नवरात्रि की सुबह घर में जलता दीपक, धूप की सुगंध और मां दुर्गा का स्मरण मन को कुछ देर ठहरने का अवसर देते हैं। इन नौ दिनों में कोई दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है, तो कोई आरती और मंत्र जाप के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है। ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस कुमार के अनुसार, मां दुर्गा के 108 नामों का पाठ भी इसी उपासना परंपरा का हिस्सा है। श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र में वर्णित ये नाम देवी के विभिन्न स्वरूपों, गुणों और शक्तियों का स्मरण कराते हैं।
पाठ का महत्व
इन पावन नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ मां दुर्गा की प्रसन्नता और कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। भक्त सुख, कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से यह उपासना करते हैं।
दैनिक जीवन में इस अभ्यास के लिए निकाला गया शांत समय आत्मचिंतन का अवसर भी बन सकता है। भय या उलझन के बीच देवी के साहसी स्वरूपों का स्मरण अपने कर्तव्यों की ओर लौटने की प्रेरणा दे सकता है। इन लाभों को श्रद्धा और व्यक्तिगत अनुभव के संदर्भ में समझना चाहिए।
पाठ की सही विधि
इस पाठ को करने के लिए सही विधि का पता होना जरूरी है। आइए जानते हैं यहां।
- पाठ के लिए सुबह या शाम का ऐसा समय चुनें, जब कुछ देर बिना व्यवधान बैठ सकें।
- स्नान करके अथवा हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें और साफ स्थान पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें।
- अपनी सुविधा के अनुसार दीपक जलाएं, फूल अर्पित करें और मन में प्रार्थना करें कि यह उपासना आपके भीतर सद्बुद्धि, साहस और करुणा बढ़ाए।
- इसके बाद 108 नामों को धीरे-धीरे, स्पष्ट उच्चारण के साथ पढ़ें।
- पहली बार पाठ कर रहे हों तो जल्दबाजी करने के बजाय नामों को ध्यान से पढ़ना अधिक उपयोगी रहेगा।
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र के अनुसार, मां दुर्गा के 108 नाम
1. सती
2. साध्वी
3. भवप्रीता
4. भवानी
5. भवमोचनी
6. आर्या
7. दुर्गा
8. जया
9. आद्या
10. त्रिनेत्रा
11. शूलधारिणी
12. पिनाकधारिणी
13. चित्रा
14. चण्डघण्टा
15. महातपाः
16. मनः
17. बुद्धिः
18. अहंकारा
19. चित्तरूपा
20. चिता
21. चितिः
22. सर्वमन्त्रमयी
23. सत्ता
24. सत्यानन्दस्वरूपिणी
25. अनन्ता
26. भाविनी
27. भाव्या
28. भव्या
29. अभव्या
30. सदागति
31. शाम्भवी
32. देवमाता
33. चिन्ता
34. रत्नप्रिया
35. सर्वविद्या
36. दक्षकन्या
37. दक्षयज्ञविनाशिनी
38. अपर्णा
39. अनेकवर्णा
40. पाटला
41. पाटलावती
42. पट्टाम्बरपरीधाना
43. कलमञ्जीररञ्जिनी
44. अमेयविक्रमा
45. क्रूरा
46. सुन्दरी
47. सुरसुन्दरी
48. वनदुर्गा
49. मातङ्गी
50. मतङ्गमुनिपूजिता
51. ब्राह्मी
52. माहेश्वरी
53. ऐन्द्री
54. कौमारी
55. वैष्णवी
56. चामुण्डा
57. वाराही
58. लक्ष्मी
59. पुरुषाकृति
60. विमला
61. उत्कर्षिणी
62. ज्ञाना
63. क्रिया
64. नित्या
65. बुद्धिदा
66. बहुला
67. बहुलप्रेमा
68. सर्ववाहनवाहना
69. निशुम्भशुम्भहननी
70. महिषासुरमर्दिनी
71. मधुकैटभहन्त्री
72. चण्डमुण्डविनाशिनी
73. सर्वासुरविनाशा
74. सर्वदानवघातिनी
75. सर्वशास्त्रमयी
76. सर्वास्त्रधारिणी
77. सत्या
78. अनेकास्त्रधारिणी
79. अनेकशस्त्रहस्ता
80. कुमारी
81. एककन्या
82. कैशोरी
83. युवती
84. यति
85. अप्रौढा
86. प्रौढा
87. वृद्धमाता
88. बलप्रदा
89. महोदरी
90. मुक्तकेशी
91. घोररूपा
92. महाबला
93. अग्निज्वाला
94. रौद्रमुखी
95. कालरात्रि
96. तपस्विनी
97. नारायणी
98. भद्रकाली
99. विष्णुमाया
100. जलोदरी
101. शिवदूती
102. कराली
103. अनन्ता
104. परमेश्वरी
105. कात्यायनी
106. सावित्री
107. प्रत्यक्षा
108. ब्रह्मवादिनी
मां दुर्गा के 108 नाम केवल नाम नहीं, बल्कि उनके 108 दिव्य स्वरूपों और शक्तियों का प्रतीक हैं। नवरात्रि में इनका श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मन को शांति मिलती है।
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