आज के दौर में ब्राइटनेस को ही खूबसूरती मान लिया जाता है। ऐसे में यदि लड़की अपनी रंगत को लेकर हीन भावना का शिकार हो रही है और दूसरों से खुद की तुलना कर रही है, तो एक पेरेंट होने के नाते सोचना लाजमी है। अक्सर बच्चे बाहर की दुनिया की चकाचौंद और मीडिया के प्रभाव में बहुत जल्दी आ जाते हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि सांवला रंग कोई कमी नहीं, बल्कि एक नेचुरल रंग है। ऐसे में इसके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि लड़कियां रंगत को लेकर कमतर क्यों महसूस करती हैं और इस स्थिति में कैसे डील करें? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
लड़कियां रंगत को लेकर क्यों कम महसूस करती हैं?
इंस्टाग्राम रील्स, फिल्टर और एड्स लगातार यह दिखाते हैं कि केवल गोरा रंग ही सबसे अच्छा होता है।
अक्सर अनजाने में ही सही, रिश्तेदार या पड़ोसी बच्चों के रंग पर टोक देते हैं, जैसे धूप में नहीं खेलो, काली हो जाओगी। ये बातें उनके मन पर असर डाल सकती हैं।
दोस्तों के बीच लुक्स और कॉम्प्लेक्शन को लेकर होने वाली बातें भी लड़कियों को अपने कलर को असहज कर देती हैं।
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बच्चों के साथ इस स्थिति में कैसे निपटें?
उसे बताएं कि अट्रैक्शन चेहरे के रंग में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, दिमाग और अच्छे व्यवहार में होता है।
उसे बताएं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली फोटो असल जीवन से कोसों दूर होती हैं। वे केवल लाइट्स, मेकअप और फिल्टर से बनती हैं।
उसे उन सांवली लड़कियों के बारे में बताएं, जिन्होंने अपने टैलेंट के दम पर दुनिया में नाम कमाया है, जैसे मशहूर मॉडल, लीडर्स या एक्ट्रेसेस। इससे उसका नजरिया बदलेगा।
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