हालांकि मैं ये भी जानती हूं कि इस स्तंभ के सभी पाठकों की स्थिति एक समान नहीं है। कुछ लोग आयु के 30वें पड़ाव पर होंगे, जिनके पास अगले 25 वर्ष निवेश की योजना लेकर चलने का विकल्प है। उनके लिए बाजार के उतार-चढ़ावों से निपटना आसान होगा तो कुछ 50 साल के आयु वर्ग के होंगे। उनके लिए बाजार में गिरावट के चलते अपनी जमा को 15-20 प्रतिशत घटते देखना कष्टकारी हो सकता है। उससे आपकी मानसिक शांति व योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। कुछ लोग ऐसे होंगे जो तीन साल बाद का लक्ष्य लेकर चल रहे होंगे। कुछ लोग सेवानिवृत्त या उसके निकट होंगे, उनके लिए धन की बढ़त से ज्यादा उपलब्धता मायने रखती होगी।
जो रणनीति किसी एक तबके के निवेशक के लिए काम करती है, ये जरूरी नहीं कि वह सभी के लिए कारगर हो। किसी 32 वर्षीय निवेशक, जिसकी आय स्थिर हो और कोई बड़ी तात्कालिक जरूरत न हो, उससे बहुत अलग 55 वर्षीय या सेवानिवृत्ति के करीब व्यक्ति की आवश्यकताएं होंगी। दोनों के लिए वित्त से जुड़ी सलाहें भी अलग तरीके से काम करेंगी। किसी भी निवेश का विचार अपने आप में अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है कि संबंधित व्यक्ति की स्थिति-परिस्थिति क्या है।
आज हम संपत्ति के उस वर्गीकरण पर बात करेंगे जिसकी उतनी चर्चा नहीं होती जितनी होनी चाहिए। उसे अखबार या टेलीविजन चैनलों की सुर्खियों का विषय नहीं बनाया जाता, न ही धन दोगुणा होने का वायदा जुड़ा होता है। इसके बावजूद वह सही समय पर लिया गया सही निर्णय साबित होता है। यह आवश्यकताओं से जुड़ा मामला होता है। ऋण म्यूचुअल फंड्स के साथ कुछ ऐसा ही है।
इस स्तंभ में हमने इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की चर्चा कई बार की। उसकी धनराशि ऐसी कंपनियों के शेयर्स में लगाई जाती है, जिनकी दीर्घकाल में तरक्की की संभावनाएं दिखती हैं, हालांकि उनके साथ बड़े उतार-चढ़ाव का जोखिम भी होता है। जिस सप्ताह बाजार में गिरावट होती है, इक्विटी फंड्स के मूल्य में भी गिरावट आती है, लेकिन दीर्घकाल में बड़े लाभ के लिए आप इस जोखिम को स्वीकार करते हैं।
ऋण म्यूचुअल फंड्स बहुत अलग तरीके से काम करते हैं। उनकी धनराशि कंपनियों के शेयर्स में नहीं लगाई जाती, बल्कि उसे सरकार या अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों को बांड या सावधि जमा प्रतिभूतियों के एवज में उपलब्ध कराया जाता है। ये ऋण प्राप्तकर्ता जो धनराशि लेते हैं, उस पर ब्याज भी देते हैं। यहीं ब्याज आपका लाभांश होता है। यहां प्रतिदिन शेयर्स के मूल्य में उतार-चढ़ाव नहीं आता। सेंसेक्स की कोई सुर्खियां नहीं होतीं, जिनके परिणामस्वरूप आपके निवेश का मूल्य रातोंरात बदल जाए। यह व्यवस्था सधी हुई होती है, जिसके विषय में पूर्वानुमान लगाना संभव होता है, ज्यादा कुछ नाटकीय नहीं होता।
कुछ इस तरह सोचें, इक्विटी फंड एक प्रकार से व्यवसाय में हिस्सेदारी से जुड़ा होता है। जब व्यवसाय अच्छा चलता है तो आपको भी लाभ होता है, कभी-कभी बहुत अच्छा समय होता है तो कभी मुश्किल वक्त भी आता है। ऋण फंड किसी बैंक सदृश होता है जो व्यवसाय के लिए ऋण देता है। उस पर आपको सधा हुआ ब्याज मिलता है। आप लगातार ऊपर नहीं बढ़ते, लेकिन अप्रत्याशित परिस्थितियों से बचाव होता है।
ऋण म्यूचुअल फंड्स भी कई प्रकार के होते हैं और प्रत्येक से एक अलग उद्देश्य की पूर्ति होती है।
तरलता (लिक्विड) वाले ऋण फंड्स को पांरपरिक माना जाता है और उनकी उपलब्धता व्यापक होती है। अल्पकालिक कार्य उत्पादों में उनका निवेश किया जाता है और परिपक्वता अवधि सामान्यत: 90 दिन या कम होती है। इनका रिटर्न भी समुचित होता है। ये सेविंग अकाउंट से कुछ बेहतर होते हैं। इसमें से धनराशि आप कभी भी निकाल सकते हैं। यदि आप अपना इमरजेंसी फंड सेविंग अकाउंट में रखती हैं, जिसमें बहुत कम लाभ मिलता है, तो वो राशि लिक्विड ऋण फंड्स में लगाना अच्छा होगा। इससे थोड़ी अधिक आय होगी और जरूरत के समय वह धन उपलब्ध रहेगा। इसमें किसी प्रकार का जोखिम भी नहीं होगा।
अल्प अवधि के फंड्स की राशि ऐसे विकल्पों में लगाई जाती है, जिनकी परिपक्वता अवधि अपेक्षाकृत कुछ अधिक होती है सामान्यत: एक से लेकर तीन साल तक। जिस धनराशि की आपको अगले दो-तीन साल तक आवश्यकता नहीं होगी, उसे ऐसे फंड्स में निवेश कर सकती हैं। उदाहरण के लिए ये तब उपयुक्त है जब आप शादी, शिक्षा खर्च या किसी बड़ी चीज खरीदने के लिए डाउन पेमेंट जोड़ रहे हों, जिसमें दो साल का समय है। इसमें आपको लिक्विड फंड्स की तुलना में अधिक लाभ मिलता है। इक्विटी फंड्स के मुकाबले इन्हें अधिक सुरक्षित माना जाता है।
कॉरपोरेट बांड फंड्स की राशि को बड़ी कंपनियों के बांड्स में लगाया जाता है, जिनमें तीन से पांच साल की अवधि में सरकारी बांड्स की तुलना में बेहतर रिटर्न मिलता है। यदि आपके पास कुछ राशि यूं ही फिक्स्ड डिपॉजिट में पड़ी रह जाती है और आप ये सोचते रहते हैं कि अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा तो उसे इन कॉरपोरेट बांड फंड्स में लगा सकते हैं।
डायनामिक बांड फंड्स की राशि ब्याज दरों को देखते हुए समायोजित की जाती है। उसमें तीन से पांच साल में प्रतिफल मिलता है। हालांकि कई बार आपको प्रतिफल में समझौता भी करना पड़ सकता है।
निवेश की दिशा में आगे बढ़ें उससे पहले आपको कुछ बातों को जानना चाहिए- ऋण फंड्स पूरी तरह से जोखिमों से मुक्त नहीं हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो बांड्स का मूल्य अस्थायी रूप से गिर सकता है। सही समय की प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। वर्ष 2023 के बाद से ऋण फंड्स में लाभ पर आपकी आयकर सीमा के अनुसार ब्याज पड़ता है, यहां इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वे कितने समय से आपके पास हैं। इस वजह से आयकर दृष्टि से देखें तो फिक्स्ड डिपॉजिट से उनकी तुलना की जा सकती है।
अब सवाल उठता है कि ऋण फंड्स किसके लिए उपयुक्त हैं। जो निवेशक सेवानिवृत्ति के निकट हैं, जिन्हें बढ़त से ज्यादा स्थिरता चाहिए। जो व्यक्ति दो से पांच साल बाद के किसी लक्ष्य के लिए धनराशि जोड़ने का प्रयास कर रहा हो। जो इमरजेंसी फंड से भी कुछ जोड़ने की चाह रखता हो। जिसे इक्विटी बाजार को लेकर तनाव महसूस होता हो, उसके बजाय वह इतना धनलाभ चाहता हो कि रात में तनाव मुक्त होकर चैन की नींद सो सके, तो ऋण फंड्स की खरीद में बुद्धिमानी होगी। सही निवेश का ये अर्थ नहीं कि जो भी धन है वो बाजार में लगाया जाए। हमेशा सर्वाधिक प्रतिफल प्राप्त करना ही लक्ष्य नहीं होता। जो प्रतिफल आपको अपने लक्ष्य के नजदीक ले जाए और जिसे लेकर सहज हों, उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
सही निवेश हमेशा उत्साह से जुड़ा मामला नहीं होता। ये वह होता है जो आपको लक्ष्य के निकट ले जाए। निवेश से जुड़ी जिज्ञासाओं के समाधान के लिए हमें लिखें- iamolaxmi@gmail.com
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