दिवाली की तैयारियों के बीच धनतेरस का त्योहार भी नजदीक आ गया है। इस दिन बाजारों में सोने-चांदी के गहने, सिक्के और नए बर्तन खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि धनतेरस पर नई चीजें खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इस साल त्योहार की तारीख को लेकर कुछ लोगों के मन में उलझन है। कोई 5 नवंबर तो कोई 6 नवंबर को धनतेरस बता रहा है। ऐसे में आइए पंडित अरुणेश कुमार शर्मा से जानते हैं कि धनतेरस कब मनाई जाएगा?
धनतेरस का महत्व
कार्तिक महीने में दिवाली से पहले आने वाला धनतेरस का त्योहार धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से खास महत्व रखता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। घरों में दीपक जलाए जाते हैं और लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी या बर्तन खरीदते हैं। धनतेरस को लेकर खरीदारी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन सबसे पहले इसकी सही तारीख और पूजा का समय जानना जरूरी है।
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धनतेरस 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। धनतेरस से ही पांच दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है।
धनतेरस 2026 की तिथि
धनतेरस पर पूजा का समय शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। नई दिल्ली के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक बताया गया है।
धनतेरस की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा।
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इन शहरों में कब करें धनतेरस की पूजा?
- नई दिल्ली: शाम 6:02 से 7:57 बजे तक
- गुरुग्राम: शाम 6:03 से 7:59 बजे तक
- जयपुर: शाम 6:11 से 8:07 बजे तक
- चेन्नई: शाम 6:14 से 8:10 बजे तक
- हैदराबाद: शाम 6:15 से 8:13 बजे तक
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों होती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए, धनतेरस के दिन उनकी पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा भी होती है। मां लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी, जबकि कुबेर को धन का देवता माना जाता है।
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धनतेरस की पूजा कैसे करें?
धनतेरस के दिन सुबह घर की अच्छी तरह सफाई करें और मुख्य दरवाजे को रंगोली, फूलों और दीपकों से सजाएं। शाम को पूजा की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। इसके बाद भगवान धन्वंतरि को फूल, फल, मिठाई और दीपक अर्पित करें। फिर मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करें। अंत में आरती करके प्रसाद बांटें और घर के मुख्य दरवाजे सहित अलग-अलग जगहों पर दीपक जलाएं।
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पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
इस दिन सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। कई लोग चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां या अपनी जरूरत के हिसाब से कोई धातु का सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही करनी चाहिए। मान्यता के मुताबिक, धनतेरस पर खरीदी गई नई वस्तु घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
इस साल धनतेरस को लेकर कंफ्यूजन न रखें क्योंकि यह पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा। शाम को सही मुहूर्त में पूजा करें और अपनी क्षमता के हिसाब से कोई एक नई चीज जरूर खरीदें। याद रखें कि धनतेरस की असली शुभता सोने के वजन में नहीं, बल्कि घर की सफाई, दीपक की रोशनी और मन की श्रद्धा में है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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