सितंबर का महीना जितना खूबसूरत होता है, उतना ही दिलचस्प भी। इस महीने की पूर्णिमा का लोगों को पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता है। इस पूर्णिमा को दुनिया भर में हार्वेस्ट मून के नाम से जाना जाता है। आम पूर्णिमा की तुलना में इस दिन सूरज ढलते ही चंद्रमा बहुत जल्दी निकल आता है। यह हार्वेस्ट मून सामान्य चांद से काफी बड़ा नजर आता है। यही नहीं, इस पूर्णिमा का चांद सुनहरी रोशनी भी बिखेरता है।
सितंबर की पूर्णिमा
शरद ऋतु के आने का संकेत देने वाले इस पूर्णिमा के चांद के पीछे ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व भी छिपा है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सितंबर की पूर्णिमा का चांद इतना विशाल और अनोखा क्यों होता है और इस चांद को हार्वेस्ट मून क्यों कहा जाता है? अगर आप भी इसके बारे में जानना चाहती हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
हार्वेस्ट मून का इतिहास और इसका नाम कैसे पड़ा?
नासा के आधिकारिक खगोल विज्ञान पोर्टल के अनुसार, हार्वेस्ट मून का नाम सदियों पुरानी खेती-किसानी की परंपराओं पर आधारित है। पुराने समय में जब बिजली या आधुनिक रोशनी नहीं हुआ करती थी, तब किसान चांद की प्राकृतिक रोशनी का सहारा लेते थे। सितंबर के महीने में पूर्णिमा का चंद्रमा शाम ढलते ही उग आता था। इसकी चमकदार रोशनी की वजह से किसान रात के समय भी आसानी से खेतों में फसलों की कटाई कर पाते थे। यही कारण है कि इस चांद को 'हार्वेस्ट मून' कहा जाने लगा।
यह भी पढ़ें- UGC की स्थापना कब और किसने की थी, अब तक किन-किन अधिकारियों ने संभाली बागडोर?
यह अन्य पूर्णिमाओं से अलग क्यों है?
रॉयल ऑब्जर्वेटरी ग्रीनविच के आधिकारिक अंतरिक्ष अनुसंधान पोर्टल के मुताबिक, आमतौर पर चांद हर दिन लगभग 50 मिनट की देरी से उगता है, लेकिन सबसे खास बात यह है कि सितंबर में पृथ्वी के खास झुकाव की वजह से यह लगातार कई रातों तक सूर्यास्त के महज 20 से 30 मिनट बाद ही निकल आता है। यानी शाम ढलते ही रोशनी बनी रहती है और अंधेरा देर से होता है। जब यह चांद हॉराइजन के पास से निकलता है, तब इसका आकार काफी बड़ा और रंग सुनहरा-नारंगी दिखने लगता है।
अलग-अलग संस्कृतियों में हार्वेस्ट मून का महत्व
स्मिथसोनियन संस्थान का सांस्कृतिक संग्रह में इस बात की जानकारी है कि यह पूर्णिमा केवल पश्चिमी देशों में ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग कोनों में बड़े उत्सव के रूप में मनाई जाती है। चीन और अन्य एशियाई देशों में इस समय 'मिड-ऑटम फेस्टिवल' या 'मून फेस्टिवल' का आयोजन होता है। वहीं, अमेरिका की पुरानी परंपराओं में इसे कॉर्न मून भी कहा जाता है।
यह भी पढ़ें- Tirupati Temple Mysterious Facts: तिरुपति बालाजी से जुड़े ये रहस्य, वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए इन घटनाओं की गुत्थी
हार्वेस्ट मून से जुड़ी दिलचस्प वैज्ञानिक बातें
सितंबर की पूर्णिमा के चंद्रमा से जुड़ी कुछ दिलचस्प वैज्ञानिक बातें भी हैं, जैसे -
- कई बार यह चांद अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी के काफी करीब होता है, जिससे यह सामान्य चांद की तुलना में थोड़ा बड़ा और ज्यादा चमकदार दिखता है।
- यह खगोलीय घटना गर्मी का मौसम खत्म होने और शरद ऋतु के शुरू होने का साफ संकेत देती है।
निष्कर्ष: सितंबर की पूर्णिमा यानी हार्वेस्ट मून कुदरत का एक बेहद खूबसूरत नजारा है। ऐसे में अगर आप भी आसमान और चांद-तारे निहारने की शौकीन हैं, तो सितंबर की इस पूर्णिमा का नजारा देखना बिल्कुल न भूलें। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
(IMAGE CREDIT: MAGNIFIC)
-1788360936893_m.webp)