा है। इसी वजह से व्यक्ति पर बहुत ज्यादा दबाव होता है। ऐसे में लोगों को एक ही साथ कई कार्य करने का तरीका ज्यादा कारगर लगता है, पर इसका दूसरा पहलू यह भी है कि इससे काम बेशक जल्दी पूरा हो जाता है, पर लोगों की कार्यकुशलता पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, एक ही साथ कई काम करते समय व्यक्ति का दिमाग हर कार्य पर समान रूप से ध्यान नहीं दे पाता। यह काफी हद तक कार्य की प्रकृति पर भी निर्भर करता है। कंप्यूटर पर ईमेल सर्च करते समय मोबाइल पर बातें करना संभव है, लेकिन बैंक के कैश काउंटर पर बैठा व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता। ड्राइविंग के दौरान समय बचाने के लिए भले ही कुछ लोग मोबाइल पर बातें करते हैं, पर इससे भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। फिर भी अति व्यस्त जीवनशैली के कारण अधिकतर लोग कामकाज का यही तरीका अपनाते हैं।
यह बदलाव है जरूरी
बदलते समय की जरूरत के अनुसार व्यक्ति स्वयं को बहुत आसानी से ढाल लेता है। पुराने जमाने में बच्चों को एक वक्त में एक ही काम करने की सीख दी जाती थी, लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी में यह संभव नहीं है। कड़ी प्रतियोगिता के इस दौर में एक ही साथ कई कार्यों को निपटाना जरूरी हो गया है। आज इंसान भी मशीन बनता जा रहा है।
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लोगों की कार्यसूची में बाहर की दुनिया से जुड़े पचासों काम शामिल हैं, लेकिन निजी जीवन से जुड़ी अनमोल खुशियों के लिए उनके पास जरा भी समय नहीं है। बच्चों के साथ खेलने, बुजुर्गों के साथ थोड़ी देर बैठकर बातचीत करने और रिश्तेदारों से मिलना-जुलने जैसे कार्यों के लिए लोग समय नहीं निकाल पाते। पहले संयुक्त परिवारों में लोग साथ मिलकर घरेलू जिम्मेदारियां निभाते थे, पर अब तो एकल परिवारों में सभी को ऐसे कार्य खुद ही करने पड़ते हैं। अपनों पर अविश्वास और असुरक्षा की वजह से भी आजकल लोगों को अकेले ही एक साथ कई कार्य निपटाने पड़ते हैं।
मल्टीटास्किंग वुमेन
आजकल प्रोफेशनल जीवन में अक्सर लोग मल्टीटास्किंग स्किल पर चर्चा करते हैं, स्किन अक्सर वे यह भूल जाते हैं कि हमारे परिवारों में स्त्रियां वर्षों से कुशलतापूर्वक एक साथ कई जिम्मेदारियों का निर्वाह करती आ रही हैं। कभी किसी स्त्री की दिनचर्या पर गौर कीजिए, कुकिंग के साथ वह घर की सफाई भी कर रही होती है। बच्चों का होमवर्क कराने के साथ बीच में दो मिनट का ब्रेक लेकर बुजुर्ग सास-ससुर के लिए चाय भी बना लेती है। किसी से भी कोई शिकायत किए बगैर वह शांतिपूर्वक अपनी सारी जिम्मेदारियों का निर्वाह करती है।
समय के साथ स्त्रियों की कार्यसूची भी लंबी होती जा रही है। घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के अलावा क्रिएटिव एक्टिविटीज में बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना, पढ़ाई और करियर के मामले में उनका मार्गदर्शन करना, आधुनिक जीवनशैली के अनुकूल अपने घर के इंटीरियर में बदलाव लाना, निवेश संबंधी मामलों की पूरी जानकारी रखते हुए खुद निर्णय लेना जैसी सभी जिम्मेदारियों का निर्वाह आज की स्त्री बड़ी कुशलता से करती है।
इस संदर्भ में लखनऊ स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत सीए नंदिनी शर्मा कहती हैं, "यह कार्यशैली नियोक्ताओं के लिए निश्चित रूप से बहुत फायदेमंद है, लेकिन अत्यधिक कार्यभार के कारण कुछ समय के बाद लोगों के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है। वैसे भी अंग्रेजी में एक कहावत है, 'जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स, मास्टर ऑफ नन' अर्थात वर्षों के अभ्यास के बाद कोई व्यक्ति किसी एक कार्य में विशेषज्ञता हासिल करता है, इसलिए हर कार्य के बारे में सब कुछ जानने वाले का ज्ञान हमेशा अधूरा रहता है और किसी एक व्यक्ति से हर कार्य में पारंगत होने की उम्मीद रखना गलत होगा।"
खासतौर पर आजकल स्त्रियों से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ती जा रही हैं। परिवार के लोग यही चाहते हैं कि उनकी पत्नी या बहू ड्राइविंग के साथ अचार बनाने में भी परफेक्ट हो, जो कि व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पाता। मल्टीटास्किंग स्किल्स की भी कुछ सीमाएं हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है।
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सिक्के का दूसरा पहलू
यह सही है कि जब कोई व्यक्ति एक साथ कई काम करता है तो इससे समय और संसाधनों की बचत होती है। जब काम जल्दी पूरा होता है तो उसके बाद बचने वाले समय का सदुपयोग दूसरे आवश्यक कार्यों के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसकी वजह से फायदे के साथ कुछ नुकसान भी हो सकते हैं।
मनोवैज्ञानिक सलाहकार आयुषी शर्मा के अनुसार, ऐसे मामूली कार्य जिनमें ज्यादा शारीरिक-मानसिक परिश्रम और ऊर्जा की जरूरत नहीं होती, वहां यह तरीका फायदेमंद हो सकता है। लेकिन जिन कार्यों में अधिक सावधानी, एकाग्रता या क्रिएटिविटी की जरूरत होती है, वहां इससे फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है। मिसाल के तौर पर कोई पेंटर चित्र बनाने के साथ कोई दूसरा काम नहीं कर सकता या कोई संगीतकार किसी धुन की रचना करते समय कोई दूसरी बात नहीं सोच सकता।
इसके अलावा, घर या ऑफिस के सामान्य कामकाज में भी अगर कोई लगातार कई वर्षों तक मल्टीटास्किंग स्किल्स का इस्तेमाल करता है, तो इससे धीरे-धीरे उसकी कार्य क्षमता घटने लगती है, एकाग्रता और स्मरण-शक्ति में भी गिरावट आती है। उसे सिरदर्द, तनाव, चिड़चिड़ापन और एंजायटी जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं।
कम समय में लक्ष्य हासिल करने का तरीका
आज हर व्यक्ति दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में लगा है क्योंकि उसके लिए हर हाल में खुद को दूसरों से बेहतर साबित करना जरूरी है। उसके पास समय कम है और काम ज्यादा। ऐसी स्थिति में मल्टीटास्किंग कार्यशैली अपनाना लोगों की जरूरत बन चुका है। बेशक कम समय में लक्ष्य हासिल करने से व्यक्ति का उत्साह बढ़ता है।
यह भी न भूलें
- अगर आप एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाते हैं तो काम के बीच में एक छोटा ब्रेक अवश्य लें।
- अपने मुख्य कार्य के साथ किसी ऐसे हुनर को भी निखारने की कोशिश करें, जो प्रोफेशनल जीवन में आपके लिए उपयोगी साबित हो।
- अपनी प्राथमिकताओं को पहचानते हुए, उसी के अनुसार कार्य पूरा करें।
- घर-बाहर की ढेर सारी जिम्मेदारियों के बीच खुद को न भूलें, अपनी सेहत का भी ख्याल रखें।
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