भारत देश में अलग-अलग जगह के हिसाब से अलग-अलग उत्सव मनाए जाते हैं। ये सभी उत्सव न सिर्फ देशभर में प्रसिद्ध होते हैं, बल्कि विदेशों में भी इनके गुणगान गाए जाते हैं। आज हम आपको ऐसे ही दो खास उत्सवों के बारे में बताएंगे जो हर साल सर्दियों के मौसम की आहट पर सजते हैं। उत्तर में बर्फ से ढके लद्दाख के ऊंचे पहाड़ों से लेकर पूर्वोत्तर में नागालैंड की हरी-भरी खूबसूरत वादियों तक, हमारी सांस्कृतिक विरासत बेहद खूबसूरत और अनूठी है।
नागालैंड का हॉर्नबिल फेस्टिवल और लद्दाख का हेमिस उत्सव
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के आधिकारिक आर्काइव और सांस्कृतिक कोष के अनुसार नागालैंड का हॉर्नबिल फेस्टिवल और लद्दाख का हेमिस उत्सव देशभर में मशहूर है। हॉर्नबिल हर साल 1 से 10 दिसंबर के बीच नागालैंड में सर्दियों की शुरुआत का शानदार आगाज करता है। वहीं लद्दाख का यह विशेष आयोजन कड़ाके की ठंड और बर्फबारी से ठीक पहले लद्दाखी संस्कृति का रंग बिखेरता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि पहाड़ियों और वादियों में कड़ाके की ठंड की आहट के साथ ही ये उत्सव क्यों मनाए जाते हैं? अगर आपके मन में भी यह सवाल है, तो आइए जानते हैं इसके बारे में -
1. नागालैंड का हॉर्नबिल उत्सव
नागालैंड सरकार के पर्यटन विभाग के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक - हॉर्नबिल उत्सव का नाम नागा जनजातियों में पूजनीय माने जाने वाले 'हॉर्नबिल' पक्षी के नाम पर रखा गया है। नागालैंड की सभी 16 से अधिक जनजातियां अपनी फसल की कटाई के बाद सर्दियों की शुरुआत में एक साथ इकट्ठा होती हैं। इस दौरान नागा समुदाय अपनी पुरानी परंपराओं, पारंपरिक नृत्यों और युद्ध कलाओं के साथ यह उत्सव मनाता है। किस्मा की ठंडी वादियों में लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, स्थानीय व्यंजनों और नागा रॉक संगीत के साथ इस त्यौहार को और भी शानदार और यादगार बना देते हैं।
(image credit: instagram/nikon_northeast)
2. लद्दाख का हेमिस उत्सव
लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के आधिकारिक पर्यटन पोर्टल के हिसाब से लद्दाख का हेमिस उत्सव गुरु पद्मसंभव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो तिब्बती कैलेंडर के अनुसार इसका मुख्य धार्मिक आयोजन गर्मियों के दौरान होता है, लेकिन लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सर्दियों की शुरुआत में भी इससे जुड़े विशेष आयोजन होते हैं। खतरनाक बर्फबारी शुरू होने से ठीक पहले लद्दाखी लोग इस उत्सव के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं। इस दौरान लोग रंग-बिरंगे रेशमी कपड़े और खूबसूरत मुखौटे पहनकर लामाओं द्वारा किया जाने वाला प्रसिद्ध 'छम डांस' भी देखते हैं।
आखिर सर्दियों की शुरुआत में ही क्यों मनाए जाते हैं ये उत्सव?
नागालैंड और लद्दाख दोनों ही पहाड़ी इलाके हैं। मॉनसून के खत्म होने के बाद जब कड़ाके की ठंड की शुरुआत होती है, तब इन क्षेत्रों में घूमना और आवाजाही करना सबसे आसान माना जाता है। इसके अलावा, फसल कटाई के बाद मिलने वाले खाली समय और सुहावने ठंडे मौसम की वजह से लोग एकजुट होकर इस आयोजन को बेहतर बनाते हैं। यह त्योहार भीषण सर्दियों का सामना करने से पहले लोगों में असीम उत्साह और नई ऊर्जा भर देता है।
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नागालैंड कैसे पहुंचें?
अगर आप नागालैंड के हॉर्नबिल उत्सव और लद्दाख के हेमिस उत्सव में जाना चाहती हैं, तो नागालैंड जाने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा असम का दीमापुर है। दीमापुर से कोहिमा की दूरी लगभग 74 किमी है, जहां से आप पर्सनल कैब या टैक्सी लेकर कोहिमा पहुंच सकती हैं। कोहिमा से नागा हेरिटेज विलेज केवल 12 किमी की दूरी पर है।
लद्दाख कैसे पहुंचें?
अगर आप लद्दाख के हेमिस मठ जाना चाहती हैं, तो सबसे पहले लेह शहर पहुंचना होगा। इसके लिए आप लेह के कुशक बकुला रिम्पोछे हवाई अड्डे की फ्लाइट ले सकती हैं। लेह शहर से हेमिस मठ की दूरी लगभग 45 किमी है, जहां के लिए आपको आसानी से टैक्सी मिल जाएगी।
(image credit: instagram/taniachatterjee.official)
निष्कर्ष: नागालैंड का हॉर्नबिल और लद्दाख का हेमिस उत्सव दोनों ही भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के अनमोल रत्न हैं। अगर आप भी कड़ाके की ठंड से पहले भारत की इन दो खूबसूरत वादियों का अनुभव लेना चाहती हैं, तो सर्दियों की शुरुआत में इन उत्सवों की ट्रिप आसानी से प्लान कर सकती हैं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हरजिंदगी से।
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