घर में जब बच्चे का जन्म होता है, तो माहौल एकदम बदल जाता है। खासकर यूपी और बिहार के कई इलाकों में बच्चे के जन्म पर महिलाएं मिलकर सोहर गाती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इन्हीं लोकगीतों में एक गीत है, जिसके बोल हैं- 'जुग जुग जियसु ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो, ललना लाल होइहे, कुलवा के दीपक मनवा में, आस लागल हो'। बच्चे के जन्म की खुशी में गाए जाने वाले इस सोहर में परिवार की खुशी, बच्चे के लिए प्यार और उसके अच्छे भविष्य की कामना सुनाई देती है।
इस गीत में घर के लोगों की खुशी के साथ बच्चे के आने से परिवार में रौनक बढ़ने का भी जिक्र किया गया है। यह भोजपुरी सोहर यूपी और बिहार की शान है। ऐसे में अगर आप इसका इतिहास और मतलब जानना चाहती हैं तो हमारा यह लेख आपके काम आ सकता है। आइए जानते हैं-
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'ललना लाल होईहे, कुलवा के दीपक' का क्या मतलब है?
इस लाइन का सीधा-सा मतलब है कि घर में बेटा पैदा हुआ है, जो पूरे कुल (परिवार) का नाम रोशन करेगा। यहां 'कुलवा के दीपक' का मतलब है- परिवार का उजाला या उम्मीद। आसान शब्दों में कहें तो इस पूरी लाइन में बच्चे के जन्म की खुशी और जश्न को दिखाया गया है। हालांकि, आज के समय में यह सोचना कि सिर्फ 'बेटा ही कुल का दीपक होता है' एक पुरानी और पारंपरिक सोच है। इसलिए इस गाने को उसी पुराने दौर की लोक-परंपरा और संस्कृति के नजरिए से देखना सही रहेगा।
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बच्चे के जन्म पर क्यों गाया जाता है सोहर?
सोहर असल में घर में नन्हे मेहमान के आने की खुशी में गाया जाने वाला बहुत प्यारा लोकगीत है। खासकर बिहार और यूपी (भोजपुरी इलाकों) में इसकी बहुत पुरानी परंपरा रही है। इसमें बच्चे के जन्म की खुशियां, परिवार का प्यार और इससे जुड़ी रस्में बहुत खूबसूरती से बयां होती हैं। सोहर सिर्फ एक गाना नहीं है बल्कि महिलाओं के साथ बैठकर जश्न मनाने और अपनी खुशियां बांटने का एक शानदार तरीका है।
इस सोहर में बच्चे को लेकर क्या कहा गया है?
इस सोहर में बच्चे के लंबी उम्र और खुशहाल जिंदगी की दुआ मांगी जाती है। इसके आने से पूरे घर में जैसे बहार आ गई है और सारी खुशियां लौट आई हैं। गाने में बच्चे के चेहरे और आंखों की खूबसूरती की तुलना उसके मम्मी-पापा से की गई है।
इस गीत का सबसे खास संदेश क्या है?
इस पूरे सोहर का संदेश है कि नन्हे मेहमान के आने की खुशी, उसकी लंबी उम्र की दुआ और घर में आई रौनक का जश्न। गाने में बच्चे की क्यूटनेस, मम्मी-पापा से मिलती उसकी शक्ल और परिवार की महिलाओं द्वारा मिलकर बधाइयां बांटने का बहुत ही प्यारा माहौल दिखाया गया है।
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क्या है सोहर का इतिहास?
आपको बता दें कि सोहर की जड़ें हमारे इतिहास में बहुत पुरानी हैं। बताया जाता है कि वैदिक काल से ही बच्चों के जन्म और शुभ मौकों पर मंगल गीत गाए जा रहे हैं।
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सोहर से जुड़ी खास बातें
अगर आप शॉर्ट में इस सोहर से जुड़ी बातें जानना चाहती हैं, तो प्वॉइंटर्स में समझ सकती हैं। जैसे-
- सोहर बच्चे के जन्म की खुशी में गाया जाने वाला लोकगीत है।
- भोजपुरी इलाके में सोहर गाने की पुरानी परंपरा रही है।
- 'ललना लाल होईहे, कुलवा के दीपक' वाला गीत बच्चे के जन्म और परिवार की खुशी पर है।
- गीत में बच्चे के लंबे जीवन की कामना की गई है।
- बच्चे के चेहरे को माता-पिता से मिलता हुआ बताया गया है।
- घर की महिलाएं बच्चे के जन्म पर गाती और खुशी मनाती दिखाई देती हैं।
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