गणेश उत्सव (Ganesh Utsav 2026) के दौरान जब बप्पा की आरती होती है तो कई घरों में एक आरती जरूर सुनाई देती है- ‘शेंदुर लाल चढ़ायो’। महाराष्ट्र के साथ-साथ उत्तर भारत में भी गणेश जी की पूजा के समय इसे गाया जाता है। आरती के नाम में ही गणेश जी को लगाए जाने वाले लाल शेंदूर का जिक्र किया गया है। इसके आगे आरती में बप्पा के रूप से लेकर उनकी शक्तियों और भक्तों की उनसे की जाने वाली प्रार्थना तक की बात आती है।
इसमें गणेश जी को हाथ में मोदक लिए हुए और लाल रंग से सजे हुए रूप में बताया गया है। खास बात यह है कि यह आरती सिर्फ बप्पा की तारीफ तक ही नहीं है बल्कि भक्त अपनी जिंदगी में ज्ञान, सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की भी कामना करता है। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे कि शेंदुर लाल चढ़ायो आरती का मतलब क्या है और इसकी कहानी क्या है? आइए जानते हैं-
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‘शेंदुर लाल चढ़ायो’ आरती में क्या कहा गया है?
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको।
हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको।
महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥1॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता॥
इस आरती की शुरुआत में बप्पा के प्यारे रूप का वर्णन किया गया है। जैसे उनका हाथी जैसा चेहरा, लाल रंग और गोल-मटोल पेट। साथ ही उन्हें शिव-पार्वती का बेटा बताते हुए उनके हाथों में लड्डू, मोदक और भोग का जिक्र किया जाता है। अंत में भक्त कहता है कि आपकी महिमा इतनी बड़ी है कि शब्दों में बयां नहीं हो सकती। इसलिए बस आपके चरणों में शीश झुकाता हूं।
आरती में आठ सिद्धियों का भी जिक्र
अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि।
विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी।
कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी।
गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥2॥
आरती में बप्पा की खास शक्तियों का भी जिक्र है, जहां आठों सिद्धियां उनकी सेवा में रहती हैं। उन्हें हमारे सारे संकट दूर करने वाला और हर शुभ काम की शुरुआत करने वाला भगवान माना गया है। कुल मिलाकर बताया गया है कि बप्पा हमारे सारे दुख हरने वाले और जीवन में उजाला लाने वाले हैं।
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फिर बप्पा से क्या मांगता है भक्त?
भावभगत से कोई शरणागत आवे।
संतत संपत सबही भरपूर पावे।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे।
गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥3॥
आरती के इस हिस्से में भक्त सीधे गणपति बप्पा से अपनी झोली भरने की प्रार्थना करता है। इसमें कहा गया है कि जो भी सच्चे मन से बप्पा की शरण में आता है, उसे घर में सुख-संपत्ति और संतान का सुख मिलता है। भक्त अपना पूरा जीवन और ध्यान बस बप्पा की भक्ति में लगाने की बात कह रहा है।
‘गोसावीनंदन’ क्यों आता है आरती में?
इस आरती की आखिरी लाइन में 'गोसावीनंदन' शब्द आया है, जिसका मतलब है 'गोसावी की संतान'। पुरानी मराठी कविताओं और आरती लिखने की परंपरा में कवि अपनी पहचान या नाम आखिरी लाइन में जरूर लिखते थे। इसे ही आरती लिखने वाले का हस्ताक्षर माना जाता है।
‘शेंदुर लाल चढ़ायो’ किसने लिखी?
इस मशहूर आरती को किसी एक इंसान ने लिखा है, इसका कोई पक्का रिकॉर्ड अभी तक नहीं मिला है। यह एक ऐसा आरती है जो पीढ़ियों से लोग गाते वले आ रहे हैं। बस आखिरी लाइन में आने वाला 'गोसावीनंदन' शब्द ही इस बात का संकेत देता है कि इसे लिखने वाले पुराने कवि की यह मुहर थी।
गणेश जी की आरती में इसका क्या भाव है?
इस पूरी आरती का मतलब यही है कि भक्त बप्पा के सुंदर रूप की तारीफ करने के बाद उनसे दिल खोलकर अपनी झोली भरने की दुआ मांगता है। इस आरती में खासतौर से इन चीजों की कामना की जाती है-
- ज्ञान और विद्या
- सुख और समृद्धि
- परिवार की खुशहाली
- संतान सुख
- परेशानियों से बचाव
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डिसक्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारियां और धार्मिक मान्यताएं पौराणिक कथाओं, धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं पर आधारित हैं। हमारा उद्देश्य केवल पाठकों तक सही और सांस्कृतिक जानकारी पहुंचाना है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-विधि या नियम को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से परामर्श अवश्य लें।
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