आपने भी कभी न कभी किसी को छींकते हुए देखा होगा और तुरंत उसके बाद God Bless You जरूर कहा होगा। कई बार लोग बिना सोचे-समझे यह बात बोल देते हैं, क्योंकि बचपन से ही ऐसा सुनते आए हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर छींक आने पर किसी को God Bless You क्यों कहते हैं?
दरअसल, इसके पीछे एक बहुत पुराना किस्सा है। कुछ लोग सोचते थे कि छींकते ही शरीर में कोई बुरी आत्मा घुस जाएगी, तो कुछ को लगता था कि एक पल के लिए दिल की धड़कन ही रुक गई है, लेकिन सच तो कुछ और ही है। आज का हमारा लेख भी इसी विषय पर है। हम आपको बता रहे हैं कि छींकने के बाद लोग आखिर God Bless You क्यों बोलते हैं? आइए जानते हैं-
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छींकने पर God Bless You कहने की शुरुआत कैसे हुई?
God Bless You कहने का ट्रेंड आज का नहीं बल्कि सदियों पुराना है। इसकी शुरुआत रोम में फैले बूबोनिक प्लेग नाम के खतरनाक महामारी से हुई थी। उस समय जब किसी को प्लेग होता था, तो उसे तेज खांसी और छींकें आने लगती थीं। हालात इतने बिगड़ गए कि वहां के पोप ग्रेगरी ने लोगों से कहा कि जो भी छींकता दिखे, उसे तुरंत God Bless You (भगवान आपका भला करे) बोलो।
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लोगों का मानना था कि दुआ करने से शायद बीमार इंसान की जान बच जाए। बस, वहीं से यह बात हर जगह फैल गई और आज तक लोग किसी के छींकते ही आदत से God Bless You बोल देते हैं।
छींकने पर बुरी आत्मा निकलने की भी है मान्यता
God Bless You कहने के पीछे एक और मजेदार पुरानी अंधविश्वास वाली कहानी भी है। पुराने जमाने में लोग मानते थे कि छींकते समय इंसान के शरीर से उसकी आत्मा या कोई बुरी आत्मा बाहर निकल आती है। अब डर इस बात का था कि कहीं वो बुरी आत्मा किसी और के अंदर न चली जाए या खाली जगह देखकर कोई दूसरी बुरी ताकत शरीर पर कब्जा न कर ले। इसीलिए छींकने वाले को तुरंत God Bless You बोल दिया जाता था, ताकि भगवान की कृपा से वो सुरक्षित रहे। हालांकि, यह पूरी तरह से एक पुरानी सोच और मनगढंत कहानी है, साइंस में इसका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
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क्या छींकने से सच में रुक जाती है दिल की धड़कन?
आपने भी अक्सर सुना होगा कि छींकते समय दिल की धड़कन एक सेकंड के लिए रुक जाती है और इसीलिए लोग God Bless You बोलते हैं, लेकिन यह सही नहीं है। छींकने से दिल के रुकने का कोई लेना-देना नहीं है। छींकना तो हमारे शरीर का अपना ऑटो-क्लीन सिस्टम है। जब भी नाक या सांस की नली में धूल-मिट्टी या कचड़ा जाता है, तो बॉडी उसे बाहर फेंकने के लिए बस एक जोरदार छींक मारती है।
आखिर छींक आती क्यों है?
आपको बता दें कि जैसे ही नाक में थोड़ी सी भी धूल, धुआं या कचड़ा वला जाता है, तो दिमाग तुरंत एक्शन में आ जाता है। शरीर उस कचड़े को बाहर फेंकने के लिए एक जोर का धक्का मारता है, जिसे हम छींक कहते हैं। यानी छींक आना एकदम नॉर्मल बात है, यह शरीर का अपना क्लीनिंग सिस्टम है। इसका दिल की धड़कन रुकने या किसी भूत-प्रेत से दूर-दूर तक कोई कनेक्शन नहीं है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ऐतिहासिक कहानियों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों की जानकारी बढ़ाना है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय या वैज्ञानिक सलाह (Medical Advice) के रूप में न लें। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा किसी योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श करें।
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