क्या आपको कभी ऐसा महसूस होता है कि आपका दिमाग एक ऐसी दौड़ में शामिल है, जहां विचार और सोच खत्म होने का नाम ही नहीं लेती? एक ही बात को बार-बार सोचना, पुरानी गलतियों पर पछताना या फ्यूचर की उन समस्याओं से डरना जो अभी आई भी नहीं हैं, इसे ओवरथिंकिंग कहते हैं। यह न केवल हमारी मानसिक शांति छीन लेती है, बल्कि हमारे फैसले लेने की क्षमता को भी कमजोर कर देती है। इस समस्या से डील करना आना चाहिए। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि अगर आप भी विचारों के इस चक्रव्यूह में फंसे हैं, तो यहां दिए गए तरीके आपकी कैसे मदद कर सकते हैं। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
ओवरथिंकिंग को पहचानें और एक्सेप्ट करें
किसी भी समस्या का समाधान उसकी पहचान करने से शुरू होता है। जब भी आप महसूस करें कि आपका दिमाग एक ही बात को लूप में घुमा रहा है, तो रुकें और खुद से कहें, "मैं अभी ओवरथिंक कर रही हूं।"
जब विचार दिमाग में शोर मचाएं, तो उन्हें कागज पर लिखएं। इससे दिमाग को लगता है कि उसने सोच सेफ कर ली है।
यह फॉर्मूला है सही
हम दिमाग को सोचने से पूरी तरह रोक नहीं सकते, लेकिन हम उसे कंट्रोल कर सकते हैं। खुद को दिन में एक निश्चित समय दें जिसे 'वरी विंडो' कहें।
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अपने आज में जीएं
ओवरथिंकिंग या तो बीते हुए कल में होती है या आने वाले कल में। प्रेजेंट में रहने के लिए 5-4-3-2-1 तरीके को अपनाएं। आप 5 चीजें देखें, 4 चीजें छुएं, 3 आवाजें सुनें, 2 खुशबू महसूस करें और 1 स्वाद लें।
ऐसे में आप सोचने के बजाय यह पूछें, इस समस्या को हल करने के लिए मैं अभी क्या छोटा कदम उठा सकती हूं? बता दें कि काम करने से डर खत्म होता है और दिमाग को नई दिशा मिलती है।
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